
नाथनगर/भागलपुर, 29 मई 2026। भागलपुर जिले के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र के भीतरी प्रक्षेत्र में घटित हुए चर्चित शिवम कुमार हत्याकांड की विधिक फाइलों को खंगालने में जुटी पुलिसिया जासूसी विंग को एक अत्यंत सनसनीखेज और विस्मयकारी कामयाबी हाथ लगी है। रिश्तों की शुचिता और सामाजिक ताने-बाने को मलबे की तरह ढहा देने वाले इस कांड का पटाक्षेप करते हुए पुलिस ने खुलासा किया है कि वारदात का असली मास्टरमाइंड कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित का अपना सगा भाई सन्नी सिंह ही विनिर्मित पाया गया है।
पुलिस के मुख्य अनुसंधान संभाग ने कूटनीतिक कड़ियों को आपस में जोड़ते हुए इस हत्याकांड के भीतरी चक्रव्यूह को पूरी तरह से क्रैक कर दिया है। इसी प्रक्रम के तहत कार्रवाई करते हुए मधुसूदनपुर थाना पुलिस ने त्वरित दंडात्मक विन्यास के तहत अप्राथमिकी अभियुक्त वीरू सिंह को भौतिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है, जिसे विधिक औपचारिकताओं के उपरांत न्यायिक कस्टडी के तहत सीधे जेल की अभेद्य चहारदीवारी के पीछे ब्लॉक कर दिया गया है। इस बड़े राजफाश के लाइव होते ही संपूर्ण बहबलपुर और नाथनगर प्रक्षेत्र के नागरिकों के बीच गहरा सांगठनिक कौतूहल और हलचल लाइव मोड पर सक्रिय संधारित देखी जा रही है।
6 अगस्त की खूनी बैकस्टोरी: पिता ने भूमि विवाद में दर्ज कराया था अन्य पर केस
इस प्रलयंकारी वारदात के बुनियादी लेआउट और पिछले टाइम-स्टैम्प की स्क्रूटनी करने पर यह प्रामाणिक तथ्य सामने आता है कि मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किशनपुर तालाब के समीप पिछले वर्ष यानी छह अगस्त 2025 की शाम को बहबलपुर निवासी संजीव सिंह के छोटे पुत्र शिवम कुमार की अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने अंधाधुंध गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी थी। वारदात के तुरंत बाद पीड़ित के पिता संजीव सिंह ने अपने भीतरी अवसाद और स्थानीय रंजिशों के आधार पर लक्ष्मणबाग प्रक्षेत्र के निवासी घीघल यादव, जोगी यादव, मिट्ठू और राजा सिंह के विरुद्ध जमीन विवाद की संचिका को आधार बनाकर कड़क नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पिता का आरोप था कि कतिपय भू-माफियाओं के सिंडिकेट ने उनके बेटे को रास्ते से हटाने के वास्ते इस खूनी प्रक्रम को अंजाम दिया है। हालांकि, पुलिस के आला कप्तानों ने मामले के भीतरी लूपहोल्स को भांपते हुए केवल इस पारंपरिक थ्योरी पर निर्भर रहने के बजाय समानांतर रूप से फॉरेंसिक और तकनीकी अनुसंधान का ग्रिड सक्रिय रखा।
तीसरी आंख और एटीएम ट्रेल से अनलॉक हुआ राज: हमनाम दोस्त से पूछताछ में मिला सुराग
इस अंधेरे हत्याकांड की कड़ियों को डिजिटल पटल पर जोड़ने में दुकान और सड़कों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के डेटा डंप ने कप्तानी भूमिका निभाई। जासूसी सेल को तकनीकी स्क्रूटनी के दौरान यह इनपुट प्राप्त हुआ कि कत्ल की नियत समय सारणी से ठीक कतिपय मिनट पहले मृतक शिवम कुमार अपने एक हमनाम मित्र (जिसका नाम भी शिवम ही था) के साथ एक ही बाइक पर संचरण कर रहा था। पुलिस की रेडिंग टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक के उस हमनाम दोस्त को पूछताछ केबिन के भीतर लॉक कर दिया।
पूछताछ के कड़े विन्यास के सामने उस दोस्त ने एक बहुत बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वारदात की शाम वे दोनों एक साथ नूरपुर अवस्थित एक मुख्य एटीएम (ATM) काउंटर पर वित्तीय तरलता (कैश) की निकासी करने के वास्ते प्रविष्ट हुए थे, जिसका प्रमाण वहां के सीसीटीवी फुटेज में भी लाइव रिकॉर्ड दर्ज था। दोस्त ने आगे बताया कि एटीएम से बाहर निकलते ही वहां अचानक मृतक शिवम का बड़ा भाई सन्नी सिंह एक बाइक के साथ प्रविष्ट हुआ। सन्नी ने कूटनीतिक रूप से शिवम को अपने साथ बाइक पर बैठाया और उसे अपने साथ डाइवर्ट कर लेकर चला गया। इस घटनाक्रम के महज 10 मिनट बीतने की समय सारणी के भीतर ही पास के एक बगीचे से प्रखर रूप से फायरिंग और गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी, जहां अपराधियों ने शिवम को गोलियों से भूनकर हमेशा के लिए म्यूट कर दिया था।
सीडीआर डेटा डंप ने खोला भाई का कच्चा चिट्ठा: वीरू की बाइक का हुआ था इस्तेमाल
तकनीकी सेल के कनिष्ठ अभियंताओं ने जब मामले को और अधिक विधिक पुख्ता विन्यास देने के वास्ते मृतक शिवम के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और टावर सिग्नल्स खंगाले, तो कत्ल का पूरा अभियांत्रिक नेटवर्क ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। सीडीआर के विश्लेषण से प्रामाणिक साक्ष्य हस्तगत हुए कि घटना के शुरुआती टाइम-स्टैम्प से लेकर वारदात के अंतिम पड़ाव तक, मास्टरमाइंड भाई सन्नी सिंह और भीक मकित्ता गांव के कुख्यात विकास यादव के बीच अनवरत रूप से कई बार टेलीफोनिक संवाद और गुप्त सिग्नल्स का आदान-प्रदान लाइव मोड पर संचरित हो रहा था।
अनुसंधान में यह बात भी पूरी कड़ाई से प्रमाणित हो चुकी है कि वारदात के दिन भाई सन्नी सिंह ने जिस मोटरसाइकिल का कूटनीतिक इस्तेमाल अपने भाई को जाल में फंसाने के वास्ते किया था, वह मूल रूप से बहबलपुर निवासी सह-साजिशकर्ता वीरू सिंह के नाम पर ही विधिक रूप से पंजीकृत संधारित थी। इन तमाम वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन के उपरांत पुलिस ने सन्नी सिंह, विकास यादव और वीरू सिंह को इस कांड में अप्राथमिकी अभियुक्त विनिर्मित करते हुए चार्जशीट का लेआउट लाइन-अप किया।
सवा बीघा जमीन की कड़क रंजिश: एकरारनामे के फेर में भाई बना कसाई
इस जघन्य भ्रातघातक कृत्य के भीतरी बजटीय और आर्थिक मोटिव (कारण) का यदि बारीक मूल्यांकन किया जाए, तो पूरा विवाद भूमि साम्राज्य की कड़क होड़ और वित्तीय लेन-देन की विसंगतियों पर टिका परिलक्षित होता है। पुलिस केस डायरी के आधिकारिक विलेखों के अनुसार, मृतक शिवम कुमार की लगभग सवा बीघा की एक अत्यंत कीमती कृषि भूमि पर आरोपी विकास यादव का पिछले लंबे समय से अवैध कब्जा संधारित था। इस विशिष्ट भूखंड को लेकर मिलने वाली वित्तीय राशि और लेज़र बुक्स के मिलान को लेकर भाई सन्नी सिंह, विकास यादव और मृतक शिवम के बीच लगातार गहरा वैचारिक टकराव और गाली-गलौज लाइव मोड पर सक्रिय रहती थी।
बात यहीं तक म्यूट नहीं थी, बल्कि मृतक शिवम कुमार ने अपने बड़े भाई सन्नी की प्राथमिकताओं को दरकिनार करते हुए, उक्त कीमती सवा बीघा जमीन का एक विधिक एकरारनामा (Agreement) पूर्व में ही घीघल यादव सहित अंचल के चार अन्य रसूखदार पक्षों के साथ मुकम्मत कर लॉक कर दिया था। इस विधिक समझौते के कारण भाई सन्नी सिंह और विकास यादव के भू-सिंडिकेट को होने वाला भारी आर्थिक मुनाफा पूरी तरह से ब्लॉक होने की अवस्थिति में प्रविष्ट हो गया था। इसी वित्तीय घाटे और जमीन के नियंत्रण को दोबारा हस्तगत करने के कुत्सित इरादे से सगे भाई सन्नी सिंह ने कूटनीतिक साजिश रची और अपराधियों को रसद व कप्तानी इनपुट मुहैया कराकर अपने ही सगे भाई की जीवन लीला को म्यूट करा दिया।
मधुसूदनपुर थाना प्रभारी के आधिकारिक विनिर्देशों के अनुसार, इस पूरे कांड के एक अन्य मुख्य स्तंभ विकास यादव को पुलिस की जासूसी टीम ने आज से ठीक पांच दिन पूर्व ही प्रखर नाकेबंदी कर दबोचा था और उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजा जा चुका है। वहीं, गुरुवार को वीरू सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की विशेष खोजी विंग मुख्य मास्टरमाइंड भाई सन्नी सिंह और कतिपय अन्य कनिष्ठ शूटरों के संभावित ग्रामीण हाइड-आउट्स (ठिकानों) पर लगातार छापेमारी ग्रिड सक्रिय किए हुए है। थानों को निर्देश दिया गया है कि मोबाइल के अन्य डिलीटेड डेटा डंप को रिकवर कर स्पीडी ट्रायल के माध्यम से इस पूरे सिंडिकेट को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर कानून के कड़े हंटर के समक्ष प्रविष्ट कराया जाए।


