शिवहर में प्रशांत किशोर का बड़ा हमला: हरे गमछे की राजनीति पर उठाए सवाल, बांकीपुर सीट पर भाजपा को दी सीधी चुनौती

शिवहर, 26 मई 2026। बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने मंगलवार को शिवहर में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान राज्य सरकार, भाजपा और पारंपरिक राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री के हालिया “हरे गमछे” वाले बयान को लेकर कहा कि बिहार की राजनीति को रंगों और प्रतीकों से ऊपर उठाने की जरूरत है। राज्य की जनता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग गमछे और रंग की राजनीति में उलझे हुए हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोग आज भी गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से परेशान हैं। लाखों नौजवान हर साल राज्य छोड़कर दूसरे प्रदेशों में काम की तलाश में जाते हैं। ऐसे समय में नेताओं को इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि बिहार को आत्मनिर्भर कैसे बनाया जाए, न कि समाज को धार्मिक और राजनीतिक प्रतीकों के आधार पर बांटने की कोशिश करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि “हरा हो या भगवा, जब राजनीति सिर्फ रंगों के इर्द-गिर्द घूमने लगे तो उसका नुकसान समाज को उठाना पड़ता है। जनता के असली मुद्दे पीछे चले जाते हैं और समाज में तनाव तथा अराजकता का माहौल बनता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कई राजनीतिक दल जानबूझकर भावनात्मक और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा देकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीति पिछले कई दशकों से जाति, धर्म और प्रतीकों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इसी वजह से राज्य विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ता गया। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज अभियान का उद्देश्य बिहार की राजनीति को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास जैसे वास्तविक मुद्दों की तरफ मोड़ना है।

इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। भ्रष्टाचार आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है और बिना पैसे दिए सामान्य सरकारी काम भी पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इतने वर्षों के शासन के बावजूद बिहार देश के सबसे गरीब राज्यों में क्यों बना हुआ है।

प्रशांत किशोर ने भाजपा नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री के पिता एवं वरिष्ठ नेता को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि शकुनी चौधरी ने अपना अधिकांश राजनीतिक जीवन राष्ट्रीय जनता दल के साथ बिताया और उसी विचारधारा के साथ राजनीति की। उन्होंने दावा किया कि मुंगेर की एक राजनीतिक सभा में शकुनी चौधरी ने प्रधानमंत्री को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिया था।

प्रशांत किशोर ने कहा कि “आज जो लोग खुद को सबसे बड़े राष्ट्रवादी और भाजपा समर्थक बताने की कोशिश कर रहे हैं, उनके राजनीतिक अतीत को भी जनता को जानना चाहिए। राजनीति में विचारधारा और बयान समय-समय पर बदलते रहे हैं। जनता सब देख रही है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत हमला करना नहीं, बल्कि राजनीति में दोहरे मानदंडों को सामने लाना है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर दिए गए उनके बयान की रही। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि आगामी चुनाव में भाजपा को अगर कोई सीधी चुनौती दे सकता है तो वह सिर्फ जन सुराज है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर सीट पर पिछले 40 से 45 वर्षों से लगभग एक ही राजनीतिक परिवार का प्रभाव रहा है और पारंपरिक विपक्षी दल भाजपा को वहां चुनौती देने में लगातार विफल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस जैसी पार्टियां कई बार चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन भाजपा को वास्तविक चुनौती नहीं दे पाईं। अब जन सुराज उस राजनीतिक समीकरण को बदलने की तैयारी में है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार बांकीपुर में मजबूती से चुनाव लड़ेगी और भाजपा के गढ़ में घुसकर मुकाबला करेगी।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज का फोकस सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि राजनीति की संस्कृति बदलना है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग लंबे समय से एक ही तरह की राजनीति देखकर थक चुके हैं। जनता अब ऐसे विकल्प की तलाश में है जो शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पारदर्शिता की बात करे।

उन्होंने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार का सबसे बड़ा संकट पलायन है। राज्य के लाखों युवा पढ़ाई और नौकरी के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इतने वर्षों की सरकारों के बावजूद बिहार में उद्योग क्यों नहीं लगे, रोजगार के अवसर क्यों नहीं बने और किसानों की आय में सुधार क्यों नहीं हुआ।

प्रशांत किशोर ने दावा किया कि जन सुराज अभियान को गांव-गांव में समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लोग अब जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और बेहतर शासन की राजनीति चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जन सुराज बिहार की राजनीति में एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा।

शिवहर में आयोजित इस मीडिया ब्रीफिंग के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर बांकीपुर सीट को लेकर दिए गए बयान ने भाजपा और विपक्षी दलों दोनों का ध्यान खींचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर लगातार खुद को पारंपरिक राजनीति के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर उनकी रणनीति अब अधिक आक्रामक दिखाई दे रही है।

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि जन सुराज की यह राजनीतिक मुहिम बिहार की चुनावी राजनीति में कितना असर डाल पाती है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर के हालिया बयान ने बिहार की राजनीतिक बहस को एक बार फिर गर्म कर दिया है।

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