​गया में विधायक ज्योति देवी के काफिले पर हमला: अंगरक्षकों को पीटा, वाहन का शीशा तोड़ने का प्रयास, 20 उपद्रवियों पर प्राथमिकी

गया/मोहनपुर, 18 मई 2026। बिहार के गया जिले के अंतर्गत आने वाले मोहनपुर थाना क्षेत्र के गंभीरा गांव के प्रक्षेत्र में रविवार की शाम कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती देने वाली एक बेहद संवेदनशील वारदात घटित हुई है। बाराचट्टी विधानसभा क्षेत्र की विधायक ज्योति देवी के सुरक्षा काफिले पर स्थानीय असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों ने संगठित रूप से प्रहार किया है। इस हिंसक झड़प के दौरान न केवल विधायक के सरकारी अंगरक्षकों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई, बल्कि उनके आधिकारिक वाहन को चारों तरफ से घेरकर उसके शीशे तोड़ने का भी दुस्साहसिक प्रयास किया गया।

​घटना के समय प्रक्षेत्र में भारी अफरा-तफरी और तीव्र सामाजिक तनाव का माहौल कायम हो गया। उल्लेखनीय है कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की वरिष्ठ नेता और विधायक ज्योति देवी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की समधन हैं, जिसके कारण इस घटना की गूंज राज्य के नीति-नियंत्रकों और शीर्ष पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गई है। विधायक द्वारा मोहनपुर पुलिस थाने में दी गई विधिक तहरीर के आधार पर स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात नामजद आरोपियों सहित कुल 20 उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत नियमित प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

एकल लेन सड़क पर वाहन हटाने की विधा को लेकर उपजा खूनी संघर्ष

​इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों और विलेखों के अनुसार, विधायक ज्योति देवी रविवार की शाम बुमुआर पंचायत के अंतर्गत आने वाले गंभीरा गांव में ‘आदर्शी समाज’ नामक एक स्थानीय सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने जा रही थीं। उनका काफिला जैसे ही गंभीरा गांव के संपर्क मार्ग पर पहुंचा, वहां की भौगोलिक अवस्थिति एकल लेन (सिंगल लेन) सड़क की थी, जहां दोनों तरफ से वाहनों का एक साथ गुजरना अत्यंत कठिन था।

​इसी दौरान सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच विपरीत दिशा से आ रही एक सवारी गाड़ी के कारण विधायक का वाहन रुक गया। इस सवारी वाहन का पंजीकरण संख्या BR02M-2542 बताया गया है। वीवीआईपी मार्ग को अवरुद्ध देखकर विधायक की सुरक्षा में तैनात सरकारी अंगरक्षकों ने गाड़ी से नीचे उतरकर उक्त सवारी वाहन के चालक और उसमें सवार लोगों से कड़ाई के साथ वाहन को थोड़ा पीछे करने या किनारे लगाने का विधिक अनुरोध किया ताकि विधायक की गाड़ी को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।

​सुरक्षा बलों का यह अनुरोध सुनते ही सवारी गाड़ी पर सवार असामाजिक तत्व अचानक उग्र हो गए और उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेते हुए सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी वैचारिक बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते इस बहस ने एक हिंसक और अनियंत्रित उपद्रव का रूप ले लिया। वाहन में सवार और आसपास मौजूद लगभग 20 लोगों की उग्र भीड़ ने विधायक के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया। उपद्रवियों का दुस्साहस इतना बढ़ चुका था कि उन्होंने वाहन पर पत्थरों और लाठियों से प्रहार कर उसके घने शीशे (विंडशील्ड) को तोड़ने का पूरा प्रयास किया, जिससे वाहन के भीतर बैठी महिला जनप्रतिनिधि की सुरक्षा पूरी तरह से खतरे में पड़ गई।

अंगरक्षकों धीरज व सूरज की पिटाई और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग

​घटना के समय मुख्य मंडप और सड़क पर स्थिति तब और ज्यादा भयावह हो गई जब उपद्रवियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए विधायक के निजी अंगरक्षकों— धीरज कुमार और सूरज कुमार पर सामूहिक रूप से धावा बोल दिया। अपराधियों ने इन दोनों वर्दीधारी लोक सेवकों के साथ बर्बरतापूर्वक धक्का-मुक्की की और उन्हें लात-घूंसों से पीटना शुरू कर देया। अपने सुरक्षा कर्मियों को लहूलुहान होते देख और स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख जब विधायक ज्योति देवी स्वयं मामले को शांत कराने और बीच-बचाव करने के उद्देश्य से वाहन से नीचे उतरीं, तो उपद्रवियों ने उनके पद और विधिक गरिमा का भी सम्मान नहीं किया।

​विधायक ने पुलिस को दिए गए अपने आधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि उग्र भीड़ ने उनके साथ घोर अभद्र व्यवहार किया, उनके कपड़े खींचे और उनके साथ सरेआम धक्का-मुक्की व गाली-गलौज की गई। सबसे गंभीर विधिक विसंगति यह रही कि हमलावरों ने विधायक के सामने उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से अत्यंत आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का खुलकर प्रयोग किया, जो विधिक रूप से एक गैर-जमानती और संगीन अपराध की श्रेणी में आता है। विधायक ने बताया कि यदि सही समय पर गंभीरा गांव के प्रबुद्ध स्थानीय ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता घटना स्थल पर एकत्र होकर बीच-बचाव नहीं करते, तो असामाजिक तत्व उनके और उनके सुरक्षा कर्मियों के साथ किसी बहुत बड़ी और अप्रत्याशित अप्रिय वारदात को धरातल पर अंजाम दे सकते थे। स्थानीय ग्रामीणों के कड़े प्रतिरोध के कारण ही विधायक को सुरक्षित घेरे से बाहर निकाला जा सका।

पुलिस एस्कॉर्ट की विसंगति और सुरक्षा तंत्र की शिथिलता पर गंभीर सवाल

​इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और जनप्रतिनिधि पर हुए हमले ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की सुरक्षा रणनीति और अंतर-थाना समन्वय प्रणालियों की पोल खोलकर रख दी है। विधायक ज्योति देवी ने इस संदर्भ में एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जब वे मोहनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित इस सामाजिक समारोह में भाग लेने जा रही थीं, तब मोहनपुर पुलिस की कोई भी एस्कॉर्ट (सुरक्षा पायलट) टीम उनके साथ मौजूद नहीं थी। नियमतः बाराचट्टी थाने की पुलिस टीम उनके काफिले को एस्कॉर्ट करते हुए मोहनपुर थाना क्षेत्र की भौगोलिक सीमा तक लेकर आई और सीमांत बिंदु पर छोड़कर वापस अपने प्रक्षेत्र में लौट गई।

​इसी विधिक और सुरक्षात्मक शून्य (वैक्यूम) का फायदा उठाकर गंभीरा गांव की ओर जाने वाले रास्ते में अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया। जब विधायक का काफिला उग्र लोगों से पूरी तरह घिर गया, तो उनके तकनीकी स्टाफ ने तत्काल इसकी सूचना मोबाइल फोन के माध्यम से मोहनपुर और बाराचट्टी दोनों थानों की पुलिस को दी। सूचना मिलते ही, एस्कॉर्ट ड्यूटी पूरी कर वापस लौट रही बाराचट्टी पुलिस की टीम तत्परता दिखाते हुए तुरंत यू-टर्न लेकर वापस घटना स्थल पर पहुंच गई।

​इसके थोड़ी देर बाद मोहनपुर थाने की पुलिस भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। हालांकि, पुलिस के भारी वाहनों की आहट पाते ही सवारी गाड़ी संख्या BR02M-2542 पर सवार सभी मुख्य नामजद अभियुक्त और उनके अज्ञात सहयोगी भीड़ का फायदा उठाकर ग्रामीण पगडंडियों के रास्ते भागने में पूरी तरह सफल रहे। विधायक ने इस प्रशासनिक ढिलाई पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए जिला पुलिस मुख्यालय को याद दिलाया कि पूर्व में आम चुनाव के दौरान भी उन पर कतिपय जानलेवा हमले किए गए थे, जिसके बावजूद उनके सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर स्थानीय थानों द्वारा इतनी बड़ी मानवीय और तकनीकी लापरवाही बरती गई।

मोहनपुर थाने में सात नामजद सहित 20 उपद्रवियों पर नियमित केस दर्ज

​घटना की विभीषिका के शांत होने के बाद, मोहनपुर थाने की पुलिस टीम ने विधायक और उनके दोनों घायल सुरक्षा कर्मियों धीरज कुमार व सूरज कुमार को अपनी विधिक सुरक्षा में लिया और उन्हें सुरक्षित गंतव्य की ओर अग्रसारित किया। इसके उपरांत, विधायक ज्योति देवी की लिखित तहरीर और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों के आधार पर मोहनपुर पुलिस ने त्वरित विधा के तहत सात मुख्य आरोपियों को नामजद करते हुए कुल 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

प्राथमिकी में दर्ज नामजद अभियुक्तों और उनके गांवों का भौगोलिक विवरण:

  • लालमाटी गांव के निवासी: पलटू यादव, दीपक यादव और सुनील यादव।
  • लाडू गांव के निवासी: सीता यादव, कारू मालाकार, राहुल मालाकार और विक्रम ठाकुर।
  • अज्ञात आरोपी: इसके अतिरिक्त 13 अन्य अज्ञात स्थानीय ग्रामीणों और असामाजिक तत्वों को भी इस कांड में सह-अभियुक्त बनाया गया है।

​मोहनपुर के थानाध्यक्ष संजय कुमार ने प्राथमिकी दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि मामला एक सिटिंग विधायक और केंद्रीय मंत्री के परिवार से जुड़े होने के कारण पुलिस इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर रख रही है। विधायक पक्ष द्वारा दावा किया गया है कि पूरी घटना का एक स्पष्ट वीडियो फुटेज उनके पास उपलब्ध है, जिसे तकनीकी साक्ष्य के रूप में अनुसंधान टीम को सौंप दिया जाएगा।

​थानाध्यक्ष संजय कुमार ने आश्वस्त किया है कि इस वीडियो फुटेज का वैज्ञानिक और सांगठनिक विश्लेषण कर उन 13 अज्ञात चेहरों की भी विधिक पहचान स्थापित की जा रही है जिन्होंने सरकारी लोक सेवकों पर लाठियों से प्रहार किया था। पुलिस की कई विशेष टीमें लालमाटी, लाडू और गंभीरा गांव के संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं ताकि फरार चल रहे सभी सात नामजद अभियुक्तों को अविलंब गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। इधर, राजगीर और गयाजी के सामाजिक संगठनों व स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए एक महिला विधायक के साथ किए गए इस दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है और दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर कड़क दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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