
गया, 24 मई 2026। बिहार के राजनैतिक प्रक्षेप और वीवीआईपी सुरक्षा मानकों को चुनौती देने वाली एक अत्यंत गंभीर और संदेहास्पद वारदात के बाद प्रशासनिक अमला पूरी कड़ाई के साथ अलर्ट मोड पर लाइव हो गया है। गया जिले के खिजरसराय प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सिसवर स्थित संत थॉमस इंग्लिश स्कूल के परिसर में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को निशाना बनाकर किए गए पथराव के मामले में पुलिस महकमे ने प्रखर दंडात्मक और सुरक्षात्मक प्रक्रम संचालित करना प्रारंभ कर दिया है।
इस घटनाक्रम के विलेख पटल पर आते ही राज्य पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला समाहरणालय तक सांगठनिक सक्रियता लाउड मोड पर दर्ज की जा रही है। प्रारंभिक जांच संचिकाओं में यह सनसनीखेज प्रामाणिक तथ्य सामने आया है कि केंद्रीय मंत्री पर हुआ यह हमला तात्कालिक या अचानक उत्पन्न हुई कोई प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुगठित और गहरी आपराधिक साजिश पहले से ही रची जा चुकी थी। इस सुरक्षा चूक के बाद गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के सीधे विनिर्देश पर सुरक्षा घेरे को अभेद्य विन्यास में अपग्रेड कर दिया गया है।
दारोगा के फर्दबयान पर नामजद प्राथमिकी दर्ज: साजिश के विन्यासों की हो रही स्क्रूटनी
खिजरसराय थाना पुलिस ने मामले की विधिक कड़ियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक स्थानीय उप-निरीक्षक (दारोगा) के आधिकारिक फर्दबयान को मुख्य आधार विनिर्मित करते हुए तीन स्थानीय युवकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) पंजीकृत कर ली है। इस केसनोट डायरी के विन्यासों के अनुसार, घटना स्थल पर मुस्तैद सुरक्षा बलों ने त्वरित रिस्पॉन्स दिखाते हुए दो मुख्य नामजद आरोपियों को मौके पर ही भौतिक रूप से दबोच लिया था, जिन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में रखकर गुप्त पूछताछ सेल में स्थानांतरित किया गया है। वहीं, इस पूरे सिंडिकेट का तीसरा मुख्य सूत्रधार और नामजद आरोपी पुलिसिया दबिश की भनक लगते ही प्रक्षेत्र से बाहर फरार संधारित है, जिसकी वास्तविक अवस्थिति को लोकेट करने के लिए पुलिस और तकनीकी विंग लगातार छापेमारी प्रक्रमों को सक्रिय किए हुए है।
इस आपराधिक विसंगति पर आधिकारिक प्रकाश डालते हुए नीमचक बथानी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (DSP) सुरेंद्र सिंह ने शनिवार की दोपहर मीडिया काउंटरों पर महत्वपूर्ण विलेख साझा किए। डीएसपी सुरेंद्र सिंह ने साफ शब्दों में रेखांकित किया कि अब तक की सघन जांच, चश्मदीदों के बयानों और तकनीकी विश्लेषणों से यह पूरी तरह प्रमाणित हो चुका है कि समाज विरोधी तत्वों ने केंद्रीय मंत्री के सिसवर आगमन की सूचना को ट्रैक करते हुए इस हमले की ब्लूप्रिंट पटकथा बहुत पहले ही लॉक कर दी थी।
आरोपियों का मूल उद्देश्य शैक्षणिक संस्थान के कार्यक्रम के भीतर अव्यवस्था फैलाना और मंच पर आसीन विशिष्ट अतिथियों के शारीरिक स्वास्थ्य को आंशिक या गंभीर ठेस पहुंचाना संधारित था। पुलिस की जासूसी विंग अब पकड़े गए दोनों आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और उनके हालिया डिजिटल संवादों की गहन स्क्रूटनी कर रही है ताकि इस साजिश के पीछे सक्रिय कतिपय अन्य कनिष्ठ या वरिष्ठ लाइनर्स के चेहरों को भी केस डायरी का हिस्सा बनाया जा सके।
संत थॉमस इंग्लिश स्कूल में भाषण के दौरान हुआ था पथराव: बाल-बाल बचे केंद्रीय मंत्री
इस सनसनीखेज वारदात की धरातलीय कड़ियों को आपस में जोड़ने पर ज्ञात होता है कि शुक्रवार की देर शाम जीतन राम मांझी सिसवर गांव के निकट अवस्थित संत थॉमस इंग्लिश स्कूल में आयोजित एक भव्य नागरिक अभिनंदन और सांस्कृतिक समारोह में मुख्य अतिथि के विन्यास में सम्मिलित होने पहुंचे थे। जब कार्यक्रम अपने चरम पर संधारित था और केंद्रीय मंत्री मंच के मुहाने पर खड़े होकर जनसभा को संबोधित कर रहे थे, ठीक उसी समयांतराल पर स्कूल परिसर की चहारदीवारी (बाउंड्रीवॉल) के बाहरी और अंधेरे वाले प्रक्षेप में मुस्तैद तीन युवकों ने अचानक मंच की दिशा में प्रखरता से बड़े-बड़े कंक्रीट और पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।
अचानक हुए इस पथराव के कारण पंडाल के भीतर उपस्थित मुसाफिरों और समर्थकों के बीच भारीअफरा-तफरी, चीख-पुकार और भगदड़ की अवस्थिति लाइव मोड पर सक्रिय हो गई। मंच के ठीक पीछे मुस्तैद केंद्रीय मंत्री के विशेष सुरक्षा गार्डों (बॉडीगार्ड्स) ने अदम्य कप्तानी साहस और तत्परता का प्रदर्शन करते हुए तुरंत जीतन राम मांझी को अपने अभेद्य शारीरिक सुरक्षा कवच के भीतर ले लिया और उन्हें सुरक्षित घेरे में डाइवर्ट किया, जिसके कारण वे इस हमले में पूरी तरह से बाल-बाल बच गए।
परंतु, अपराधियों द्वारा फेंका गया एक प्रखर पत्थर सीधे तौर पर सुरक्षा दस्ते के एक जवान के शरीर के संवेदनशील हिस्से पर जाकर लगा, जिससे वह आंशिक रूप से चोटिल और लहूलुहान हो गया। घटना स्थल पर तैनात स्थानीय पुलिस बल के जवानों ने बिना कोई लिपिकीय ढिलाई बरते, भागने का प्रयास कर रहे दो हमलावर युवकों को खदेड़कर ऑन-स्पॉट दबोच लिया, जबकि उनका तीसरा कनिष्ठ साथी अंधेरे का लाभ उठाकर खेतों के रास्ते भागने में सफल संधारित रहा।
एसएसपी सुशील कुमार का कड़ा विनिर्देश: पुलिस लाइन से अतिरिक्त सुरक्षा बल मुस्तैद
इस अति-संवेदनशील वीवीआईपी सुरक्षा चूक की इनपुट मिलते ही गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सुशील कुमार स्वयं एक्शन मोड में लाइव हो गए। एसएसपी सुशील कुमार के कड़े विनिर्देशों के आलोक में शनिवार की सुबह से ही पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के संपूर्ण आवासीय परिसर, उनके जिला प्रवास रूट और आगामी कार्यक्रमों के वेन्यूज पर सुरक्षा मानकों को म्यूट से सीधे लाउड मोड पर प्रविष्ट करा दिया गया है। पुलिस लाइन के मुख्य रिजर्व केंद्र से अत्याधुनिक हथियारों से लैस अतिरिक्त सुरक्षा बलों, दंगा नियंत्रण वाहनों और त्वरित कार्य बल (QRT) की कतिपय टुकड़ियों को केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा ग्रिड को अभेद्य बनाने के वास्ते ससमय प्रतिनियुक्त कर दिया गया है।
एसएसपी सुशील कुमार ने स्पष्ट किया है कि तीसरे फरार आरोपी के संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों के घरों और अंचल के कतिपय संदिग्ध ठिकानों पर जिला पुलिस और विशेष जासूसी दस्तों द्वारा रातभर ताबड़तोड़ छापेमारी प्रक्रम मुकम्मल किए गए हैं। पुलिस कप्तानों का दावा है कि फरार अभियुक्त के सभी विधिक और निकास मार्गों को पूरी कड़ाई के साथ ब्लॉक कर दिया गया है और उसे न्यूनतम समय-सीमा के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजना सुनिश्चित किया जाएगा। इस घटना के बाद से ही खिजरसराय और नीमचक बथानी अंचल के संवेदनशील हॉट-स्पॉट्स पर एहतियातन पुलिस की विशेष गश्ती गाड़ियां निरंतर सायरन मोड पर लाइव संधारित हैं।
राज्य पुलिस मुख्यालय सख्त: एसएसपी से तलब की गई विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट
जीतन राम मांझी जैसी शीर्ष राजनैतिक शख्सियत और केंद्रीय कैबिनेट के सदस्य पर बिहार की धरती पर इस प्रकार सुनियोजित हमले की पटकथा लाइव होने के बाद, राजधानी पटना स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय ने भी इस पूरे प्रकरण पर अत्यंत कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने गया के एसएसपी सुशील कुमार से इस पूरी घटना, सुरक्षा चूक के तकनीकी कारणों, घटना स्थल की भौगोलिक अवस्थिति और अब तक की विधिक कार्रवाइयों की एक विस्तृत, बिंदुवार और फॉरेंसिक साक्ष्यों से युक्त रिपोर्ट (Detailed Action Taken Report) चौबीसों घंटे के भीतर तलब कर ली है।
मुख्यालय के आला कप्तानों ने जिला पुलिस प्रशासन को स्पष्ट विनिर्देश साझा किया है कि इस वीवीआईपी सुरक्षा ग्रिड के भीतर यदि स्थानीय पुलिस अधिकारियों या खुफिया विंग की आंशिक लापरवाही या लिपिकीय ढिलाई भी प्रमाणित होती है, तो उनके विरूद्ध भी सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक संचिकाएं खोली जाएं। इसके अतिरिक्त, पुलिस इस बात की भी गहन स्क्रूटनी कर रही है कि हाल ही के दिनों में इस विशिष्ट राजनैतिक परिवार के अन्य सदस्यों के काफिलों पर हुए आंशिक हमलों और सोशल मीडिया के डिजिटल पटल पर मुख्य रूप से फ्लैश हो रही धमकियों के बीच कोई आंतरिक सांगठनिक संबंध या सिंडिकेट तो सक्रिय संधारित नहीं है। सभी बिंदुओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान को तीव्र कर दिया गया है ताकि केस डायरी के विन्यासों को अदालत के समक्ष पूरी तरह से अभेद्य बनाया जा सके।


