विश्व पर्यावरण दिवस अभियान में मालदा मंडल की बड़ी पहल, रेलवे स्टेशनों पर बढ़ेगा पर्यावरण-अनुकूल खानपान व्यवस्था का दायरा

मालदा, 21 मई 2026। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 अभियान के तहत पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रेलवे परिसरों में पर्यावरण-अनुकूल खानपान व्यवस्था को बढ़ावा देने का अभियान तेज कर दिया है। 15 मई से 5 जून तक चल रहे विशेष पर्यावरण अभियान के सातवें दिन मालदा टाउन रेलवे स्टेशन पर “गैर-प्लास्टिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कटलरी को बढ़ावा” विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य रेलवे परिसरों में एकल-उपयोग प्लास्टिक की निर्भरता कम करना और यात्रियों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

रेल प्रशासन के अनुसार यह कार्यक्रम मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बदलते पर्यावरणीय संकट और प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए रेलवे अब अपनी खानपान सेवाओं को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है।

कार्यक्रम के तहत मालदा मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कार्तिक सिंह ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन स्थित फूड प्लाजा और भोजनालयों का निरीक्षण किया। इसके अलावा आईआरसीटीसी से जुड़े दो प्रमुख बेस किचन—आर के एसोसिएट्स एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड और बृंदावन फूड प्रोडक्ट्स—का भी विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान रेलवे अधिकारियों ने पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्थाओं के पालन की स्थिति का जायजा लिया।

अधिकारियों ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि रेलवे परिसरों में प्लास्टिक आधारित प्लेट, कप, चम्मच और अन्य डिस्पोजेबल सामग्री की जगह जैव-अवक्रमणीय एवं गैर-प्लास्टिक कटलरी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। निरीक्षण के दौरान खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और किचन परिसरों की साफ-सफाई की भी गहन जांच की गई।

रेलवे सूत्रों के अनुसार इस अभियान के तहत स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने की योजना है जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएं। इसके लिए कागज, बांस, लकड़ी, गन्ने के रेशे और अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनी कटलरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि रेलवे जैसी बड़ी सार्वजनिक व्यवस्था प्लास्टिक उपयोग में कमी लाती है तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

आईआरसीटीसी ने भी इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए रेलवे परिसरों में पर्यावरण-अनुकूल खानपान सेवाओं को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में रेलवे स्टेशनों और बेस किचन में प्लास्टिक उपयोग को और कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्थाओं में से एक है और प्रतिदिन लाखों लोग रेलवे सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि रेलवे प्लास्टिक उपयोग को कम करने में सफल होता है तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। एकल-उपयोग प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और मिट्टी, जल स्रोतों तथा जीव-जंतुओं पर गंभीर प्रभाव डालता है।

रेल प्रशासन ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि व्यवहारिक परिवर्तन लाने का प्रयास है। रेलवे अब धीरे-धीरे ऐसी व्यवस्थाओं को स्थायी रूप देने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे पर्यावरण-अनुकूल विकल्प रेलवे प्रणाली का नियमित हिस्सा बन सकें।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बेस किचन में स्वच्छता मानकों के पालन, खाद्य सामग्री के भंडारण और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई।

मालदा मंडल की इस पहल को रेलवे के व्यापक पर्यावरण अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतलों के पुनर्चक्रण, सौर ऊर्जा के उपयोग, जल संरक्षण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे कई कार्यक्रम चला रहा है। अब खानपान सेवाओं में भी पर्यावरण-अनुकूल बदलावों को प्राथमिकता दी जा रही है।

रेल अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की भूमिका भी इस अभियान में महत्वपूर्ण है। यदि यात्री स्वयं प्लास्टिक के उपयोग से बचें और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएं, तो यह अभियान और अधिक प्रभावी हो सकता है। रेलवे यात्रियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 अभियान के तहत मालदा मंडल द्वारा आने वाले दिनों में भी कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त स्टेशन अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेष कार्यक्रम शामिल हैं। रेलवे का उद्देश्य केवल प्रशासनिक स्तर पर बदलाव लाना नहीं बल्कि यात्रियों और आम लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।

रेल विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सार्वजनिक संस्थानों को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को और गंभीरता से निभाना होगा। जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े संस्थानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। मालदा मंडल की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

मालदा मंडल ने अंत में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। रेलवे प्रशासन का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के तहत चलाया जा रहा यह अभियान रेलवे परिसरों को अधिक हरित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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