अररिया में परमान नदी पर बने ₹7.32 करोड़ के पुल का पाया धंसा, रेलिंग में आईं बड़ी दरारें, भारी वाहनों का परिचालन पूरी कड़ाई से ब्लॉक

अररिया, 22 मई 2026। बिहार के सीमावर्ती अररिया जिले के ग्रामीण अंचलों से बुनियादी ढांचे की तकनीकी विफलता और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। अररिया प्रखंड के झमटा-महिषाकोल प्रक्षेप को आपस में जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर अवस्थित एक बड़े पुल का पाया (पिलर) अचानक संदेहास्पद परिस्थितियों में धंस गया है।

​परमान नदी के प्रखर जल प्रवाह के बीच संधारित इस पुल के मुख्य स्तंभ के धंसने के कारण संपूर्ण सुपरस्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते पुल की कंक्रीट रेलिंग और संपर्क पथों के विन्यासों में लंबी-लंबी दरारें परिलक्षित होने लगी हैं। इस हादसे के लाइव मोड पर आते ही अंचल के हजारों ग्रामीणों, राहगीरों और आवश्यक रसद सप्लायर्स के बीच भारी सुरक्षात्मक चिंता, गहरा डर और प्रशासनिक हड़कंप की अवस्थिति निर्मित हो गई है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय अभियंताओं की तकनीकी टीमें तुरंत मुहाने पर मुस्तैद हुई हैं और पुल को पूर्ण ध्वस्तीकरण से बचाने के लिए आपातकालीन दंडात्मक और सुरक्षात्मक चक्रव्यूह सक्रिय कर दिया गया है।

महज चार साल पहले ₹7.32 करोड़ की भारी लागत से हुआ था निर्माण, कई जगह से कमजोर हुई संरचना

​इस गंभीर अवसंरचनात्मक विसंगति के ऐतिहासिक और लिपिकीय विलेखों को खंगाला जाए तो यह प्रामाणिक तथ्य सामने आता है कि इस पुल का निर्माण कार्य मचलते चार वर्ष पूर्व ही मुकम्मल किया गया था। स्थानीय ग्रामीण कार्य विभाग और निर्माण एजेंसी के समन्वय से इस पुल के विन्यास को धरातल पर उतारने के वास्ते कुल ₹7.32 करोड़ (सात करोड़ बत्तीस लाख रुपये) की एक भारी-भरकम सरकारी बजटीय राशि को विधिक रूप से खर्च किया गया था। इस पुल की महत्ता इस दृष्टिकोण से सर्वोपरि संधारित थी क्योंकि यह झमटा, महिषाकोल और अररिया प्रखंड के दर्जनों सुदूर गांवों को सीधे जिला मुख्यालय के मुख्य व्यावसायिक गलियारों से एकीकृत करता था।

​परंतु, बुधवार और गुरुवार के बीच परमान नदी के जलस्तर में हुए आंशिक उतार-चढ़ाव और नदी की तलहटी में जमा सिल्ट के विस्थापन के कारण पुल का एक मुख्य पाया अचानक अपनी निर्धारित ज्यामितीय अवस्थिति से नीचे की ओर धंस गया। पाया धंसने के कारण पुल के ऊपर संधारित स्लैब असंतुलित हो गया है, जिससे पुल की ऊपरी संरचना कई संवेदनशील जगहों पर अत्यधिक कमजोर दिखाई दे रही है। पुल के दोनों किनारों पर बनी कंक्रीट की मजबूत रेलिंगों के बीच से सीमेंट के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं और उनमें समानांतर गहरी दरारें साफ तौर पर देखी जा रही हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा लाइव हो सकता है।

अररिया में थम नहीं रहा है पुलों के धंसने का खूनी प्रक्रम: नवम्बर 2025 का कौआचार कांड भी ताजा

​अररिया जिले के भीतर सरकारी पुलों के अचानक धंसने और ढहने का यह कोई पहला या इकलौता मामला संधारित नहीं है, बल्कि प्रक्षेत्र के भीतर बुनियादी ढांचे के इस प्रकार मलबे में तब्दील होने का एक लंबा और चिंताजनक इतिहास रहा है। स्थानीय नागरिकों और जासूसी विंग के अभिलेखों के अनुसार, अभी मचलते कुछ महीने पूर्व ही यानी नवम्बर 2025 में फारबिसगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कौआचार प्रक्षेप में भी एक ऐसी ही भयावह घटना दर्ज की गई थी। वहां लगभग चार करोड़ रुपये की भारी लागत से विनिर्मित किए गए एक नए पुल का पाया उद्घाटन और नियमित प्रचालन के कुछ ही समय के भीतर अचानक धंस गया था, जिसका मामला अभी भी तकनीकी जांच समितियों और प्रशासनिक गलियारों की फाइलों के भीतर पूरी प्रखरता के साथ चर्चा में संधारित है।

​कौआचार की उस गंभीर विसंगति के अवसादों से जिला प्रशासन अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब अररिया प्रखंड के झमटा-महिषाकोल में ₹7.32 करोड़ के इस बड़े पुल के पाए का धंसना यह साफ तौर पर प्रदर्शित करता है कि निर्माण कार्यों के दौरान मिट्टी की लोड-बियरिंग क्षमता (सॉइल टेस्टिंग विन्यास) के आकलन और कनिष्ठ अभियंताओं की कप्तानी निगरानी में कहीं न कहीं गंभीर लिपिकीय और तकनीकी ढिलाई बरती गई है। इन अनवरत होती दुर्घटनाओं के कारण परमान और कोसी बेसिन के तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों नागरिकों के भीतर सरकारी निर्माण प्रणालियों के प्रति भारी रोष और अविश्वास का माहौल लाइव संधारित देखा जा रहा है।

कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर प्रसाद की त्वरित प्रविष्टि: भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाए जा रहे बैरियर

​झमटा-महिषाकोल पुल के पाए धंसने और रेलिंग में भयंकर दरारें प्रविष्ट होने की प्रामाणिक सूचना जैसे ही दूरभाष और डिजिटल माध्यमों से जिला जल संसाधन एवं ग्रामीण कार्य विभाग के आला कप्तानों को हस्तगत कराई गई, विभाग के भीतर सांगठनिक खलबली मच गई। मामले के विधिक विन्यास और तात्कालिक सुरक्षा प्रबंधों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर प्रसाद ने बताया कि विभागीय नियंत्रण कक्ष को इस तकनीकी विफलता की इनपुट हासिल हो चुकी है।

​कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर प्रसाद ने साफ किया कि पुल के मलबे को पूरी तरह से जमींदोज होने से बचाने और आम मुसाफिरों की शारीरिक सुरक्षा ग्रिड को अभेद्य रखने के उद्देश्य से तुरंत कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग के विनिर्देश पर पुल के दोनों मुहानों पर भारी वाणिज्यिक वाहनों, जैसे भारी ट्रकों, ट्रैक्टरों और गिट्टी-बालू लदे डंपरों के परिचालन को पूरी कड़ाई से ब्लॉक (प्रतिबंधित) किया जा रहा है। पुल के प्रवेश द्वारों पर लोहे के मजबूत सुरक्षा बैरियर और चेतावनी संकेतक बोर्ड लाइव मुस्तैद किए जा रहे हैं, ताकि कोई भी भारी वाहन चालक अनजाने में पुल के ऊपर प्रविष्ट न हो सके। कार्यपालक अभियंता के अनुसार, इन तात्कालिक प्रबंधों के बल पर पुल के पाए पर संधारित अतिरिक्त भार की सांख्यिकी को मंद किया जा रहा है ताकि पुल फिलहाल अपनी अवस्थिति में अस्थायी रूप से सुरक्षित संधारित रह सके।

ग्रामीणों के बीच गहरा अवसाद और आवागमन ठप होने से व्यापारिक गलियारे प्रभावित

​परमान नदी पर संधारित इस मुख्य पुल के पाए के धंसने और भारी वाहनों की नो-एंट्री लाइव हो जाने के कारण झमटा और महिषाकोल प्रक्षेप का संपूर्ण ग्रामीण जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित होकर म्यूट हो गया है। स्थानीय ग्रामीण कप्तानों और किसानों ने बताया कि वर्तमान समय में फसलों की कटाई और मंडियों तक रसद आपूर्ति का मुख्य सीजन संधारित है, ऐसे में ट्रैक्टरों और मालवाहक पिकअप वाहनों के मार्ग को पूरी कड़ाई से ब्लॉक कर दिए जाने के कारण उन्हें अपनी कृषि उपजों को अररिया मुख्य बाजार तक ले जाने के लिए कई किलोमीटर की अतिरिक्त और दुर्गम दूरी तय करनी पड़ रही है।

​इसके समानांतर, अंचल के भीतर चलने वाली आपातकालीन चिकित्सा गाड़ियों और स्कूली बसों के संचरण पर भी आंशिक ग्रहण लग चुका है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधीक्षक से कड़क मांग की है कि केवल बैरियर और बोर्ड लगाकर अपनी विधिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बजाय, पटना से पुल निर्माण निगम के उच्चस्तरीय विशेषज्ञों और फॉरेंसिक डिजाइन इंजीनियर्स के खोजी दस्तों को तुरंत हवाई मार्ग से अररिया बुलाया जाए। ग्रामीण चाहते हैं कि पाए के निचले हिस्से में कंक्रीट ग्राउटिंग और पायर-जैकेटिंग तकनीकों के विन्यास को लाइव मोड पर सक्रिय कर पुल की भार वहन क्षमता को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर दोबारा सुदृढ़ और चालू किया जा सके, ताकि क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता को किसी बड़े अवरोध का सामना न करना पड़े।

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