
पटना, 21 मई 2026। बिहार में आगामी श्रावणी मेला 2026 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार इस बार मेले को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालु अनुकूल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कांवरियों और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला आस्था का बड़ा आयोजन है और इसमें आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मेला क्षेत्र में व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, बिजली, पेयजल और यातायात प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से श्रावणी मेला-2026 की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, स्नानागार, टेंट, पंडाल, बिजली आपूर्ति और अग्निशमन सेवाओं को लेकर भी विशेष तैयारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कांवरिया पथ को पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए। रास्तों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति बेहतर रखने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष रूप से रात के समय कांवरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त रोशनी और पुलिस गश्ती की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि कांवरिया पथ पर बने प्रमुख विश्राम स्थलों के पास स्वास्थ्य सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहें। गर्मी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए चिकित्सा शिविरों और एम्बुलेंस सेवाओं की व्यवस्था मजबूत की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल उपचार मिलना चाहिए। इसके लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने साफ-सफाई और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेला क्षेत्र और कांवरिया मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए। नगर विकास विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को विशेष रूप से नियमित सफाई और जलापूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं भी बिजली के खुले या नंगे तार नहीं रहने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, बिजली से जुड़े संभावित हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया।
राज्य के प्रमुख शिवालयों में भीड़ प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलाभिषेक के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित और व्यवस्थित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक और पर्याप्त मानव संसाधन का उपयोग करने को कहा गया।
अपर पुलिस महानिदेशक लॉ एंड ऑर्डर सुधांशु कुमार ने बैठक में सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाई जाएगी और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। प्रशासन द्वारा ड्रोन निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया दल की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।
बैठक में कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की तैयारियों की जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविरों और एम्बुलेंस सेवाओं की तैयारी पर प्रस्तुतीकरण दिया, जबकि ऊर्जा विभाग ने निर्बाध बिजली आपूर्ति की योजना साझा की। नगर विकास विभाग ने साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की रणनीति बताई। परिवहन विभाग ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए विशेष यातायात व्यवस्था की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु बाबा धाम और राज्य के अन्य शिवालयों में जल चढ़ाने के लिए आते हैं। ऐसे में बिहार सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मेला व्यवस्था को लेकर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाए और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन जिलों में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है वहां अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा समेत कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के अधिकारी भी जुड़े रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर योजना और मजबूत समन्वय के जरिए इस बार श्रावणी मेला को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार का फोकस इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुगम यात्रा अनुभव पर विशेष रूप से केंद्रित है।


