
नई दिल्ली, 19 मई 2026। देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) के प्रश्नपत्र लीक होने के विस्मयकारी और राष्ट्रव्यापी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बहुत बड़ी रणनीतिक और दंडात्मक सफलता हासिल की है। जांच एजेंसी के विशेष खोजी दस्ते ने इस संपूर्ण आपराधिक नेटवर्क की मुख्य कड़ियों को जोड़ते हुए महाराष्ट्र के लातूर स्थित प्रसिद्ध ‘आरसीसी कोचिंग संस्थान’ के संचालक और मुख्य सूत्रधार शिवराज मोटेगांवकर को विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद केंद्रीय एजेंसी द्वारा आरोपी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत के भीतर जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए कड़े तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल फॉरेंसिक विलेखों और गहन पूछताछ की प्राथमिक आवश्यकताओं को न्यायसंगत मानते हुए अदालत ने आरोपी शिवराज मोटेगांवकर को 9 दिनों की विस्तारित सीबीआई हिरासत (रिमांड) में भेजने का विधिक आदेश जारी कर दिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद देश के भीतर संचालित होने वाले मेडिकल कोचिंग सिंडिकेट्स और प्रश्नपत्र लीक करने वाले अंतर-राज्यीय गिरोहों के भीतर भारी हड़कंप और खौफ व्याप्त हो गया है।
एनटीए के पेपर पैनल सदस्य पीवी कुलकर्णी के साथ सांठगांठ का पर्दाफाश
सीबीआई मुख्यालय से संकलित किए गए तकनीकी इनपुट्स और केस डायरी के आधिकारिक विलेखों के अनुसार, इस पूरे प्रश्नपत्र लीक प्रक्रम का ताना-बाना राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आंतरिक विन्यासों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी ने विस्तृत तकनीकी अनुसंधान के आधार पर यह सनसनीखेज खुलासा किया है कि गिरफ्तार आरोपी शिवराज मोटेगांवकर की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के आधिकारिक पेपर पैनल में शामिल रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के व्याख्याता पीवी कुलकर्णी के साथ अत्यंत गहरी, निरंतर और संदेहास्पद निकटता संधारित थी।
यह संबंध महज एक सामान्य व्यावसायिक परिचय नहीं था, बल्कि इसके भीतर प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को भंग करने का एक बड़ा और संगठित आपराधिक ताना-बाना छिपा हुआ था। पीवी कुलकर्णी के पास एनटीए के कड़े नियमों के तहत परीक्षा से पूर्व गोपनीय रूप से प्रश्नपत्रों के विन्यास और प्रश्नों के चयन की विधिक जिम्मेदारी थी। इसी आंतरिक अवस्थिति का अनुचित लाभ उठाते हुए कतिपय गोपनीय संचिकाओं और डिजिटल डेटाबेस को लीक कर कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर तक ससमय प्रेषित किया गया था। सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा वर्तमान समय में दोनों आरोपियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के विवरणों और कतिपय डिजिटल वॉलेट प्रविष्टियों की गहन वैज्ञानिक जांच कर रही है ताकि इस भ्रष्ट सांठगांठ के पीछे छिपे करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय साम्राज्य को पूरी कड़ाई से ब्लॉक किया जा सके।
छापेमारी में मिला अकाट्य साक्ष्य: तीन मई को परीक्षा में आए प्रश्न पहले ही थे मौजूद
इस पूरे अंतर-राज्यीय रैकेट की रीढ़ को तोड़ने में सीबीआई को सबसे बड़ी और अकाट्य सफलता शिवराज मोटेगांवकर के आवासीय परिसरों और लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग संस्थान के मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय पर की गई सघन छापेमारी के दौरान मिली। जांच दल द्वारा संधारित किए गए सर्च ऑपरेशन के विलेखों के अनुसार, वहां से रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) का एक अत्यंत विशिष्ट और गोपनीय ‘प्रश्न बैंक’ (क्वेश्चन बैंक) भौतिक रूप से बरामद किया गया। फॉरेंसिक लैब और विषय विशेषज्ञों की एक विशेष टीम द्वारा जब इस बरामद प्रश्न बैंक का बारीकी से मिलान किया गया, तो जांच अधिकारी भी हतप्रभ रह गए।
इस प्रश्न बैंक के भीतर हूबहू वही विशिष्ट प्रश्न, उनके ऑप्शंस और तकनीकी विन्यास पहले से ही मुद्रित संधारित पाए गए, जो राष्ट्रीय स्तर पर तीन मई को आयोजित की गई मुख्य नीट-यूजी प्रवेश परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र में पूछे गए थे। परीक्षा आयोजन की तिथि से पूर्व ही इस प्रकार के शत-प्रतिशत सटीक प्रश्नों का कोचिंग संस्थान के पास उपलब्ध होना इस बात का अकाट्य और विधिक साक्ष्य है कि परीक्षा की शुचिता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। इस वैज्ञानिक और प्रामाणिक सबूत के पटल पर आते ही सीबीआई ने आरोपी को हिरासत में लेकर विधिक गिरफ्तारी की प्रविष्टि को मुकम्मल किया, क्योंकि यह साक्ष्य अदालत के समक्ष आरोपी को अधिकतम सजा दिलाने के लिए सबसे मुख्य आधार स्तंभ साबित होने जा रहा है।
नौ शाखाओं का वृहद् व्यावसायिक ग्रिड और अंतर-राज्यीय नेटवर्क की कड़ियां
जांच प्रणालियों के विस्तार की समीक्षा करने पर यह तथ्य उभरकर सामने आता है कि शिवराज मोटेगांवकर द्वारा संचालित ‘आरसीसी कोचिंग संस्थान’ का व्यावसायिक दायरा अत्यंत विशाल और संगठित है। वर्तमान समय में इस संस्थान की महाराष्ट्र सहित विभिन्न प्रक्षेत्रों में कुल नौ बड़ी और सर्वसुविधासुसज्जित शाखाएं लाइव संधारित हैं, जिनका मुख्य प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र लातूर में अवस्थित है। इस विशाल नेटवर्क के कारण हजारों छात्र इस संस्थान से जुड़े हुए थे, जिसका फायदा उठाकर मेधावी और संपन्न छात्रों को चिन्हित करने का प्रक्रम सुगमता से चलाया जाता था।
सीबीआई की बहुआयामी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस लीक कांड के तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों से जुड़ते जा रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा अब तक इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दस बड़े और कुख्यात आरोपियों को विधिक रूप से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे संधारित किया जा चुका है। इस अंतर-राज्यीय रैकेट की कड़ियां मुख्य रूप से देश के निम्नलिखित प्रमुख शहरों और शैक्षणिक हबों के भीतर कड़ाई से फैली हुई थीं:
- दिल्ली और गुरुग्राम प्रक्षेत्र: जहां से दिल्ली की विशेष अदालतों और दलालों के मुख्य सिंडिकेट को संचालित किया जा रहा था।
- जयपुर और राजस्थान अंचल: जहां कतिपय परीक्षा केंद्रों के प्रबंधकों और तकनीकी सहायकों की मिलीभगत के इनपुट्स प्राप्त हुए हैं।
- नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर: महाराष्ट्र के ये चार मुख्य जिले इस पूरे रैकेट के मुख्य कार्यात्मक और परिचालन केंद्र (ऑपरेशनल हब्स) बने हुए थे, जहां से प्रश्नपत्रों की कॉपियों को डिजिटल माध्यमों से सर्कुलेट किया गया।
विशेष गुप्त कक्षाओं का मोडस ऑपेरंडी और बिचौलियों का रणनीतिक चक्रव्यूह
सीबीआई के आला नीति-नियोजकों ने इस पूरे गिरोह की कार्यशैली यानी ‘मोडस ऑपेरंडी’ का पर्दाफाश करते हुए बताया कि परीक्षा से ठीक पूर्व रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) के मूल प्रश्नपत्र पूरी तरह से लीक हो चुके थे। इन लीक पेपर्स का व्यावसायिक दोहन करने के लिए आरोपियों ने एक अत्यंत शातिर और गुप्त प्रणालियों का विन्यास तैयार किया था। इस नेटवर्क के भीतर सक्रिय बिचौलियों और दलालों का मुख्य काम ऐसे संपन्न विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से संपर्क साधना था, जो मेडिकल सीटों के लिए लाखों रुपये की मोटी रकम देने के लिए तैयार संधारित थे।
इन चिन्हित विद्यार्थियों को आम छात्रों की नजरों से बचाकर कतिपय गुप्त स्थानों पर आयोजित होने वाली ‘विशेष कक्षाओं’ (स्पेशल सीक्रेट क्लासेस) के भीतर भेजा जाता था। इन गुप्त कमरों के भीतर परीक्षा से एक-दो दिन पूर्व ही नीट परीक्षा में आने वाले वास्तविक प्रश्नों को न केवल पहले से विस्तार से रटाया और समझाया जाता था, बल्कि उनकी उत्तर कुंजियों को पूरी तरह कंठस्थ कराने का कड़ा अभ्यास कराया जाता था। सीबीआई ने उन मुख्य बिचौलियों को भी अलग-अलग छापों के माध्यम से गिरफ्तार कर लिया है, जो छात्रों को इन गुप्त पाठशालाओं तक पहुंचाने वाले मुख्य कैरियर और एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। आगामी 9 दिनों की रिमांड अवधि के दौरान सीबीआई आरोपी मोटेगांवकर को आमने-सामने बिठाकर उन सभी रसूखदार अभिभावकों और अन्य बड़े कोचिंग मठाधीशों के चेहरों को बेनकाब करने की प्रविधि में जुटी है, जिन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की शुचिता को पूरी तरह कलंकित किया है।


