
भागलपुर, 18 मई 2026। भागलपुर जिले के सुदूर और भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम प्रक्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण सामाजिक-आर्थिक विकास, नागरिक सशक्तिकरण और उनकी अनूठी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के उद्देश्य से एक वृहद् प्रशासनिक महाअभियान की विधिवत शुरुआत की गई है। भागलपुर समाहरणालय परिसर में अवस्थित समीक्षा भवन के मुख्य सभागार में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह के भीतर जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर “सबसे दूर, सबसे पहले” की कल्याणकारी थीम पर आधारित “जनजातीय गरिमा उत्सव” अंतर्गत व्यापक जनभागीदारी अभियान का विधिक शंखनाद किया गया।
जिला जन-सम्पर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 1701 के विलेखों के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी जन-अभियान आज 18 मई से प्रारंभ होकर आगामी 25 मई 2026 तक जिले के सभी चिन्हित जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों, टोलों और पगडंडियों पर पूरी कड़ाई और प्रशासनिक मुस्तैदी के साथ संचालित किया जाएगा ताकि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सके।
पीरपैंती, सन्हौला और कहलगांव के 62 गांवों में सघन शिविरों का सांगठनिक खाका
इस सात दिवसीय विशेष अभियान की जमीनी पहुंच को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भागलपुर के तीन प्रमुख प्रखंडों के जनजातीय बहुल इलाकों की सूक्ष्म मैपिंग की गई है। इस प्रशासनिक वर्गीकरण के विलेखों के अनुसार, जिले के कुल 62 जनजातीय बाहुल्य ग्रामों को इस महाअभियान के मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में संधारित किया गया है। इन क्षेत्रों में विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों की सीधी देखरेख में विशेष संतृप्ति (सैचुरेशन) शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
इस भौगोलिक विन्यास के अंतर्गत आने वाले मुख्य क्षेत्रों की कड़ियां इस प्रकार हैं:
- पीरपैंती प्रखंड: इस प्रक्षेत्र के भीतर अभियान का दायरा सबसे विस्तृत है, जिसके तहत कुल 22 पंचायतों में फैले 42 चिन्हित जनजातीय गांवों को शामिल किया गया है।
- सन्हौला प्रखंड: सन्हौला के ग्रामीण अंचलों में सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए 7 पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 19 जनजातीय बहुल गांवों में शिविरों का संजाल बिछाया जाएगा।
- कहलगांव प्रखंड: कहलगांव के अंतर्गत 1 पंचायत के 1 चिन्हित गांव में इस विशेष कल्याणकारी प्रविधि को कड़ाई से धरातल पर उतारा जाएगा।
इन सभी 62 गांवों में आयोजित होने वाले विशेष शिविरों की सबसे बड़ी प्रशासनिक विशेषता यह होगी कि विभिन्न विकासात्मक और विधिक विभागों द्वारा अपने-अपने समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां जनजातीय समुदाय के नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर काटे बिना एक ही छत के नीचे ऑन-द-स्पॉट सरकारी सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ संधारित कराया जाएगा।
आधार सत्यापन से लेकर आयुष्मान और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का ऑन-द-स्पॉट विन्यास
”जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के दौरान लक्षित जनजातीय आबादी को डिजिटल गवर्नेंस और सामाजिक सुरक्षा के कड़े चक्रव्यूह से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण नागरिक सेवाओं का एकीकरण किया गया है। शिविरों के भीतर विभिन्न काउंटर पूरी मुस्तैदी से काम करेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित योजनाओं का शत-प्रतिशत आच्छादन सुनिश्चित करना है:
- पहचान और दस्तावेज प्रणालियां: जनजातीय समाज के जिन नागरिकों के पास अब तक विधिक पहचान दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए नए आधार कार्ड बनाने तथा पुराने कार्डों में तकनीकी त्रुटियों के सुधार की त्वरित प्रविधि संचालित की जाएगी।
- स्वास्थ्य सुरक्षा और आयुष्मान भारत: गंभीर और जटिल बीमारियों के मुफ्त इलाज के लिए पात्र परिवारों के ‘आयुष्मान भारत कार्ड’ का निर्माण डिजिटल सर्विलांस के माध्यम से मौके पर ही पूरा किया जाएगा।
- नेगा जॉब कार्ड और ग्रामीण रोजगार: स्थानीय स्तर पर आजीविका के संबल को सुदृढ़ करने के लिए नए मनरेगा जॉब कार्डों का वितरण किया जाएगा और इच्छुक श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
- कृषि और शैक्षणिक संवर्धन: किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किसान सम्मान निधि योजना के लंबित विलेखों का निपटारा होगा, साथ ही जनजातीय युवाओं को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत वित्तीय ऋणों के आवेदनों की ऑन-स्पॉट प्रविष्टि की जाएगी।
इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अतिरिक्त, दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष मेडिकल कैंपों (स्वास्थ्य जांच शिविर) का भी सांगठनिक आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के विशेषज्ञ डॉक्टरों, महिला रोग विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों की टीमें अत्याधुनिक जीवन रक्षक औषधियों के साथ मुस्तैद रहेंगी, जो जनजातीय समुदाय के लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच करेंगी और आवश्यक दवाएं मुफ्त हस्तगत कराएंगी।
विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचेगा इंफ्रास्ट्रक्चर
समीक्षा भवन के मुख्य मंच से उपस्थित अधिकारियों और प्रमंडलीय प्रबंधकों को कड़े निर्देश जारी करते हुए जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित यह गरिमा उत्सव केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े देश के मूल जनजातीय लोगों तक उनके विधिक अधिकार, सम्मान और मूलभूत मानवीय सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक अत्यंत अनिवार्य और युगांतरकारी पहल है। उन्होंने रेखांकित किया कि “सबसे दूर, सबसे पहले” थीम की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब प्रशासनिक अमला खुद चलकर उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचेगा, जहां भौगोलिक जटिलताओं के कारण अब तक विकास योजनाओं का लाभ आंशिक या सीमित रूप से ही पहुंच पाया है।
जिलाधिकारी ने भारत सरकार द्वारा विकसित भारत के संकल्पों को धरातल पर उतारने का रोडमैप साझा करते हुए बताया कि इन दुर्गम और आंशिक रूप से पिछड़े जनजातीय प्रक्षेत्रों के आर्थिक पुनरुत्थान के लिए बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। इसके तहत निम्नलिखित छह मुख्य स्तंभों पर विशेष प्रशासनिक फोकस किया गया है:
- सड़क और परिवहन संपर्कता: सुदूर टोलों को मुख्य राष्ट्रीय व प्रादेशिक राजमार्गों से जोड़ने के लिए पक्की सड़कों का संरेखण।
- पेयजल की उपलब्धता: हर घर नल का जल योजना के तहत शुद्ध और आर्सेनिक मुक्त पेयजल ग्रिड की स्थापना।
- स्वास्थ्य अवसंरचना: ग्रामीण इलाकों में उप-स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण और एम्बुलेंस सेवाओं की सुगमता।
- दूरसंचार और डिजिटल ग्रिड: मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए टेलीकॉम टावरों का विन्यास।
- बिजली और ऊर्जा आत्मनिर्भरता: निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ सौर ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- आवास सुरक्षा: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कच्चे मकानों को पक्के विन्यासों में तब्दील करने की विधिक कार्रवाई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान के सफल संचालन हेतु जिले के सभी संबंधित विभागों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को लिखित विलेखों के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। विभिन्न शिविरों में योग्य लाभुकों को चिन्हित कर योजनाओं से शत-प्रतिशत आच्छादित करने के साथ-साथ जनजातीय समुदाय के भीतर उनके कानूनी अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने का कार्य भी पूरी कड़ाई से संचालित किया जाएगा।
समस्याओं के त्वरित निष्पादन के लिए जनसुनवाई शिविर और अधिकारियों की ‘सामुदायिक यात्रा’
इस पूरे महाअभियान की एक सबसे बड़ी प्रशासनिक खूबी यह है कि इसे पूरी तरह से दोतरफा संवाद और लोक शिकायत निवारण का एक सशक्त जरिया बनाया गया है। उत्सव के दौरान सभी 62 गांवों में विशेष ‘जनसुनवाई कार्यक्रमों’ का सांगठनिक आयोजन किया जाएगा, जहां जनजातीय समाज के लोग बिना किसी प्रशासनिक भय के अपनी स्थानीय समस्याओं, भूमि संबंधी विवादों, राजस्व विसंगतियों और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आवेदन सीधे अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। जिलाधिकारी ने आदेश दिया है कि इन जनसुनवाई में प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार कर उनका त्वरित और समयबद्ध निष्पादन (स्पीडी डिस्पोजल) सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ जनजातीय समाज की अनूठी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक विधाओं, लोक गीतों और गौरवशाली धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर भी व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों का ताना-बाना बुना गया है। इन शिविरों के सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से जनजातीय गौरव और स्वाधीनता संग्राम के प्रतीक महापुरुषों के प्रेरक जीवन, उनके संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान से स्थानीय युवाओं और बच्चों को विस्तार से अवगत कराया जाएगा ताकि नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली जड़ों से विधिक रूप से जुड़ सके।
अभियान के रणनीतिक कैलेंडर के अनुसार, आगामी 20 मई 2026 की तिथि इस पूरे उत्सव की सबसे मुख्य और ऐतिहासिक कड़ी साबित होने जा रही है। इस दिन जिले के तमाम आला प्रशासनिक पदाधिकारियों, अंचलाधिकारियों, पुलिस कप्तानों, विकासात्मक कर्मियों और स्वयंसेवी सहयोगियों द्वारा सभी 62 जनजातीय ग्रामों में एक साथ ‘सामुदायिक यात्रा’ (कम्युनिटी टूर) का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस विशेष यात्रा के दौरान अधिकारी स्वयं ग्रामीण टोलों में पैदल मार्च करेंगे, आदिवासियों के घरों और चौपालों पर बैठकर उनसे सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित करेंगे। इस जमीनी विमर्श का मुख्य ध्येय ग्रामीणों की वास्तविक समस्याओं की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त कर ऑन-द-स्पॉट समाधान का विलेख तैयार करना है। जिला जन-सम्पर्क कार्यालय के संयुक्त निदेशक ने अपील की है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज के सभी जागरूक नागरिक इस गरिमा उत्सव को सफल बनाने में अपना सक्रिय प्रशासनिक सहयोग प्रदान करें।


