
पटना/सिवान/गोपालगंज, 21 मई 2026। बिहार में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और आधुनिक औद्योगिक ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है। उद्योग विभाग ने अब राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही औद्योगिक गतिविधियों की जमीनी समीक्षा तेज कर दी है। इसी कड़ी में उद्योग विभाग के सचिव सह बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) और आईडीए के प्रबंध निदेशक श्री कुन्दन कुमार ने सिवान और गोपालगंज जिलों का दौरा कर कई औद्योगिक इकाइयों, योजनाओं और औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार को निवेश-अनुकूल औद्योगिक राज्य के रूप में विकसित करना है, जहां स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिले और छोटे तथा मध्यम उद्योगों को नई पहचान मिल सके। इसी सोच के तहत उद्योग विभाग लगातार जिलास्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित कर योजनाओं की प्रगति का आकलन कर रहा है।
सिवान दौरे के दौरान उद्योग विभाग के सचिव ने कई औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने Prashad Traders (Sonam Chakki Fresh Atta), M/s Faiz Building Construction और Real Teach जैसी इकाइयों का दौरा कर वहां उत्पादन, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और विस्तार की संभावनाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्यमियों से सीधे संवाद भी किया और उनकी समस्याओं तथा सुझावों को गंभीरता से सुना।
उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार बिहार में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नई नीतियों और योजनाओं पर काम कर रही है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण सामग्री, टेक्नोलॉजी आधारित इकाइयों और ग्रामीण उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
सिवान में आयोजित समीक्षात्मक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना (MMUY), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), पीएम विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) जैसी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों तक पहुंचाया जाए।
उद्योग विभाग का मानना है कि यदि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्योग विकसित किए जाएं तो पलायन की समस्या कम होगी और युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। यही कारण है कि सरकार अब जिला स्तर पर उद्योग आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
गोपालगंज जिले के हथुआ औद्योगिक क्षेत्र फेज-3 का निरीक्षण भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। यहां सचिव ने औद्योगिक आधारभूत संरचना, सड़क, बिजली, पानी और निवेश की संभावनाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों में सभी जरूरी सुविधाओं को समय पर विकसित किया जाए ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों को भूमि आवंटन, बिजली कनेक्शन, सड़क संपर्क और अन्य आवश्यक सेवाओं में तेजी लाने की आवश्यकता है। इस पर उद्योग विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
गोपालगंज समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत परियोजनाओं, वित्तीय सहायता, बैंकिंग सहयोग और उद्यमियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार उद्योग लगाने वाले निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उद्योग विभाग के सचिव श्री कुन्दन कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि बिहार में उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर बुनियादी ढांचा और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए ताकि अधिक से अधिक निवेश आकर्षित हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और रोजगार सृजन की सबसे बड़ी ताकत भी हैं। यदि जिलास्तर पर उद्योगों का विस्तार होगा तो स्थानीय बाजार मजबूत होंगे, छोटे व्यापारियों को लाभ मिलेगा और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
बैठकों के दौरान उद्यमियों ने भी कई मुद्दे उठाए, जिनमें बैंक ऋण स्वीकृति में देरी, बिजली आपूर्ति, परिवहन और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी समस्याएं प्रमुख रहीं। उद्योग विभाग ने इन समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिया और संबंधित अधिकारियों को समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के जरिए बड़ी संख्या में महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दोनों उपलब्ध करा रही है।
इसी तरह PMFME योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। बिहार में कृषि आधारित उद्योगों की बड़ी संभावनाएं हैं और सरकार इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए लगातार काम कर रही है।
पीएम विश्वकर्मा योजना और PMEGP के तहत पारंपरिक कारीगरों, छोटे व्यवसायियों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी तेजी लाई जा रही है। उद्योग विभाग का मानना है कि इन योजनाओं के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
गोपालगंज पहुंचने पर उद्योग विभाग के सचिव को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो इस दौरे के महत्व को दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की समीक्षा बैठकें और औद्योगिक निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे।
बिहार सरकार की कोशिश है कि राज्य को केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित न रखकर औद्योगिक विकास की नई पहचान दी जाए। इसी उद्देश्य के साथ उद्योग विभाग लगातार निवेश, उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।


