
पटना, 22 मई 2026। बिहार पुलिस के माथे पर कलंक लगाने वाले और मादक पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एक विशाल नेटवर्क का संचालन करने वाले सिपाही के खिलाफ कानून के जासूसी दस्तों ने एक प्रखर और अभेद्य सफलता दर्ज की है। पटना सिटी प्रक्षेत्र के आलमगंज थाना कांड संख्या 294/26 से जुड़े ₹25 करोड़ के भारी-भरकम स्मैक तस्करी कांड में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य मास्टरमाइंड और बर्खास्तगी के कगार पर संधारित सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश को पुलिस की विशेष प्रवर्तन टीम ने पड़ोसी राज्य झारखंड की राजधानी रांची से विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है।
नशीले पदार्थों के इस काले सिंडिकेट के शीर्ष कप्तान की गिरफ्तारी की इनपुट जैसे ही पुलिस मुख्यालय को हस्तगत हुई, प्रशासनिक गलियारों में सांगठनिक हलचल तेज हो गई। पुलिस ने आरोपी सिपाही को कड़े सुरक्षा घेरे में पटना लाकर विधिक अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत के तहत बेऊर जेल के सींखचों के पीछे भेजने का विधिक प्रक्रम मुकम्मल कर दिया गया है।
रांची के पॉश इलाके में बदला था ठिकाना, एसआईटी ने अभेद्य चक्रव्यूह रचकर दबोचा
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के सांगठनिक विन्यासों पर प्रकाश डालते हुए पटना के वरीय पुलिस कप्तानों ने बताया कि आरोपी सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक उर्फ अनीश पटना पुलिस और मद्यनिषेध इकाई की रडार पर पिछले कई महीनों से लाइव संधारित था। वह कूटनीतिक रूप से अपने मोबाइल लोकेशंस, सिम कार्डों के विन्यास और डिजिटल पहचान को लगातार डाइवर्ट कर रहा था, जिससे जासूसी विंग को तकनीकी सर्विलांस में कड़ा अवसाद उत्पन्न हो रहा था।
पटना पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और विशेष एसआईटी टीम को एक प्रामाणिक मानवीय स्रोत से इनपुट हस्तगत हुआ कि आरोपी रांची के एक वीआईपी इलाके में अपनी पहचान पूरी तरह ब्लॉक करके ठिकाना बदले हुए रह रहा है। इस खुफिया इनपुट के धरातल पर लाइव होते ही बिहार पुलिस के विशेष दस्तों ने रांची के उस विशिष्ट हॉट-स्पॉट की विधिक घेराबंदी मुकम्मल की और तड़के सुबह अचानक छापेमारी कर ऋषिकेश क्रांतिकारक को ऑन-स्पॉट धर-दबोचा, जिससे उसके प्रक्षेत्र से बाहर भागने के सभी रास्ते बंद हो गए।
नालंदा का निवासी और राजगीर में आलीशान बंगला, वर्दी की आड़ में खड़ी की अकूत बेनामी संपत्ति
पुलिस डायरी के आंतरिक पन्नों को खंगालने पर गिरफ्तार आरोपी सिपाही के वैभवशाली और विलासितापूर्ण जीवन के कई विस्मयकारी विलेख पटल पर आए हैं। ऋषिकेश क्रांतिकारक मूल रूप से नालंदा जिले के अंतर्गत आने वाले दीपनगर थाना क्षेत्र के नगवां गांव का मूल निवासी है। कानून की वर्दी पहनकर समाज को सुरक्षित रखने का विधिक संकल्प लेने वाले इस सिपाही ने स्मैक की तस्करी से अर्जित काली कमाई के बल पर आलीशान साम्राज्य खड़े कर रखे थे।
नालंदा के पैतृक गांव के अलावा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर के एक बेहद महंगे प्रक्षेप में उसका एक आलीशान बहुमंजिला बंगला संधारित पाया गया है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) अब इस सिपाही की बेनामी संपत्तियों, आलीशान वाहनों के काफिले और विभिन्न बैंक खातों में संचित अकूत पूंजी प्रवाह के सांख्यिकीय डेटा डंप की गहन विधिक स्क्रूटनी लाइव मोड पर कर रही है, ताकि आय से अधिक संपत्ति का एक अलग कड़क मामला पंजीकृत किया जा सके।
आलमगंज थाना कांड संख्या 294/26: जितेंद्र और नीतीश की कड़ियों से खुला था सिपाही का राज
₹25 करोड़ के इस वृहद स्मैक कांड की पृष्ठभूमि पटना सिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र से संरेखित है। इस मामले में पुलिस के जासूसी दस्तों ने पूर्व की समय अवधि में ही कड़ाई बरतते हुए सिंडिकेट के दो अंतर-जिला सक्रिय तस्करों को भारी मात्रा में परिष्कृत स्मैक के कंसाइनमेंट के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पकड़े गए तस्करों में समस्तीपुर जिले का निवासी जितेंद्र कुमार और जहानाबाद प्रक्षेत्र का मूल निवासी नीतीश कुमार शामिल संधारित थे, जो वर्तमान समय में विधिक दंडात्मक धाराओं के तहत जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं।
पूछताछ कक्ष के भीतर जब इन दोनों तस्करों से कनिष्ठ जासूसों ने कूटनीतिक पूछताछ मुकम्मल की थी, तब उन्होंने यह सनसनीखेज खुलासा किया था कि इस पूरे नशा नेटवर्क की कप्तानी, वित्तपोषण और बैकएंड से कड़क संरक्षण देने का काम सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक ही करता था। इसके अतिरिक्त, इस नेटवर्क में पटना के पटनदेवी प्रक्षेप के निवासी राहुल यादव समेत कई अन्य सफेदपोश और रसूखदार लोगों के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी दर्ज है, जिनकी गिरफ्तारी के विधिक रास्तों को लॉक करने के लिए छापेमारी ग्रिड निरंतर सक्रिय संधारित है।
गया से भागलपुर हुआ था ट्रांसफर, विभागीय नियमों को ताक पर रखकर चल रहा था फरार
ऋषिकेश क्रांतिकारक के विभागीय और सेवा रिकॉर्ड के पन्नों को पलटने पर प्रशासनिक स्तर पर बरती गई घोर विसंगतियों का विलेख भी पटल पर आया है। आरोपी सिपाही पूर्व में गया जिले के विभिन्न थानों और पुलिस लाइंस में पदस्थापित संधारित था। वहां उसकी संदिग्ध गतिविधियों और अंतर-प्रांतीय तस्करों के साथ लाइव संपर्कों की कतिपय गोपनीय शिकायतें पुलिस मुख्यालय तक प्रविष्ट हुई थीं। इसके उपरांत, जुलाई 2025 में प्रशासनिक और अनुशासनात्मक आधार पर उसका स्थानांतरण गया से सुदूर भागलपुर जिले के लिए विधिक रूप से निर्गत किया गया था।
परंतु, अपनी आपराधिक कड़ियों को म्यूट होने से बचाने और पुलिस कप्तानों की रडार से डाइवर्ट होने के उद्देश्य से उसने भागलपुर पुलिस लाइन में अपनी विधिक आमद दर्ज नहीं कराई। वह विभागीय नियमों और पुलिस मैनुअल के विनिर्देशों को पूरी तरह से ताक पर रखकर रातों-रात फरार घोषित हो गया और अंडरग्राउंड रहकर रांची तथा पटना के ठिकानों से अपने नशीले पदार्थों के साम्राज्य को लाइव मोड पर ऑपरेट करता रहा।
रामकृष्ण नगर और आलमगंज ठिकानों से मिले चेकबुक और सर्विस रिकॉर्ड के पुख्ता दस्तावेज
फरार रहने की समयावधि के दौरान जब पटना पुलिस की जासूसी टीमों ने तकनीकी इनपुट्स के आधार पर आरोपी सिपाही के पटना स्थित कतिपय ठिकानों—विशेषकर आलमगंज और रामकृष्ण नगर प्रक्षेपों में अवस्थित फ्लैट्स और कमरों पर प्रखर दबिश दी थी, तो वहां से फॉरेंसिक और विधिक साक्ष्यों का एक बहुत बड़ा जखीरा हस्तगत हुआ था। पुलिस ने उन ठिकानों की सघन तलाशी के दौरान आरोपी सिपाही ऋषिकेश क्रांतिकारक के नाम से संधारित विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों के पासबुक, करोड़ों रुपये के लेनदेन वाले हस्ताक्षरित चेकबुक, कतिपय बेनामी वित्तीय विलेख और उसके अपने मूल पुलिस सर्विस रिकॉर्ड्स की फाइलें भौतिक रूप से बरामद कर जब्त की थीं।
इन डिजिटल और कागजी साक्ष्यों के विश्लेषण से यह अकाट्य रूप से प्रमाणित हो गया कि जुलाई 2025 से फरार रहने के बावजूद वह स्मैक की खेप को सीमा पार से मंगाने और उसकी आपूर्ति पटना के स्थानीय डीलरों तक सुरक्षित पहुंचाने के विन्यास में सीधे तौर पर आकंठ संलिप्त था। जांच टीम को यह कड़ा संदेह है कि नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप को पूर्वोत्तर भारत के कतिपय सीमावर्ती प्रक्षेपों से ट्रकों और अन्य गुप्त परिवहन माध्यमों के जरिए बिहार के बाजार में डाइवर्ट किया जाता था। सिपाही अपनी वर्दी और पुलिस पास का कूटनीतिक दुरुपयोग कर इन कंसाइनमेंट्स को विभिन्न चेकपोस्टों से बिना किसी फॉरेंसिक जांच के सुरक्षित पार कराने का विधिक प्रबंध मुकम्मल करता था।
आलमगंज थाना पुलिस ने इस दोहरे सांगठनिक भ्रष्टाचार और मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के वास्ते ऋषिकेश क्रांतिकारक को पुलिस रिमांड पर लेने की विधिक अर्जी अदालत के पटल पर दाखिल की है, ताकि रिमांड अवधि के दौरान इस ₹25 करोड़ के स्मैककांड के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, हवाला ऑपरेटरों और पुलिस महकमे के भीतर छिपे उसके अन्य कनिष्ठ सहयोगियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स की स्क्रूटनी मुकम्मल की जा सके।


