
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के बीच पथ निर्माण विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता Arvind Kumar और उनकी पत्नी Renu Kumari को आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल भेज दिया गया है। कभी करोड़ों के टेंडर में रिश्वत मांगने वाले इंजीनियर अब खुद कानून के शिकंजे में फंस गए हैं।
16 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे
मामला साल 2019 का है, जब कटिहार में तैनात कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार पर 83 करोड़ रुपये के टेंडर के बदले 83 लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने पटना स्थित उनके फ्लैट पर छापेमारी की और 18 नवंबर 2019 को उन्हें 16 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
बताया गया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी इंजीनियर ने सबूत मिटाने के लिए रुपयों में आग तक लगा दी थी, लेकिन निगरानी टीम ने जली हुई रकम भी बरामद कर ली थी।
रिश्वत केस के बाद खुली अकूत संपत्ति की परतें
गिरफ्तारी के 10 दिन बाद निगरानी ब्यूरो ने अरविंद कुमार और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का अलग मामला दर्ज किया। जांच में करोड़ों की संपत्ति और संदिग्ध निवेश की जानकारी सामने आने के बाद केस को और मजबूत किया गया।
इस मामले में निगरानी ने पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। बाद में विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ इश्तेहार जारी किया और गिरफ्तारी वारंट निकाला।
पहले पत्नी गिरफ्तार, फिर इंजीनियर ने किया सरेंडर
लगातार छापेमारी और दबाव के बीच 22 मई को रेणु कुमारी गिरफ्तार की गईं। वहीं अगले ही दिन 23 मई को अरविंद कुमार ने विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत के आदेश पर दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
भ्रष्ट अफसरों के लिए बड़ा संदेश
यह मामला उन सरकारी अधिकारियों के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है, जो रिश्वत और अवैध कमाई के जरिए संपत्ति जोड़ने में लगे हैं। निगरानी और आर्थिक अपराध इकाइयों की लगातार कार्रवाई से अब भ्रष्टाचार के मामलों में शिकंजा और कसता दिख रहा है।


