गया में पूर्व सांसद के मकान से 50 लाख की नकली दवाएं बरामद, महिला समेत दो गिरफ्तार, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच

बिहार के गया जिले में नकली और प्रतिबंधित दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। सोमवार सुबह ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के पीपरपाती इलाके में स्थित पूर्व सांसद रंजीत सिंह के मकान में छापेमारी कर भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं बरामद कीं। अधिकारियों के अनुसार बरामद दवाओं की कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई के दौरान एक महिला समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।

सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों को शुरुआत में यह समझ नहीं आया कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में पुलिस और ड्रग विभाग की टीम क्यों पहुंची है। बाद में जानकारी सामने आई कि गुप्त सूचना के आधार पर यह छापेमारी की गई थी। पुलिस को इनपुट मिला था कि पूर्व सांसद के मकान में किराए पर रह रहे कुछ लोग अवैध दवा कारोबार से जुड़े हुए हैं और यहां बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित एवं नकली दवाओं का भंडारण किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही ड्रग विभाग और जिला पुलिस ने संयुक्त रणनीति तैयार की और सोमवार तड़के छापेमारी शुरू कर दी। टीम जब मकान के भीतर पहुंची तो कई कमरों में दवाओं के कार्टन, पैकिंग सामग्री और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण पाए गए। अधिकारियों ने जब सामग्री की जांच शुरू की तो पता चला कि वहां रखी कई दवाएं संदिग्ध और प्रतिबंधित श्रेणी की हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि मकान के निचले हिस्से में सरकारी विभागों से जुड़ा कार्यालय संचालित हो रहा था, जबकि ऊपरी मंजिल पर बंद कमरों में यह पूरा अवैध कारोबार चलाया जा रहा था। पुलिस को संदेह है कि लंबे समय से यहां दवाओं का स्टॉक जमा किया जा रहा था और फिर विभिन्न इलाकों में सप्लाई की जाती थी।

इस मामले में विकास कुमार नामक व्यक्ति और एक महिला को हिरासत में लिया गया है। दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह कारोबार केवल गया तक सीमित था या इसके तार बिहार और झारखंड समेत अन्य राज्यों तक फैले हुए हैं।

छापेमारी के दौरान बरामद दवाओं में कई ऐसी दवाएं शामिल बताई जा रही हैं जिनका उपयोग नशे के रूप में किया जाता है। इसके अलावा कुछ दवाओं की पैकेजिंग और लेबलिंग भी संदिग्ध पाई गई है। ड्रग विभाग की टीम अब सभी नमूनों को जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बरामद दवाएं नकली थीं या बिना अनुमति के संग्रहित की गई थीं।

सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार ने बताया कि टीम को पहले से सूचना मिल रही थी कि गया शहर में अवैध दवा कारोबार सक्रिय है। इसी आधार पर कार्रवाई की गई और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं। उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए सभी तथ्यों का खुलासा फिलहाल नहीं किया जा सकता। हालांकि पूछताछ में यह जरूर सामने आया है कि दवाएं झारखंड के देवघर से लाकर गया में स्टोर की जाती थीं।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह सिर्फ स्टोरेज पॉइंट नहीं बल्कि एक बड़े सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद दवाओं की सप्लाई किन मेडिकल दुकानों, एजेंटों या अवैध गिरोहों तक की जाती थी। इस पूरे मामले में आर्थिक लेन-देन और बैंक खातों की भी जांच की जा सकती है।

पूर्व सांसद रंजीत सिंह का नाम सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्व सांसद का निधन कई वर्ष पहले हो चुका है और मकान किराए पर दिया गया था। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मकान मालिक पक्ष को इस अवैध कारोबार की जानकारी थी या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यहां नकली और प्रतिबंधित दवाओं का इतना बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा है। छापेमारी के बाद आसपास के लोग भी हैरान हैं और प्रशासन से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई में कई थानों की पुलिस और ड्रग विभाग के अधिकारी शामिल थे। पूरे परिसर की घंटों तक तलाशी ली गई। जांच के दौरान कुछ दस्तावेज, मोबाइल फोन और पैकिंग से जुड़े उपकरण भी जब्त किए गए हैं। अब इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली और प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार समाज के लिए बेहद खतरनाक होता है। ऐसी दवाएं लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करती हैं और कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं। यही वजह है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई और लगातार निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है।

फिलहाल पुलिस और ड्रग विभाग की टीम इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ और जब्त सामग्री की जांच के बाद कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अवैध दवा कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।

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