​बिहार में डिजिटल क्रांति: फार्मर रजिस्ट्री के दूसरे चरण में 74 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण, भूमि सुधार और कृषि विभाग को अभियान तेज करने का निर्देश

पटना, 18 मई 2026। बिहार के कृषि विन्यास को पूरी तरह से पारदर्शी, आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा संचालित फार्मर रजिस्ट्री अभियान को नए वित्तीय वर्ष में तीव्र गति दी जा रही है। बिहार के कृषि एवं राजस्व भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित कृषि पर क्षेत्रीय सम्मेलन के लिए प्रस्थान करने से पूर्व पटना में इस महाअभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के दूसरे चरण के तहत चलाए जा रहे वर्तमान मिशन मोड में 12 मई से लेकर 18 मई 2026 तक की संक्षिप्त अवधि के भीतर ही राज्य के 74,434 किसानों का विधिक पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस प्रारंभिक सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने विभागीय अधिकारियों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले समन्वयकों से इस पंजीकरण प्रक्रिया की गति को और अधिक बढ़ाने तथा तय समय-सीमा के भीतर निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने का कड़ा आह्वान किया है।

कृषि और राजस्व भूमि सुधार विभाग के बीच मजबूत समन्वय की प्रविधि अनिवार्य

​इस डिजिटल रजिस्ट्री अभियान की सफलता और इसकी धरातलीय कड़ियों को स्पष्ट करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि किसानों का यह डेटाबेस तैयार करने में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा कृषि विभाग की सांगठनिक भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोनों ही प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारियों, जिला कृषि पदाधिकारियों और अंचलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे पूर्व के अभियानों की भांति ही आपसी तालमेल और उत्साह के साथ इस प्रक्रम को अंजाम दें।

​प्रशासनिक विलेखों के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्री का सीधा संबंध किसान की भूमि के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और परिमार्जन (भूमि रिकॉर्ड्स में सुधार) की विधा से जुड़ा हुआ है। जब तक किसी किसान के भू-स्वामित्व के रिकॉर्ड्स पूरी तरह से स्पष्ट और त्रुटिहीन नहीं होंगे, तब तक उसकी फार्मर आईडी निर्मित करने की प्रविधि में तकनीकी बाधाएं आती रहेंगी। इसी विसंगति को दूर करने के लिए दोनों विभागों के स्थानीय अधिकारियों को संयुक्त रूप से शिविर लगाकर मैपिंग और डेटा सत्यापन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर संधारित करने को कहा गया है ताकि किसी भी वास्तविक किसान को पंजीकरण से वंचित न होना पड़े।

पिछले चरणों के ऐतिहासिक आंकड़े: 48 लाख से अधिक कृषकों को मिली फार्मर आईडी

​बिहार में किसानों के इस विशाल डिजिटल डेटाबेस के निर्माण के ऐतिहासिक सफर और अब तक हासिल किए गए मील के पत्थरों की कड़ियों को आंकड़ों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है। विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का दायित्व संभालते समय उन्होंने जनवरी माह में ही इस दूरगामी अभियान की विधिक नींव रख दी थी। राज्य में अभी तक तीन अलग-अलग मिशन मोड अभियानों के जरिए कुल 48 लाख 57 हजार किसानों की विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार कराई जा चुकी है। पिछले चरणों की बिंदुवार प्रगति इस प्रकार रही है:

  • प्रथम मिशन मोड अभियान: जनवरी माह में 6 जनवरी से 11 जनवरी के बीच चलाए गए पहले विशेष अभियान के दौरान दोनों विभागों ने तत्परता दिखाते हुए रिकॉर्ड 10 लाख 14 हजार 981 किसानों की फार्मर आईडी सफलतापूर्वक सृजित की थी।
  • द्वितीय मिशन मोड अभियान: इसी माह के उत्तरार्ध में 17 जनवरी से 21 जनवरी के बीच संचालित दूसरे चरण के तहत कुल 7 लाख 15 हजार 96 कृषकों को इस डिजिटल ग्रिड से विधिक रूप से जोड़ा गया।
  • तृतीय मिशन मोड अभियान: फरवरी माह की शुरुआत में 2 फरवरी से 11 फरवरी के बीच चलाए गए तीसरे व्यापक अभियान के दौरान तंत्र ने अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए 10 लाख 37 हजार 283 नई फार्मर आईडी तैयार करने में बड़ी सफलता हासिल की।

​वर्तमान समय में 12 मई 2026 से शुरू हुए नए चरण के विलेखों के तहत अब तक 74,434 किसानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसे मई और जून के अंत तक एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

केंद्रीय अनुदान की प्राप्ति और 1000 करोड़ रुपये से अधिक की विधिक सहायता का खाका

​इस डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री को मिशन मोड में पूरा करने का एक बहुत बड़ा आर्थिक और ढांचागत कोण केंद्र सरकार से मिलने वाली भारी-भरकम वित्तीय सहायता से भी जुड़ा हुआ है। विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना जैसी वृहद् योजनाओं के अंतर्गत देश के किसानों को विभिन्न प्रकार के कृषि इनपुट्स, उपकरणों और तकनीकी संवर्द्धन के लिए सीधे अनुदान (सब्सिडी) मुहैया कराई जाती है।

​केंद्र सरकार के नए नीतिगत विलेखों के अनुसार, भविष्य में सभी प्रकार के केंद्रीय कृषि अनुदानों का हस्तांतरण केवल उन्हीं राज्यों को सुगमता से किया जाएगा जिनके पास अपने किसानों का प्रामाणिक डिजिटल रजिस्ट्री डेटाबेस उपलब्ध होगा। बिहार सरकार ने आगामी मई-जून 2026 तक राज्य के कुल 86.36 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया है। यदि राज्य इस निर्धारित लक्ष्य को पूरी कड़ाई के साथ समय पर प्राप्त कर लेता है, तो भारत सरकार की ओर से बिहार के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त विशेष सहायता राशि विधिक रूप से प्राप्त हो सकेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिलेगा।

पारदर्शिता बढ़ने से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम, जमीन विवाद और मुकदमों में आएगी कमी

​डिजिटल रजिस्ट्री के सामाजिक और विधिक विभावों पर चर्चा करते हुए कृषि मंत्री ने इसके बहुआयामी लाभों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था के पूरी तरह से धरातल पर उतरने के बाद कृषि क्षेत्र में व्याप्त बिचौलियों की कड़ियों को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सकेगा। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली अनुदान राशि सीधे और ससमय वास्तविक किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगी, जिससे प्रणालियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर पूरी कड़ाई से लगाम लगेगी।

​इसके अतिरिक्त, इस रजिस्ट्री का सबसे बड़ा अवदान बिहार की सबसे जटिल समस्या यानी भूमि विवादों के समाधान में देखने को मिलेगा। चूंकि फार्मर आईडी का निर्माण आधार कार्ड और भूमि के म्यूटेशन रिकॉर्ड्स के पूर्ण डिजिटल मिलान के उपरांत ही संभव है, इसलिए कोई भी फर्जी व्यक्ति किसी दूसरे की जमीन पर कृषि लाभ का दावा नहीं कर सकेगा। इससे गांवों के भीतर होने वाले जमीनी संघर्षों, धोखाधड़ी की प्रवृत्तियों और न्यायालयों में लंबित रहने वाले दीवानी मुकदमों की संख्या में भारी कमी दर्ज की जाएगी, जिससे ग्रामीण समाज में शांति और सुरक्षा का माहौल सुदृढ़ होगा।

भुवनेश्वर में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन और केंद्रीय नेतृत्व का आभार

​कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित होने वाले कृषि पर क्षेत्रीय सम्मेलन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में बिहार का पक्ष रखने और प्रक्षेप के विकास पर नीतिगत चर्चा के लिए आमंत्रित करने हेतु भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया।

​इस क्षेत्रीय सम्मेलन की अवस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मेजबान ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ-साथ बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी भारत के प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्रियों और शीर्ष नीतिगत प्रशासनिक कप्तानों को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के भीतर पूर्वी भारत की कृषि उत्पादकता को बढ़ाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना, बीज प्रतिस्थापन दर में सुधार और फार्मर रजिस्ट्री जैसी डिजिटल प्रणालियों के अंतर-राजकीय एकीकरण पर गंभीर विमर्श होना तय है, जिसमें बिहार अपने अब तक के उत्कृष्ट प्रदर्शन के विलेखों को साझा करेगा।

मुख्यमंत्री के ‘सहयोग शिविर’ से मिलेगा म्यूटेशन और परिमार्जन के कार्यों को संबल

​राज्य के भीतर जनसमस्याओं के निवारण के लिए विकसित की जा रही नई प्रशासनिक प्रणालियों का जिक्र करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शुरू किए जा रहे नए कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता की समस्याओं के अंबार से सीधे निजात दिलाने के लिए सोमवार और शुक्रवार को ‘जनता दरबार’ लगाने की एक ऐतिहासिक और सराहनीय शुरुआत की थी, जिसने नागरिकों को अपनी बात सीधे शासन तक पहुंचाने का एक मजबूत मंच दिया।

​उसी लोक-कल्याणकारी परंपरा को और अधिक व्यापक और आधुनिक स्वरूप देते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा प्रत्येक मंगलवार को “सहयोग शिविर” कार्यक्रम की भव्य शुरूआत 19 मई से की जा रही है। विजय कुमार सिन्हा ने उम्मीद जताई कि प्रत्येक 15 दिनों पर नियमित रूप से आयोजित होने वाले इन सहयोग शिविरों के भीतर किसानों के भूमि परिमार्जन, त्रुटिहीन म्यूटेशन और केसीसी (KCC) से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्रशासनिक प्राथमिकता दी जाएगी। जब इन शिविरों के माध्यम से जमीन के कागजात ऑन-स्पॉट दुरुस्त होंगे, तो स्वतः ही फार्मर रजिस्ट्री के कार्य को एक अप्रत्याशित और तीव्र गति प्राप्त होगी, जिससे पीएम किसान सम्मान निधि जैसी सभी कल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह से पारदर्शी और सुगम हो जाएंगी।

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