पुनौरा धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक केंद्र बनाने की तैयारी तेज, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

बिहार सरकार माता सीता की पावन जन्मस्थली पुनौरा धाम को देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सीतामढ़ी स्थित इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की तर्ज पर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर सोमवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की, जिसमें परियोजना से जुड़े विभिन्न निर्माण कार्यों, समय-सीमा और भविष्य की योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बिहार सरकार पुनौरा धाम को एक भव्य और विश्वस्तरीय धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। सरकार का उद्देश्य यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि यह स्थल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सके।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि पुनौरा धाम का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि परियोजना के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह सिर्फ एक पर्यटन परियोजना नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी कार्य तय समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।

बैठक में पुनौरा धाम परिसर के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें मंदिर परिसर का विस्तार, सड़क नेटवर्क, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं, यात्री निवास, डिजिटल गैलरी, पार्क और अन्य जनसुविधाओं के निर्माण को लेकर योजनाओं की समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने निर्माण एजेंसी और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को सख्त निर्देश दिया कि 10 मई 2026 से 10 अगस्त 2026 के बीच तय किए गए तीन महीने के लक्ष्यों को हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में देरी से परियोजना की गति प्रभावित होगी और यह स्वीकार नहीं किया जाएगा।

परियोजना के तहत पुनौरा धाम परिसर के भीतर सड़क नेटवर्क तैयार करने का काम भी तेजी से चलाया जा रहा है। समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि आंतरिक सड़क नेटवर्क और आम जनता के लिए वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। उन्होंने लक्ष्य तय किया कि 10 जुलाई 2026 तक यह काम पूरी तरह समाप्त हो जाना चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क बनने से श्रद्धालुओं को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में आधुनिक सड़क व्यवस्था से यातायात प्रबंधन आसान होगा।

बैठक में जमीन हस्तांतरण और अतिक्रमण हटाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने सीतामढ़ी जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि गायत्री मंदिर ट्रस्ट को वैकल्पिक भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इसके साथ ही सीता रसोई, पीठाधीश्वर निवास और गायत्री मंदिर जैसी शेष तीन इमारतों को खाली कराने की कार्रवाई भी शीघ्र पूरी करने को कहा गया।

सरकार का मानना है कि जब तक निर्माण क्षेत्र पूरी तरह खाली नहीं होगा तब तक परियोजना की रफ्तार प्रभावित होती रहेगी। इसलिए जिला प्रशासन को समन्वय के साथ सभी लंबित मामलों को जल्द निपटाने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य सचिव ने परियोजना से जुड़ी तकनीकी तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन और स्ट्रक्चर से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण ड्राइंग्स का सत्यापन 22 जुलाई 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि किसी भी तकनीकी त्रुटि से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाए।

श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि पुनौरा धाम में आने वाले लोगों को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए यात्री निवास, डिजिटल गैलरी, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का डिजाइन तैयार किया जा रहा है।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य सिर्फ मंदिर परिसर का विकास करना नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी मिल सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुनौरा धाम को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाता है तो यह बिहार के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर बड़ी पहचान बना सकता है। अयोध्या, वाराणसी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की तरह यहां भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच सकते हैं।

स्थानीय लोगों में भी इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि माता सीता की जन्मस्थली होने के बावजूद पुनौरा धाम को अब तक वह पहचान नहीं मिल पाई थी जिसकी वह हकदार है। सरकार की इस पहल से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक के अंत में पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर स्वयं निर्माण स्थल का दौरा करें और कार्यों की भौतिक प्रगति की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि परियोजना की निगरानी में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी हो जाती है तो पुनौरा धाम आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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