
निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर 18 जून को चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। इनमें से एक सीट पर उपचुनाव होना है। संख्या बल के हिसाब से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 10 में से 9 सीटें मिलना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विपक्ष के खाते में एक सीट जा सकती है। लेकिन अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस एक सीट को लेकर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
अख्तरुल ईमान ने दावा किया है कि राज्यसभा चुनाव में समर्थन के बदले तेजस्वी यादव ने विधान परिषद चुनाव में सहयोग का आश्वासन दिया था। अब AIMIM उसी वादे को निभाने की मांग कर रही है।
विधानसभा की मौजूदा संख्या देखें तो NDA के पास 201 विधायक हैं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत पूरे विपक्ष की संख्या 41 है। एक सीट जीतने के लिए कम से कम 25 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है। ऐसे में विपक्ष के लिए एक सीट निकालना आसान दिखता है, लेकिन AIMIM की मांग ने समीकरण को पेचीदा बना दिया है।
अख्तरुल ईमान ने कहा, “हमारी संख्या इतनी नहीं है कि हम अपने दम पर उम्मीदवार जिता सकें, लेकिन राज्यसभा चुनाव में हमने राजद का समर्थन किया था। उस समय तेजस्वी यादव ने विधान परिषद चुनाव में सहयोग का भरोसा दिया था।”
उन्होंने संकेत दिया कि अगर चुनाव की स्थिति बनती है तो AIMIM राजद से अपने उम्मीदवार के समर्थन की मांग करेगी। हालांकि यह पूछे जाने पर कि अगर सहयोग नहीं मिला तो क्या होगा, उन्होंने कहा कि समय आने पर फैसला लिया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि यदि NDA सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है। पिछले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद के कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थित रहने के कारण विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी “खेला” होने की चर्चा जोरों पर है।
वहीं कांग्रेस ने अभी तक अपने रुख का खुलासा नहीं किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आलाकमान जो फैसला करेगा, उसी के अनुसार कदम उठाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस और राजद के रिश्तों में आई दूरी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
उधर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 4 और जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 3 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को भी एक-एक सीट मिलने की चर्चा है। वहीं जीतन राम मांझी भी अपनी पार्टी के लिए दावेदारी जता चुके हैं।
सियासी चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि निशांत कुमार और दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना लगभग तय माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष एकजुट रहता है या फिर पिछली बार की तरह अंदरूनी खींचतान चुनावी गणित बिगाड़ देती है। 18 जून का चुनाव बिहार की राजनीति में नए समीकरण भी तय कर सकता है।


