
पटना, 27 मई 2026: बिहार में खेलों को नई दिशा देने और राज्य की खेल अवसंरचनाओं को अधिक उपयोगी एवं सक्रिय बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विकास भवन स्थित खेल विभाग में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य की खेल मंत्री ने खेल परिसरों के सुदृढ़ संचालन, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और विशेषज्ञ आधारित खेल ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में खेल विभाग की विभिन्न योजनाओं, स्टेडियमों की स्थिति, प्रशिक्षण व्यवस्था और खेल परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल, निदेशक आरिफ अहसन, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रन शंकरण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की वर्तमान स्थिति और आगामी रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राज्य में वर्षों से निर्मित खेल भवन, स्टेडियम, व्यायामशालाएं और खेल मैदान केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने कहा कि कई जगहों पर खेल अवसंरचनाएं बनने के बाद उनका समुचित संचालन नहीं हो पाता, जिससे खिलाड़ी अपेक्षित लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसलिए अब सरकार का फोकस निर्माण के साथ-साथ प्रभावी संचालन और रखरखाव पर भी रहेगा।
खेल मंत्री ने कहा कि राज्य में खेल परिसरों के संचालन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत सहयोग लेने की दिशा में विभाग आगे बढ़ेगा। इसके लिए विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाएगी, ताकि जिला स्तर पर खेल परिसरों को लंबे समय तक सक्रिय और आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में इस व्यवस्था का विस्तार बड़े आउटडोर स्टेडियमों, खेल परिसरों और अन्य खेल परिसंपत्तियों तक किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि खेल परिसरों का संचालन व्यवस्थित ढंग से हो, तो राज्य में खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास और प्रतियोगी वातावरण मिल सकेगा।
खेल मंत्री ने राज्य की विभिन्न खेल संघों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेल संघों को खेल अवसंरचना के संचालन और प्रशिक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। जिला स्तर पर प्रशिक्षण केंद्र चलाने, खिलाड़ियों को खेल उपकरण उपलब्ध कराने और प्रतिभाओं की पहचान करने में खेल संघों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि मान्यता प्राप्त खेल संघों के पदाधिकारियों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए। उनका कहना था कि खेल संघों के अनुभव और तकनीकी जानकारी का उपयोग कर खेल परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खिलाड़ियों को भी अधिक पेशेवर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकेंगी।
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि अब पंचायत स्तर पर नए खेल मैदानों के निर्माण के बजाय पहले से उपलब्ध खेल अवसंरचनाओं को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने पर प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि पहले से मौजूद परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग कर कम समय में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियों के गठन की योजना तैयार की गई है। इन समितियों में स्थानीय विधायक, खेल विशेषज्ञ और जिला खेल पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा। समिति संबंधित स्टेडियम या खेल मैदान के संचालन और रखरखाव की निगरानी करेगी। प्रारंभिक चरण में सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि आगे चलकर इन परिसरों को आत्मनिर्भर मॉडल में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में राज्य की खेल प्रतिभाओं और पदक विजेताओं को सम्मान देने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया गया। अब बिहार के प्रसिद्ध खिलाड़ियों और खेल विभूतियों के नाम पर स्टेडियम, खेल भवन और अन्य खेल परिसरों का नामकरण किया जाएगा। विभाग ऐसे खिलाड़ियों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है।
खेल मंत्री ने स्पष्ट कहा कि खेल अवसंरचना का निर्माण सामान्य भवनों की तरह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्टेडियम, ट्रैक, प्रशिक्षण केंद्र और खेल परिसर खिलाड़ियों की आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन किए जाने चाहिए। इसके लिए अनुभवी खेल विशेषज्ञों और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर सलाहकारों की निगरानी में निर्माण कार्य कराए जाने की आवश्यकता है।
खेल सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं या अन्य विभागों द्वारा बनाए जा रहे खेल परिसरों में भी खेल विशेषज्ञों की सलाह अनिवार्य रूप से ली जानी चाहिए। उनका कहना था कि तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार खेल परिसंपत्तियां ही लंबे समय तक खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित होंगी।
बैठक में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रन शंकरण ने राजगीर में विकसित हो रही आधुनिक खेल सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर और नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार को राष्ट्रीय स्तर का खेल प्रशिक्षण केंद्र बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा आगामी खेल कैलेंडर भी बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसमें राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक की योजनाओं और आयोजन की रूपरेखा शामिल थी। मंत्री ने खेल गतिविधियों को नियमित और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर बल दिया।
बैठक के दौरान एकलव्य केंद्रों को लेकर भी चर्चा हुई। खेल मंत्री ने राज्य में संचालित और बंद हो चुके सभी एकलव्य केंद्रों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बंद होने के कारणों का पूरा अभिलेखीकरण किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।
विभिन्न संस्थाओं और इकाइयों को आवंटित निधियों के उपयोग पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से खिलाड़ियों और जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए। सभी इकाइयों को पारदर्शी और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का निर्देश दिया गया।
बैठक में बिहार खेल विश्वविद्यालय का दौरा करने का भी निर्णय लिया गया। संभावना जताई गई कि अगले सप्ताह खेल मंत्री के नेतृत्व में विभागीय अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय जाकर वहां अध्ययनरत खिलाड़ियों और छात्रों की प्रगति का अवलोकन करेगा।
समीक्षा बैठक में जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 38 पदों पर होने वाली नियुक्तियों को राज्य की खेल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जरूरी माना गया। अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था बनने से खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में तेजी आएगी और खेल गतिविधियों को नई गति मिलेगी।


