बिहार में शराबबंदी पर सरकार की सख्ती बढ़ी, तस्करों पर कार्रवाई तेज करने और 100% अवैध शराब नष्ट करने का निर्देश

बिहार में शराबबंदी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से गुरुवार को पटना में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शराबबंदी कानून के वर्तमान क्रियान्वयन की समीक्षा की गई और विभिन्न विभागों को समन्वित कार्रवाई के जरिए कानून को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।

बैठक की अध्यक्षता मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन साहनी ने की। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ रेलवे, एयरपोर्ट, सशस्त्र सीमा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में शराबबंदी कानून के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करना, अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाना तथा अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना था।

शराबबंदी कानून को लेकर सरकार का स्पष्ट संदेश

बैठक में मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बिहार सरकार नशामुक्त समाज के निर्माण के अपने संकल्प पर पूरी तरह कायम है और शराबबंदी कानून के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि शराब के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान है, जिसमें प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता की भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों को साझा रणनीति के तहत काम करने का निर्देश दिया गया।

जब्त शराब के विनष्टीकरण में लाई जाएगी तेजी

समीक्षा बैठक का एक प्रमुख विषय जब्त की गई अवैध शराब के विनष्टीकरण की प्रक्रिया रहा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिलों में जब्त शराब को समयबद्ध तरीके से नष्ट किया जाए और 100 प्रतिशत विनष्टीकरण का लक्ष्य निर्धारित कर उसे हर हाल में पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि जब्ती के बाद लंबे समय तक शराब का मालखानों में रखा रहना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अवैध शराब का शीघ्र निपटान हो।

अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि विनष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत हो ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।

मालखानों की नियमित जांच और सत्यापन पर जोर

बैठक के दौरान मालखानों में रखी गई जब्त सामग्री की निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में मालखानों का नियमित निरीक्षण और सत्यापन किया जाए।

उन्होंने कहा कि जब्त शराब और अन्य सामग्री के रख-रखाव में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। समय-समय पर निरीक्षण से न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी मजबूत होगी।

सरकार का मानना है कि नियमित सत्यापन व्यवस्था से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और जब्ती से लेकर विनष्टीकरण तक की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

बड़े तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान

बैठक में अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क को ध्वस्त करने पर विशेष बल दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल छोटे स्तर के मामलों तक सीमित रहने के बजाय शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क की पहचान की जाए और उसके संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की संपत्तियों, आर्थिक गतिविधियों और नेटवर्क की जांच की जाए तथा आवश्यक होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और तेज किया जाए।

सरकार का मानना है कि शराब तस्करी के पीछे सक्रिय बड़े गिरोहों पर कार्रवाई से अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने में मदद मिलेगी।

सीमावर्ती इलाकों में निगरानी होगी और कड़ी

बिहार की सीमाएं कई राज्यों से जुड़ी हुई हैं, जहां शराब की बिक्री वैध है। इसी कारण सीमा क्षेत्रों के माध्यम से अवैध शराब की तस्करी की कोशिशें लगातार होती रहती हैं।

बैठक में इस चुनौती पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने सीमावर्ती जिलों और चेक पोस्टों पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रवेश करने वाले बड़े वाहनों की गहन जांच की जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा विशेष अभियान चलाकर ऐसी तस्करी को राज्य की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही रोकने की रणनीति पर जोर दिया गया। अधिकारियों को आधुनिक निगरानी तकनीकों और सूचना तंत्र का अधिक उपयोग करने का सुझाव भी दिया गया।

रेलवे मार्ग से शराब तस्करी रोकने की नई रणनीति

समीक्षा बैठक में रेलवे मार्ग के जरिए होने वाली शराब तस्करी भी प्रमुख मुद्दा रही। बिहार आने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का उपयोग तस्करों द्वारा शराब की खेप पहुंचाने के लिए किए जाने की आशंका को देखते हुए रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों को विशेष निर्देश दिए गए।

मंत्री ने कहा कि राजधानी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस सहित अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में नियमित जांच अभियान चलाए जाएं। इसके लिए विशेष जांच दलों का गठन कर यात्रियों के सामान और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया।

रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई करने को कहा गया ताकि रेल मार्ग से होने वाली तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

पटना एयरपोर्ट पर चलेगा जागरूकता अभियान

बैठक में हवाई मार्ग से शराब लाने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा की गई। मंत्री ने पटना एयरपोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया कि बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बारे में यात्रियों को व्यापक जानकारी दी जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि एयरपोर्ट परिसर में डिजिटल स्क्रीन, सूचना पट्ट और सार्वजनिक उद्घोषणाओं के माध्यम से यात्रियों को यह बताया जाए कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का मानना है कि जागरूकता बढ़ने से अनजाने में कानून का उल्लंघन करने वाले मामलों में कमी आएगी और यात्रियों को पहले से आवश्यक जानकारी मिल सकेगी।

सूचना साझाकरण तंत्र होगा मजबूत

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शराबबंदी कानून के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी विभाग और एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इसके लिए सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम सूचना आदान-प्रदान से तस्करी के नेटवर्क का जल्द पता लगाया जा सकेगा और कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी।

सुरक्षा एजेंसियों, उत्पाद विभाग, रेलवे, एयरपोर्ट प्रशासन और सीमावर्ती बलों के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में भी कई सुझावों पर चर्चा की गई।

नशामुक्त बिहार के लक्ष्य की ओर सरकार का फोकस

बैठक के अंत में मंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार शराबबंदी कानून को पूरी सख्ती के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के कारोबार, तस्करी और भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार का मानना है कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, जन-जागरूकता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से बिहार को नशामुक्त समाज के लक्ष्य की ओर और तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से राज्यभर में शराबबंदी कानून को और अधिक मजबूत बनाने के लिए व्यापक रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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