भागलपुर पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: नाथनगर से लापता सभी पांचों नाबालिग लड़कियां पटना स्टेशन से सकुशल बरामद

भागलपुर/पटना, 21 मई 2026। भागलपुर जिले के नाथनगर थाना प्रक्षेत्र के लालूचक इलाके से रातों-रात रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुई पांचों नाबालिग लड़कियों के हाई-प्रोफाइल मामले में एक बहुत बड़ी और प्रखर विधिक सफलता हाथ लगी है। कल सुबह जिस सामूहिक गुमशुदगी की खबर ने संपूर्ण अंग प्रमंडल के भीतर भारी मानसिक अवसाद, जन-आक्रोश और सुरक्षात्मक हड़कंप की अवस्थिति निर्मित कर दी थी, उसका पटाक्षेप महज 24 घंटे के भीतर पूरी विधिक शुचिता के साथ हो गया है।

​भागलपुर जिला पुलिस प्रशासन द्वारा सक्रिय किए गए अभेद्य जासूसी चक्रव्यूह और अंतर-जिला सांगठनिक समन्वय के बल पर लापता सभी पांचों किशोरियों को राजधानी पटना के मुख्य रेलवे स्टेशन (पटना जंक्शन) से शत-प्रतिशत सकुशल बरामद कर लिया गया है। पटना रेल पुलिस यानी शासकीय रेल पुलिस (GRP) के खोजी दस्तों ने मुस्तैदी का परिचय देते हुए इन बच्चियों को उस समय अपने सुरक्षा घेरे में लिया, जब वे भागलपुर से ट्रेन के जरिए सफर तय कर पटना स्टेशन के प्लेटफार्म पर प्रविष्ट हुई थीं। इस त्वरित रिकवरी के बाद पिछले 24 घंटों से गहरे सदमे और विलाप में डूबे पीड़ित परिवारों और लालूचक मोहल्ले के नागरिकों ने राहत की एक बहुत बड़ी सांस ली है।

भागलपुर से ट्रेन पकड़कर पहुंची थीं पटना, प्लेटफार्म पर गश्त कर रही जीआरपी ने हुलिये से पहचाना

​प्रशासनिक संचिकाओं और पटना रेल पुलिस मुख्यालय से संकलित प्राथमिक विलेखों के अनुसार, लापता बच्चियां श्वेता कुमारी, पल्लवी कुमारी, सोनम कुमारी, गंगा कुमारी और तेजस्वी कुमारी भागलपुर के स्थानीय स्टेशन से एक पैसेंजर/एक्सप्रेस ट्रेन के विन्यास में सवार होकर सीधे पटना की ओर डाइवर्ट हो गई थीं। इधर, भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक और नगर पुलिस अधीक्षक के कुशल विनिर्देश पर गठित विशेष अनुसंधान टीम (SIT) ने बच्चियों के हुलिये और तस्वीरों से सुसज्जित एक आधिकारिक “गुमशुदा पोस्टर” डिजिटल और मैनुअल ग्रिड पर पहले ही लाइव फ्लैश कर दिया था। इसके साथ ही सूबे के सभी मुख्य रेलवे टर्मिनलों और बस प्रचालन केंद्रों को हाई अलर्ट मोड पर संधारित किया गया था।

​जैसे ही बुधवार की दोपहर बाद संबंधित ट्रेन पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या पर आकर रुकी, वहां सादे लिबास और विभागीय वर्दी में अनवरत गश्त कर रहे जीआरपी के सतर्क जवानों के दस्ते की नजर एक साथ चल रही इन पांचों बच्चियों पर पड़ी। बच्चियों की शारीरिक गतिविधियों, चेहरे की आंशिक घबराहट और भागलपुर पुलिस द्वारा जारी किए गए इनामी पोस्टर में परिलक्षित चेहरों का मिलान करते ही जीआरपी कप्तानों को विधिक सत्यापन मुकम्मल हो गया। रेल पुलिस ने बिना एक पल का समय गंवाए कूटनीतिक सूझबूझ के साथ सभी पांचों नाबालिगों को प्लेटफार्म पर ही रोक लिया और उन्हें सुरक्षित रूप से रेल थाना परिसर के महिला विंग (चाइल्ड हेल्प डेस्क) के भीतर प्रविष्ट कराया, जिससे किसी भी प्रकार के अवांछित विचलन की आशंका को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया।

25,000 रुपये के नकद इनाम और डिजिटल पोस्टर का दिखा प्रखर असर, अभेद्य साबित हुआ जासूसी ग्रिड

​इस सनसनीखेज मामले के उद्भेदन की कड़ियों को विश्लेषित करने पर यह प्रामाणिक तथ्य सामने आता है कि भागलपुर पुलिस द्वारा त्वरित रूप से उठाया गया नीतिगत कदम बेहद कारगर साबित हुआ। लापता होने की विधिक शिकायत दर्ज होते ही जिले के वरीय पुलिस कप्तानों ने न केवल एसआईटी का गठन लाइव किया, बल्कि बच्चियों की बरामदगी में आम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने के वास्ते 25,000 रुपये की नकद इनाम राशि की विधिक घोषणा भी सार्वजनिक कर दी थी।

​इस इनामी घोषणा और सोशल मीडिया पोर्टल्स पर अनवरत साझा हो रहे डिजिटल पोस्टर्स ने एक बड़े सुरक्षा कवच के रूप में कार्य किया। भागलपुर साइबर सेल ने रेल पुलिस के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) के साथ रियल-टाइम डेटा डंप साझा किया था, जिसके कारण भागलपुर-पटना लूप लाइन और किऊल-मोकामा रेलखंड के बीच पड़ने वाले सभी संवेदनशील हॉट-स्पॉट्स पर निगरानी का पहरा पूरी कड़ाई से लॉक था। यही कारण रहा कि बच्चियां जैसे ही पटना की भौगोलिक सीमा के भीतर प्रविष्ट हुईं, वे कानून के जासूसी ग्रिड से बचकर बाहर डाइवर्ट नहीं हो सकीं और २४ घंटे की कड़क समय-सीमा के भीतर ही उन्हें सुरक्षित रिकवर कर लिया गया। पटना जीआरपी ने प्राथमिक चिकित्सकीय परीक्षण और भोजन विन्यासों के उपरांत स्पष्ट किया है कि सभी बच्चियां शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और भयमुक्त संधारित हैं।

नाथनगर से विशेष पुलिस दस्ता पटना रवाना, भागलपुर वापसी के बाद दर्ज होंगे विधिक बयान

​सभी पांचों नाबालिग लड़कियों के पटना स्टेशन पर सुरक्षित अभिरक्षा में होने की प्रामाणिक इनपुट दूरभाष के माध्यम से मिलते ही भागलपुर और नाथनगर के प्रशासनिक गलियारों में छाई गहरी चिंता की लहरें पूरी तरह से विलीन हो गईं। नाथनगर थानाध्यक्ष ने मामले की अग्रिम विधिक संचिकाओं को लाइन-अप करते हुए बताया कि वरीय अधिकारियों के विनिर्देश पर महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टरों, विधिक परामर्शदाताओं और सशस्त्र सुरक्षा बलों की एक विशेष एस्कॉर्ट टीम को आपातकालीन वाहन के माध्यम से सीधे पटना के लिए प्रस्थान करा दिया गया है।

​यह पुलिस दस्ता पटना पहुंचकर विधिक कागजी प्रक्रमों को मुकम्मल करते हुए जीआरपी से सभी बच्चियों की कप्तानी कस्टडी अपने हाथों में हस्तगत करेगा, और उन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में वापस भागलपुर लेकर आएगा। भागलपुर आगमन के उपरांत, कानून की निर्धारित शुचिता के तहत सभी पांचों बच्चियों का जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के विशेष मेडिकल बोर्ड से स्वास्थ्य परीक्षण मुकम्मल कराया जाएगा। इसके उपरांत, बाल कल्याण समिति (CWC) के परामर्शदाताओं की मौजूदगी में उनकी काउंसलिंग लाइव की जाएगी, ताकि यह वास्तविक कारण पटल पर आ सके कि वे किन परिस्थितियों या किस मानसिक अवसाद अथवा बहकावे के कारण घर की दहलीज लांघकर पटना जाने वाली ट्रेन में सवार हुई थीं। तत्पश्चात, विधिक अदालत के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत उनके आधिकारिक बयान दर्ज कराने के उपरांत ही उन्हें उनके माता-पिता को ससम्मान सुपुर्द (हस्तगत) किया जाएगा।

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