
पटना/भागलपुर, बिहार। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में लगातार सामने आ रही शैक्षणिक अनियमितताओं, परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्र संगठनों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। छात्र राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री से मुलाकात कर विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताई और समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
राजधानी पटना में हुई इस मुलाकात के दौरान छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय की व्यवस्था को “छात्र विरोधी” बताते हुए आरोप लगाया कि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की गिरफ्त में चली गई है। छात्रों ने कहा कि हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस संकट को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे छात्र जिलाध्यक्ष सत्यम मिश्रा ने मंत्री के सामने विश्वविद्यालय की कई गंभीर समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणामों में लगातार भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। बड़ी संख्या में छात्रों को बिना किसी स्पष्ट कारण के अनुपस्थित या अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया जा रहा है, जिससे छात्रों का मानसिक और शैक्षणिक नुकसान हो रहा है। कई छात्रों को महीनों तक अपने अंकपत्र और प्रमाणपत्र नहीं मिल रहे, जिसके कारण उन्हें नौकरी, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर संवेदनशील नहीं है। छात्र बार-बार विश्वविद्यालय कार्यालयों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
छात्र संगठन के वरीय प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतीक कुशवाहा ने भी विश्वविद्यालय की गिरती शैक्षणिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कई कॉलेजों में नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा है। पढ़ाई का माहौल लगभग समाप्त हो चुका है और छात्रों को मूलभूत शैक्षणिक सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान स्थिति इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र लगातार विलंबित चल रहे हैं, जिससे छात्रों का पूरा करियर प्रभावित हो रहा है। समय पर परीक्षा नहीं हो रही, परिणाम देरी से जारी किए जा रहे हैं और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता की भारी कमी दिखाई दे रही है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्तर इतना बढ़ चुका है कि सामान्य छात्र खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
मारवाड़ी कॉलेज के अध्यक्ष एवं छात्र नेता हृषिकेश प्रकाश ने कहा कि विश्वविद्यालय की छवि लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी, प्रशासनिक निष्क्रियता और छात्रहित की अनदेखी ने पूरे शैक्षणिक माहौल को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।
ज्ञापन में छात्रों ने कई प्रमुख मांगें भी रखीं। छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए तो कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
इसके अलावा परीक्षा परिणामों में हुई गड़बड़ियों को तत्काल सुधारने, गलत तरीके से अनुपस्थित या फेल घोषित किए गए छात्रों का परिणाम संशोधित करने और लंबित अंकपत्र, प्रमाणपत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
छात्रों ने विश्वविद्यालय के पीजी अंबेडकर विचार विभाग की जर्जर स्थिति को भी गंभीर मुद्दा बताया। ज्ञापन में कहा गया कि विभाग की हालत काफी खराब हो चुकी है और वहां अध्ययनरत छात्रों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। संगठन ने विभाग की तत्काल मरम्मत या नए भवन निर्माण की मांग की।
खेलकूद से जुड़े छात्रों की समस्याओं को भी प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के सामने रखा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर चयनित खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में समय पर नहीं भेजा जाता, जिससे प्रतिभाशाली छात्र अवसरों से वंचित रह जाते हैं। साथ ही खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। छात्र नेताओं का कहना था कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
छात्र संघ चुनाव का मुद्दा भी इस मुलाकात में जोर-शोर से उठाया गया। संगठन ने कहा कि वर्षों से छात्र संघ चुनाव बंद पड़े हैं, जिससे छात्रों को अपना लोकतांत्रिक प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिल रहा। छात्र नेताओं का मानना है कि छात्र संघ चुनाव बहाल होने से छात्रों की समस्याएं मजबूती से प्रशासन तक पहुंच सकेंगी और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल मजबूत होगा।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संगठन के निजी हित के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
मुलाकात के दौरान मंत्री दीपक प्रकाश ने छात्र प्रतिनिधियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और समस्याओं के समाधान के लिए उचित पहल करने का आश्वासन दिया। हालांकि छात्र नेताओं ने कहा कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
इस अवसर पर छात्र संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतीक कुशवाहा, छात्र जिलाध्यक्ष सत्यम मिश्रा, विश्वविद्यालय कार्यकारी अध्यक्ष गिरीश झा, छात्र नेता हृषिकेश प्रकाश, रमन राठौर, शुभम कुमार, प्रिंस कुमार समेत कई सदस्य शामिल थे।
भागलपुर विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल छात्रों की इस पहल ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।


