30 दिन में समस्या का समाधान नहीं तो अफसर पर गिरेगी गाज! बिहार सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, पंचायत से अस्पताल तक जवाबदेही तय

पटना, 19 मई 2026: बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और सख्त संदेश दिया है। राज्यभर में शुरू किए गए “सहयोग शिविर” अभियान के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया कि अब सरकारी दफ्तरों में जनता की शिकायतों को लटकाने की पुरानी व्यवस्था नहीं चलेगी। अगर किसी अधिकारी ने 30 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया, तो उसके खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

सारण जिले के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब हर आवेदन की डिजिटल निगरानी करेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर नहीं होगी, बल्कि अब सरकार खुद गांव और पंचायत स्तर तक पहुंचकर समस्याओं का समाधान करेगी।

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने मंच से कहा कि लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण जनता होती है और जनता की समस्या का समय पर समाधान सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि थाना, अंचल, ब्लॉक और विभिन्न विभागों में आवेदन देने के बाद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती। अब इस पूरी व्यवस्था को बदलने का समय आ गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही “सहयोग पोर्टल” और हेल्पलाइन नंबर 1100 शुरू कर चुकी है। इन माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों और पंचायत स्तर पर आने वाले आवेदनों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी आवेदन पर 10 दिनों तक कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस भेजा जाएगा। 20वें दिन दूसरा नोटिस और 25वें दिन तीसरी चेतावनी जारी की जाएगी। इसके बावजूद अगर 30 दिन पूरे होने तक समाधान नहीं हुआ तो 31वें दिन निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सरकार की इस नई व्यवस्था को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नियम सिर्फ किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंचल कार्यालय, पुलिस थाना, शिक्षा विभाग, ब्लॉक कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सभी सरकारी संस्थानों पर लागू होगा।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अब फाइलों को दबाकर रखने या अनावश्यक देरी करने की प्रवृत्ति खत्म करनी होगी। अगर कोई मामला अदालत में लंबित है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी आवेदक को देनी होगी। लेकिन बिना वजह मामलों को रोकना अब भारी पड़ सकता है।

डुमरी बुजुर्ग पंचायत का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां कुल 54 आवेदन प्राप्त हुए थे और जिला प्रशासन ने सभी मामलों का निष्पादन कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो समय पर समाधान संभव है। सरकार अब इसी मॉडल को पूरे बिहार में लागू करना चाहती है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सोनपुर क्षेत्र के विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सोनपुर को आधुनिक शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां एयरपोर्ट, नई टाउनशिप और बाबा हरिहरनाथ के नाम पर विशेष नगर विकास परियोजना शुरू करने की तैयारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों के लिए जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाएगा। अगर किसी परिवार में शादी या अन्य जरूरी सामाजिक जरूरतें होंगी तो सरकार संवेदनशीलता के साथ अतिरिक्त सहायता देने पर भी विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रभावित लोगों को बाजार मूल्य से कई गुना अधिक मुआवजा देने की नीति पर सरकार काम कर रही है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि सोनपुर को भविष्य में पटना और नोएडा की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। गंगा किनारे “गंगा अंबिका पथ” का निर्माण किया जाएगा, जो इलाके के पांच प्रमुख पुलों को जोड़ने का काम करेगा। इससे यातायात, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में रोजगार और उद्योग को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े, इसके लिए औद्योगिक निवेश बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से काम चल रहा है। नई फैक्ट्रियों और उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बिहार के 211 ऐसे प्रखंड जहां अभी तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां जुलाई महीने से नए कॉलेज शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा 544 प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित करने की योजना पर काम जारी है। सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों में भी निजी संस्थानों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटी बीमारियों के लिए मरीजों को पटना रेफर करने की पुरानी व्यवस्था समाप्त की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अनुमंडल और जिला अस्पतालों को इतना सक्षम बनाया जाए कि अधिकांश इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सके। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव दिखाई देंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर बिना पर्याप्त कारण के मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया तो संबंधित अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार चाहती है कि लोगों को इलाज के लिए अनावश्यक आर्थिक और मानसिक परेशानी न झेलनी पड़े।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग शिविर सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बहाल करने की पहल है। ये शिविर हर महीने दो बार पंचायत स्तर पर लगाए जाएंगे ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूर-दराज के सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को उसके घर के पास ही न्याय, सुविधा और त्वरित समाधान मिल सके।

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