स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटाइजेशन में बिहार बना मॉडल, मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का किया निरीक्षण

पटना, 20 मई 2026। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटाइजेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बनते जा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में तकनीक आधारित व्यवस्थाओं और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने लगा है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने पटना पहुंचकर बिहार स्वास्थ्य विभाग के अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का दौरा किया और यहां संचालित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का विस्तृत अवलोकन किया।

मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री के साथ राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बिहार स्वास्थ्य विभाग की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया और राज्य में लागू विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों की जानकारी साझा की गई।

दौरे के दौरान बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया। वहीं स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली, अस्पताल मॉनिटरिंग सिस्टम और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत प्रस्तुति दी।

अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों से सरकारी अस्पतालों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है। राज्य के विभिन्न जिलों में अस्पतालों की निगरानी अब तकनीक के माध्यम से की जा रही है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है।

मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से “भव्या” पोर्टल की कार्यप्रणाली में रुचि दिखाई। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह पोर्टल मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और अस्पताल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से मरीजों की जानकारी, इलाज की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि डिजिटाइजेशन के कारण अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ी है और मरीजों को सेवाएं प्राप्त करने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिल रही है। कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किए जाने से मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।

कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से राज्यभर के अस्पतालों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली के जरिए अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों की संख्या, बेड की उपलब्धता, दवाओं की स्थिति और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम निगरानी संभव हो पाई है।

दौरे के दौरान मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को लाइव सर्विलांस सिस्टम के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अस्पतालों में स्थापित कैमरों और तकनीकी नेटवर्क के माध्यम से कई गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।

शिकायत निवारण प्रणाली को भी बिहार के डिजिटल स्वास्थ्य मॉडल की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इससे जवाबदेही बढ़ी है और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से अस्पतालों की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित हुई है। कई मामलों में समस्याओं की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे समय रहते समाधान संभव हो पाता है।

दौरे के दौरान मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बिहार स्वास्थ्य विभाग की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करके स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बिहार ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना समय की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। अस्पताल प्रबंधन, मरीजों की निगरानी, डेटा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं में तकनीक बड़ी भूमिका निभा सकती है। बिहार का मॉडल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के आम नागरिकों तक बेहतर, त्वरित और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग लगातार अपने डिजिटल सिस्टम को अपडेट कर रहा है ताकि लोगों को अधिक सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के अस्पतालों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले और किसी को भी इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

अधिकारियों ने बताया कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल मॉडल को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम जारी है। आने वाले समय में और अधिक अस्पतालों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा तथा मरीजों के लिए नई डिजिटल सुविधाएं शुरू की जाएंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार लंबे समय तक स्वास्थ्य ढांचे को लेकर चुनौतियों का सामना करता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में तकनीक आधारित सुधारों ने स्थिति बदलने की कोशिश की है। यदि इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता रहा, तो बिहार का डिजिटल स्वास्थ्य मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

फिलहाल मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बिहार का स्वास्थ्य डिजिटाइजेशन मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। आने वाले समय में अन्य राज्य भी बिहार की इस प्रणाली का अध्ययन कर अपने यहां लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

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