
कोलकाता, 19 मई 2026: रेलवे स्टेशनों की सफाई और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में पूर्व रेलवे ने एक अनोखी और प्रभावशाली पहल शुरू की है, जिसकी अब पूरे रेलवे नेटवर्क में चर्चा हो रही है। पूर्व रेलवे द्वारा शुरू किया गया ‘30 मिनट सफाई चैलेंज’ न केवल रेलवे प्रशासन की कार्यशैली को नई पहचान दे रहा है, बल्कि यात्रियों के बीच स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी बढ़ा रहा है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि इस अभियान के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं और यात्रियों से मिलने वाली शिकायतों की संख्या बेहद कम हो गई है।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह अभियान रेलवे परिसरों को स्वच्छ, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारी और भागीदारी की भावना विकसित करना भी है।
इस अभियान की शुरुआत 15 अप्रैल से 14 मई तक चलाए गए ‘स्वच्छता जागरूकता अभियान’ के पहले चरण से हुई थी। पूरे एक महीने तक रेलवे की टीमें लगातार विभिन्न स्टेशनों पर जाकर यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करती रहीं। यात्रियों से अपील की गई कि वे रेलवे परिसरों को अपने घर की तरह साफ रखें और गंदगी फैलाने से बचें।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार पहले चरण का उद्देश्य यात्रियों में व्यवहारिक बदलाव लाना था। रेलवे कर्मचारियों ने स्टेशनों, प्लेटफॉर्मों और प्रतीक्षालयों में जाकर लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में बताया। इस दौरान पोस्टर, घोषणाएं और प्रत्यक्ष संवाद के जरिए यात्रियों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा गया।
पहले चरण की सफलता के बाद अब दूसरे चरण में ‘30 मिनट सफाई चैलेंज’ की शुरुआत की गई है। इस पहल का औपचारिक शुभारंभ 16 मई को के सियालदह स्टेशन पर किया गया। इस नई व्यवस्था के तहत यदि किसी यात्री को रेलवे स्टेशन परिसर में गंदगी दिखाई देती है तो वह उसकी तस्वीर लेकर ट्विटर, फेसबुक या रेलमदद प्लेटफॉर्म के जरिए रेलवे को सूचना दे सकता है।
रेलवे प्रशासन ने दावा किया है कि शिकायत मिलने के 30 मिनट के भीतर संबंधित जगह की सफाई सुनिश्चित की जा रही है। यही वजह है कि इसे ‘30 मिनट सफाई चैलेंज’ नाम दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक अभियान नहीं बल्कि रेलवे की जवाबदेही और त्वरित कार्यप्रणाली की वास्तविक परीक्षा है।
अभियान के चौथे दिन तक के आंकड़ों ने रेलवे प्रशासन को उत्साहित किया है। अधिकारियों के मुताबिक प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही के बावजूद पूरे नेटवर्क में बेहद कम शिकायतें प्राप्त हुईं। सियालदह मंडल से केवल 12 शिकायतें, हावड़ा मंडल से 6, मालदा से 1 और आसनसोल से 1 शिकायत दर्ज की गई।
रेलवे का कहना है कि प्राप्त सभी शिकायतों का समाधान तय समय सीमा के भीतर कर दिया गया। जमीनी स्तर पर तैनात सफाई कर्मियों और रेलवे कर्मचारियों ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित स्थानों की सफाई की और यात्रियों को समाधान की जानकारी भी दी।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि पहले चरण का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों में स्वच्छता सुनिश्चित करना और यात्रियों में जागरूकता पैदा करना था। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में बेहद कम शिकायतें मिलना इस बात का संकेत है कि रेलवे का प्रयास सफल हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे अब केवल यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यात्रियों के लिए बेहतर वातावरण और सम्मानजनक सफर सुनिश्चित करने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की साझेदारी इसी तरह बनी रही तो आने वाले समय में रेलवे परिसरों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है। प्रतिदिन लाखों यात्रियों के उपयोग के बावजूद स्टेशनों को साफ रखना आसान नहीं होता। ऐसे में तकनीक आधारित त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली काफी प्रभावी साबित हो सकती है।
यात्रियों ने भी रेलवे की इस पहल की सराहना की है। कई यात्रियों का कहना है कि पहले स्टेशनों पर सफाई को लेकर शिकायतें आम बात थीं, लेकिन अब स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है। लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह त्वरित कार्रवाई जारी रही तो यात्रियों का रेलवे पर भरोसा और मजबूत होगा।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि केवल सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी से रेलवे परिसर स्वच्छ नहीं रह सकते, बल्कि यात्रियों को भी जिम्मेदार व्यवहार अपनाना होगा। गंदगी फैलाने से बचना और शिकायत मिलने पर तुरंत सूचना देना इस अभियान का अहम हिस्सा है।
सूत्रों के अनुसार पूर्व रेलवे अब इस मॉडल को और व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी में है। आने वाले समय में रेलवे परिसरों में निगरानी व्यवस्था, सफाई संसाधन और डिजिटल शिकायत प्रणाली को और मजबूत किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि स्वच्छता केवल सौंदर्य का विषय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और यात्री अनुभव से जुड़ा मुद्दा है। साफ-सुथरे स्टेशन यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।
फिलहाल पूर्व रेलवे का यह अभियान देशभर के रेलवे जोनों के लिए भी एक उदाहरण बनता दिखाई दे रहा है। यदि यह मॉडल लंबे समय तक सफल रहता है तो अन्य रेलवे जोन भी इसी तरह की त्वरित सफाई प्रणाली अपनाने पर विचार कर सकते हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि इस पहल से रेलवे स्टेशनों की स्वच्छता व्यवस्था में स्थायी सुधार देखने को मिलेगा और यात्रा अनुभव पहले से अधिक बेहतर होगा।


