अपनी ही सरकार पर भड़के जीतन राम मांझी, विधायक ज्योति देवी पर हमले को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप; दारोगा को बताया ‘एंटी शेड्यूल कास्ट’

गया, 18 मई 2026: बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अपनी ही सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। बाराचट्टी विधायक ज्योति देवी पर हुए कथित हमले को लेकर मांझी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और मोहनपुर थाना के दारोगा को “एंटी शेड्यूल कास्ट मानसिकता” वाला बता दिया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि आठ दिनों के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी और संबंधित दारोगा पर कार्रवाई नहीं हुई तो एनडीए में रहते हुए भी कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला बोल रहा है, वहीं एनडीए के भीतर भी असहज स्थिति बनती दिखाई दे रही है। क्योंकि जिस सरकार का हिस्सा जीतन राम मांझी हैं, उसी के प्रशासनिक तंत्र पर उन्होंने खुलकर सवाल उठाए हैं।

दरअसल, मामला गया जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि बाराचट्टी विधायक ज्योति देवी शनिवार की शाम एक सामाजिक कार्यक्रम से लौट रही थीं। इसी दौरान सिंगल लेन सड़क पर सामने से आ रही एक गाड़ी को हटाने को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ लोगों ने विधायक के वाहन को घेर लिया।

विधायक ज्योति देवी का आरोप है कि लगभग 20 लोगों की भीड़ ने उनके वाहन को रोक लिया और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और वाहन का शीशा तोड़ने की कोशिश की गई। घटना के बाद विधायक की शिकायत पर मोहनपुर थाना में सात नामजद और करीब 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।

इस घटना के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बेहद कड़े तेवर अपनाए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विधायक ज्योति देवी पर हमला हुआ हो। उनके मुताबिक इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन ने कभी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की।

मांझी ने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर डीजीपी से लेकर डीएम तक बात की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिसकर्मियों की मानसिकता ठीक नहीं है और वे यह स्वीकार नहीं कर पा रहे कि एक सामान्य गृहिणी विधायक बनकर क्षेत्र का नेतृत्व कर रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने मोहनपुर थाना के दारोगा को लेकर तीखी टिप्पणी की और कहा कि उसकी सोच अनुसूचित जाति विरोधी है।

केंद्रीय मंत्री ने पुलिस पर सुरक्षा देने में लापरवाही का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कोई विधायक एक थाना क्षेत्र से दूसरे थाना क्षेत्र में प्रवेश करता है तो सामान्य प्रक्रिया के तहत सुरक्षा स्कॉट दिया जाता है। उनके अनुसार, बाराचट्टी थाना की ओर से विधायक को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन मोहनपुर थाना को सूचना देने के बावजूद वहां से सहयोग नहीं मिला।

मांझी ने दावा किया कि जब विधायक की ओर से मोहनपुर थाना से संपर्क किया गया तो थानेदार ने कथित तौर पर यह कह दिया कि पुलिस वाहन में तेल नहीं है, इसलिए स्कॉट उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। मांझी ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि समय पर सुरक्षा उपलब्ध होती तो घटना टाली जा सकती थी।

उन्होंने यह भी कहा कि घटना के तुरंत बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन यदि पुलिस चाहती तो आरोपियों को उसी समय गिरफ्तार किया जा सकता था। मांझी के अनुसार, अब तक गिरफ्तारी नहीं होना यह दर्शाता है कि पुलिस की तरफ से जानबूझकर ढिलाई बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी का फायदा उठाकर आरोपी बिहार छोड़कर भाग सकते हैं।

मांझी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आठ दिनों के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और संबंधित दारोगा पर कार्रवाई नहीं की गई तो उनकी पार्टी सड़क पर उतरने को मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि हम पार्टी के अध्यक्ष को भी इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए के भीतर रहते हुए इस तरह का सार्वजनिक बयान सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। खासकर तब, जब मामला कानून-व्यवस्था और अनुसूचित जाति से जुड़े संवेदनशील आरोपों से जुड़ा हो।

इधर, घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तनाव बना हुआ है। विधायक समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों की पहचान करने के लिए स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल के आसपास की जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे मामले ने बिहार में वीआईपी सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और जातीय संवेदनशीलता जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। विपक्षी दल भी अब इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि जब सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही है तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इसी बीच जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन में मिले सर्वोच्च सम्मान को लेकर भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है कि भारत के प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। मांझी ने प्रधानमंत्री को विश्व का प्रभावशाली नेता बताते हुए कहा कि भारत की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।

फिलहाल गया की यह घटना बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और मांझी की चेतावनी के बाद सरकार किस तरह स्थिति को संभालती है।

  • ये भी पढ़े..

    टेंडर घोटाले और BPSC परीक्षा पर जन सुराज का हमला, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग; कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…

    गयाजी, राजगीर और नालंदा को मिलेगा नया पर्यटन स्वरूप, अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं और बड़े निवेश की तैयारी तेज

    Share Add as a preferred…