
कभी गया शहर की पहचान और शान माने जाने वाला दिग्घी तालाब आज बदहाली, गंदगी और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार बन चुका है। सदियों पुराने इस ऐतिहासिक तालाब की हालत इतनी खराब हो गई है कि अब यहां लोग सुकून की तलाश में नहीं, बल्कि डर और बदबू से बचने के लिए दूर रहते हैं।
दिग्घी तालाब की कहानी सिर्फ एक जलाशय की नहीं, बल्कि उस विरासत की है जिसे धीरे-धीरे विकास और लापरवाही की भेंट चढ़ा दिया गया। अंग्रेजों के दौर में बनाए गए इस तालाब का उद्देश्य गया शहर के भूजल स्तर को संतुलित रखना था। कभी इसका पानी सूरज की रोशनी में चमकता था और यहां नौका विहार लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था।
विकास के नाम पर सिकुड़ता गया तालाब
समय के साथ तालाब के हिस्सों पर सरकारी इमारतें खड़ी होती चली गईं। आयुक्त कार्यालय समेत कई भवनों के निर्माण ने इसके मूल स्वरूप को खत्म कर दिया। इसके बाद भी बचा हिस्सा सुरक्षित नहीं रह सका। 1990 के दशक में तालाब के चारों ओर मीट और मछली की दुकानें खुलने लगीं, जिनका गंदा पानी और कचरा सीधे तालाब में गिरने लगा। शहर के नालों का पानी भी इसमें छोड़ा जाने लगा, जिससे इसका साफ पानी जहरीला और बदबूदार हो गया।
कभी पर्यटन स्थल, अब नशेड़ियों का अड्डा
1987 से 1990 के बीच तक यहां नौकायन होता था और शाम के समय लोग परिवार के साथ सुकून के पल बिताने आते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, शाम ढलते ही यहां नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। शराब और गांजे का सेवन खुलेआम होता है और खाली बोतलें तालाब में फेंक दी जाती हैं।
स्थानीय निवासी शंभू दास का कहना है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए शीशों को भी तोड़ दिया गया है, जिससे असामाजिक तत्व आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
करोड़ों खर्च, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं
इतिहास विशेषज्ञ विजय कुमार मिठ्ठू के अनुसार, वर्ष 2018 में तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 2 करोड़ 54 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन धरातल पर उसका असर कहीं दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि सौंदर्यीकरण सिर्फ कागजों तक सीमित रहा।
शहरवासियों की मांग – दिग्घी तालाब को बचाइए
प्रबुद्ध नागरिक आचार्य रामाकांत शास्त्री का कहना है कि दिग्घी तालाब गया शहर के बीचोंबीच स्थित एक महत्वपूर्ण विरासत है। कलेक्ट्रेट, एसपी कार्यालय और कोर्ट आने वाले लोगों के लिए यह कभी मानसिक शांति का स्थान हुआ करता था। अब इसकी हालत देखकर दुख होता है।
शहरवासियों की मांग है कि तालाब का व्यापक जीर्णोद्धार कराया जाए, गंदे नालों को रोका जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और इसे फिर से पर्यटन एवं सार्वजनिक उपयोग के योग्य बनाया जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए आगे आएगा, या दिग्घी तालाब यूं ही बदहाली में दम तोड़ देगा?


