भागलपुर में महाब्लैकआउट से मची त्राहि-त्राहि: 132 केवी टावर धराशायी, 30 से अधिक पोल टूटे, बूंद-बूंद पानी को तरसे दर्जनों मोहल्ले

भागलपुर, 27 मई 2026। सोमवार की आधी रात को आए प्रलयंकारी चक्रवाती आंधी-तूफान के प्रहार से स्मार्ट सिटी भागलपुर का संपूर्ण विद्युत और जलापूर्ति ढांचा ताश के पत्तों की तरह मलबे में तब्दील हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद पूरे शहरी प्रक्षेत्र के भीतर एक अभूतपूर्व महाब्लैकआउट (Grid Collapse) की अवस्थिति लाइव मोड पर संधारित देखी जा रही है। मंगलवार की देर रात तक शहर के दो दर्जन से अधिक रसूखदार और घनी आबादी वाले मोहल्ले पूरी कड़ाई के साथ घने अंधकार के चक्रव्यूह में ब्लॉक रहे।

​तूफान का प्रवेग इतना लाउड था कि इसने सुल्तानगंज से गोराडीह ग्रिड के बीच संचरण करने वाले 132 केवी (KV) के एक विशालकाय ट्रांसमिशन टावर को जड़ से उखाड़कर धराशायी कर दिया। इसके अतिरिक्त, शहर के भीतरी नेटवर्कों में 30 से अधिक स्थानों पर हाई-टेंशन बिजली के पोल या तो बीच से विच्छेदित हो गए या पूरी तरह जमींदोज हो गए। विद्युत सप्लायर चेन के शत-प्रतिशत ठप हो जाने का सीधा दंडात्मक असर नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है, जिसके कारण अंचल के भीतर बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच गया है।

6 प्रमुख 33 केवी लाइनें पूरी तरह ध्वस्त: सबौर-तिलकामांझी कॉरिडोर पर गिरे विशाल वृक्ष

​इस भीषण तकनीकी संकट के सांख्यिकीय और अभियांत्रिक लेआउट की स्क्रूटनी करने पर यह प्रामाणिक तथ्य पटल पर आता है कि भागलपुर शहरी अंचल को ऊर्जा हस्तगत कराने वाली रीढ़ यानी सबौर ग्रिड से आने वाली 33 केवी की सभी छह हाई-टेंशन लाइनें पूरी तरह से डैमेज संधारित पाई गई हैं। सोमवार की रात 11:00 बजे के बाद आए अंधड़ के कारण सबौर से तिलकामांझी के बीच अवस्थित कॉरिडोर पर कम से कम 10 चिन्हित हॉट-स्पॉट्स पर या तो भारी-भरकम पेड़ सीधे तारों पर जा गिरे या उनकी प्रखर टहनियां टूटकर विधिक विन्यास को मलबे में तब्दील कर गईं।

​बिजली कंपनी के कनिष्ठ अभियंताओं के अनुसार, केवल 33 केवी क्षमता के मुख्य सीएस-1 (CS-1) फीडर के भीतरी प्रक्षेप में ही 8 विशाल लोहे के ब्रैकेट टूटकर कंक्रीट पर गिर गए थे। बरारी रोड, मायागंज अस्पताल कॉरिडोर, सैंडिस कंपाउंड के बाहरी घेरे और तिलकामांझी सरकारी बस डिपो के मुहाने पर बिछे तमाम एलटी (LT) और 11 केवी के तार मकड़जाल की तरह सड़कों पर बिखरे परिलक्षित हुए। इसके समानांतर, तिलकामांझी-जवारीपुर मुख्य मार्ग पर भी हाई-टेंशन तार टूटकर गिरने के कारण मुसाफिरों का भौतिक संचरण कतिपय घंटों तक पूरी कड़ाई से ब्लॉक रहा।

​सुल्तानगंज-गोराडीह के बीच 132 केवी टावर के जमींदोज होने के बाद उत्पन्न हुई महाविसंगति को क्रैक करने के वास्ते ट्रांसमिशन विंग के अभियंताओं ने त्वरित रिस्पॉन्स ग्रिड सक्रिय किया। कप्तानों ने कूटनीतिक डाइवर्जन अपनाते हुए बांका पावर ग्रिड के वैकल्पिक स्रोत से गोराडीह ग्रिड को चार्ज कर आंशिक प्रक्षेपों की बिजली आपूर्ति को री-स्टोर करने का विधिक प्रयास लाइव किया।

इन दो दर्जन से अधिक मोहल्लों में मंगलवार रात 11 बजे तक पसरा रहा स्याह अंधेरा

​बिजली विभाग के अथक रेस्क्यू प्रक्रमों के बावजूद, मंगलवार की देर रात 11:00 बजे तक शहर का एक बहुत बड़ा रिहायशी और व्यावसायिक क्लस्टर पूरी तरह से अंधकार के मलबे के नीचे दबा संधारित पाया गया। जिन प्रमुख मोहल्लों के भीतर कनिष्ठ व वरिष्ठ नागरिकों को लगातार दूसरी रात बिना पंखे, लाइट और रेफ्रिजरेटर के भीषण उमस वाले हीटिंग चैंबर के भीतर व्यतीत करनी पड़ी, उनकी प्रामाणिक सूची इस प्रकार विलेखबद्ध है:

  • मध्य व पूर्वी अंचल: लालकोठी, जवारीपुर, कमलनगर कॉलोनी, मानिकपुर, नीलकंठ नगर, सबौर रोड और सच्चिदानंद नगर।
  • दक्षिणी व पश्चिमी प्रक्षेप: हुसैनाबाद, शिवपुरी, शांति कॉलोनी, महंत स्थान रोड, काजवलीचक, गनीचक और मौलानाचक।
  • घनी आबादी वाले हॉट-स्पॉट्स: हुसैनपुर, मुजाहिदपुर पश्चिमी टोला, मिरजानहाट, हबीबपुर, बरईचक चौक, उर्दू बाजार और बाल्टी कारखाना प्रक्षेत्र।

​इन मोहल्लों के भीतरी केबिनों में मोबाइल सिग्नलों को लाइव रखने वाले इनवर्टर और पावर बैंक भी मंगलवार की दोपहर तक पूरी तरह डिस्चार्ज होकर म्यूट मोड पर जा चुके थे, जिससे नागरिकों का डिजिटल संवाद भी आंशिक रूप से ब्लॉक संधारित देखा गया।

जलापूर्ति ढांचा पूरी तरह मलबे में: किराये के जेनरेटर का सहारा, बर्तनों की कतारें लाइव

​विद्युत आपूर्ति के इस दीर्घकालिक शटडाउन का सबसे क्रिटिकल और अमानवीय प्रभाव भागलपुर नगर निगम के वाटर सप्लाई सिस्टम पर दर्ज किया गया। शहर के विभिन्न वार्डों में स्थापित नगर निगम की तमाम डीप बोरिंग प्रणालियाँ और आधुनिक प्याऊ केंद्र शत-प्रतिशत रूप से केवल और केवल बिजली की तरलता पर ही निर्भर संधारित हैं। बिजली गुल होने के कारण पानी के स्टोरेज टैंक पूरी तरह से खाली विन्यास में चले गए। इसके प्रतिफल के रूप में, परबत्ती के प्रसिद्ध गोस्वामी टोला सहित दर्जनों अंचलों के भीतरी सड़कों पर सुबह होते ही महिलाओं, बच्चों और वृद्ध मुसाफिरों का भारी हुजूम खाली डिब्बों, बाल्टियों और बर्तनों को कतार में लगाकर पानी के टैंकरों का इंतजार करता लाइव मोड पर देखा गया।

नगर निगम जलकल शाखा प्रभारी वशिष्ठ नारायण चौधरी का आधिकारिक विलेख बयान:

​”नगर निगम के नियंत्रण में आने वाले सभी जल शोधन संयंत्र और डीप बोरिंग पंप बिजली के बिना पूरी तरह से निष्क्रिय (म्यूट) हो चुके थे। जलापूर्ति व्यवस्था का यह विन्यास शत-प्रतिशत बिजली ग्रिड पर ही आश्रित है। दोपहर तीन बजे के बाद जिन कतिपय अंचलों—जैसे बरारी और नाथनगर के भीतरी प्रक्षेपों में बिजली की आंशिक वापसी मुकम्मल हो सकी, वहां हमने निर्धारित समयावधि के अनुसार तत्काल पंपों को लाइव कर जलापूर्ति शुरू कराई है। शेष प्रभावित मोहल्लों में टैंकरों के माध्यम से रसद जलापूर्ति डाइवर्ट की जा रही है।”

 

​इस भीषण जल संकट चक्रव्यूह से मुक्ति पाने के वास्ते शहर के कतिपय सक्षम नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने आनन-फानन में बाजार से भारी बजटीय किराये पर निजी जेनरेटर (Diesel Generators) मंगवाकर अपने आवासीय परिसरों की छतों पर लगी पानी की टंकियों की भराई मुकम्मल की, जिससे जेनरेटर ऑपरेटरों के सिंडिकेट की तरलता अचानक लाउड मोड पर दर्ज की गई।

आपूर्ति बहाल हुई तो हर 10 मिनट में ट्रिपिंग का तांडव: छज्जे और रेलिंग के विवाद से 3 घंटे की ढिलाई

​मंगलवार की ढलती शाम को जब बिजली कंपनी के अभियंताओं ने कड़ा भौतिक श्रम संधारित कर कतिपय पावर सबस्टेशनों को ग्रिड से चार्ज करने में सफलता हासिल की, तो धरातलीय एलटी (LT) और 11 केवी के स्थानीय फीडरों के भीतर कतिपय नए यांत्रिक फॉल्ट लाइव हो गए। मायागंज पावर सबस्टेशन की मुख्य 33 केवी लाइन को शाम के ठीक 6:00 बजे विधिक रूप से बहाल किया गया था। इसके तुरंत बाद जैसे ही 11 केवी के भीतरी फीडरों में करंट का संचरण डाइवर्ट किया गया, महज 10 मिनट के भीतर ही तारों में तीव्र घर्षण और शॉर्ट-सर्किट के फॉल्ट दर्ज होने लगे। सुरक्षा मानकों के आलोक में कप्तानों ने तुरंत मायागंज फीडर को दोबारा म्यूट (बंद) कर रात में ही दुबारा ‘लाइन पेट्रोलिंग’ का प्रक्रम सक्रिय कराया।

​यही स्थिति भीखनपुर पावर सबस्टेशन के भीतरी विन्यास में भी परिलक्षित हुई। शाम करीब 6:30 बजे सीएस-1 फीडर से जैसे ही लोड को लाइव किया गया, कतिपय तकनीकी विसंगतियों के कारण हर 10 मिनट के टाइम-स्टैम्प पर मुख्य सर्किट ब्रेकर ‘ट्रिप’ (Trip) करता रहा, जिससे उपभोक्ताओं के घरों में बिजली का आना-जाना एक डरावने नाटक के विन्यास में संधारित देखा गया। अलीगंज पावर सबस्टेशन का प्रसिद्ध बीजीपी-1 (BGP-1) फीडर भी रात के 8:00 बजे तक चालू नहीं हो सका था।

​Restoration ऑपरेशंस के दौरान बिजली विभाग के तकनीकी दस्तों को एक अत्यंत विवादास्पद और विधिक अड़चन का सामना करना पड़ा, जिसने मरम्मत की समय सारणी को कतिपय घंटों के लिए बढ़ा दिया। ग्रिड के मुहाने के समीप एक स्थानीय भवन स्वामी ने नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए अपने मकान का पक्का छज्जा और लोहे की रेलिंग सीधे हाई-टेंशन 33 केवी लाइन के बिल्कुल नजदीक विनिर्मित कर लॉक कर रखी थी।

​तूफान के कारण जब वहां से नए सिरे से कड़क तारों को खींचने (Stringing) का प्रक्रम लाइव किया जाने लगा, तो तकनीशियनों को तीव्र विद्युत आघात (करंट लगने) का प्रखर जोखिम महसूस हुआ। इस सुरक्षा चूक को ब्लॉक करने के वास्ते अभियंताओं को पूरे रूट लेआउट को ही कूटनीतिक रूप से दूसरी दिशा में डाइवर्ट व शिफ्ट करना पड़ा। इस आकस्मिक सिविल कार्य के कारण रेस्टोरेशन की प्रक्रिया में तीन घंटे का अतिरिक्त विलंब दर्ज किया गया।

शहरी विद्युत कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार का कड़ा स्टैंड

​सोमवार की आधी रात को जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी द्वारा निर्गत किए गए हाई-अलर्ट विनिर्देश के आलोक में बिजली विभाग के आला कप्तानों की एसआईटी (SIT) पूरी रात ग्राउंड जीरो के विभिन्न हॉट-स्पॉट्स पर फावड़ों, कटरों और इंसुलेटरों के साथ मुस्तैद संधारित रही। शहरी विद्युत कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने समूचे रेस्टोरेशन अभियान के विधिक और यांत्रिक मापदंडों की कप्तानी मॉनिटरिंग करते हुए विभाग का कड़ा और संतुलित स्टैंड पटल पर साझा किया है।

​शहरी विद्युत कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली और सर्वोपरि प्राथमिकता किसी भी विन्यास में 33 केवी के मुख्य रीढ़ नेटवर्क को दुरुस्त कर शहर के तमाम पावर सबस्टेशनों (PSS) को ससमय चार्ज करने की थी। इस बड़े मिशन को मुकम्मल करने के वास्ते विभागीय इंजीनियरों, लाइनमैनों और कनिष्ठ श्रमिकों के सिंडिकेट ने बिना रुके, बिना थके पूरे दिन भीषण उमस के बीच युद्धस्तर पर भौतिक श्रम संधारित किया। इसी प्रखर कसरत के प्रतिफल के रूप में मंगलवार की शाम 7:30 बजे तक शहर के लगभग सभी प्रमुख सबस्टेशनों की मुख्य प्रणालियों को तकनीकी रूप से बहाल कर लॉक कर दिया गया है, और अब कनिष्ठ त्रुटियों को दूर कर व्यक्तिगत मोहल्लों को लाइव मोड पर लाया जा रहा है।

स्मार्ट सिटी का बड़ा ढांचागत रिफॉर्म: अब पूरी तरह अंडरग्राउंड होगा बिजली और सीवरेज नेटवर्क

​इस महाब्लैकआउट और प्राकृतिक प्रलय के म्यूट होने के उपरांत, भविष्य में ऐसी गंभीर अवसंरचनात्मक विफलताओं को पूरी कड़ाई से ब्लॉक करने के उद्देश्य से भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कमान केंद्र से एक अत्यंत दूरगामी और ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय का विलेख जारी किया गया है। शहर के भीतर खुले आसमान के नीचे लटकते जर्जर बिजली के तारों के मकड़जाल, बार-बार पोल उखड़ने की सांख्यिकी और मानसून के सीजन में होने वाले भयंकर जलजमाव (Water Logging) की विसंगतियों का परमानेंट विधिक समाधान खोज लिया गया है।

​स्मार्ट सिटी परियोजना के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (PRO) पंकज कुमार ने इस रिफॉर्म लेआउट को सार्वजनिक करते हुए प्रामाणिक रूप से पुष्टि की कि भागलपुर शहर के सभी वार्डों के भीतरी प्रक्षेपों में संधारित होने वाले संपूर्ण विद्युत तारों के नेटवर्क और सीवरेज-ड्रेनेज (Sewerage-Drainage) सिस्टम को पूरी कड़ाई के साथ ‘अंडरग्राउंड’ (भूमिगत कॉरिडोर) विन्यास में स्थानांतरित किया जाएगा।

​स्मार्ट सिटी पीआरओ पंकज कुमार ने आगे विस्तार से बताया कि इस वृहद और आधुनिक अभियांत्रिक कायाकल्प को अमलीजामा पहनाने के वास्ते फंड की उपलब्धता की सांख्यिकी के आधार पर चरणबद्ध तरीके से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report – DPR) तैयार करने के विनिर्देश जारी कर दिए गए हैं। बिजली के तारों के भूमिगत हो जाने से आगामी समय सारणी के भीतर आने वाले किसी भी तीव्र आंधी-तूफान या चक्रवात के समय बिजली के पोल गिरने और तार टूटने जैसी नागरिक आपदाएं स्वतः ही म्यूट मोड पर चली जाएंगी।

​इसके साथ ही, भूमिगत सीवरेज नेटवर्क के एकीकृत हो जाने से अंचल की सड़कों पर गंदे पानी का रिसाव शत-प्रतिशत ब्लॉक हो जाएगा, जिससे स्मार्ट सिटी भागलपुर का विजुअल लेआउट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ और अभेद्य विनिर्मित हो सकेगा। फिलहाल, कनिष्ठ तकनीकी टीमें देर रात तक शहर के अंतिम फीडरों के फॉल्ट्स को क्रैक करने के वास्ते गश्ती मोड पर लाइव संधारित हैं।

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