भारत-नीदरलैंड रिश्तों को मिला नया आयाम, पीएम मोदी की यात्रा में रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार पर बने बड़े समझौते

एम्स्टर्डम/नई दिल्ली। बदलते वैश्विक समीकरणों और बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए उन्हें रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने कुल 17 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर कर सहयोग को और मजबूत बनाने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच भारत और नीदरलैंड की यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत और नीदरलैंड केवल व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता और तकनीकी विकास के साझा भागीदार बनना चाहते हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी रोडमैप लॉन्च किया, जिसके तहत आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में गहरा सहयोग देखने को मिलेगा।

बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दा रही। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और कहा कि इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को लेकर दोनों देशों ने चिंता व्यक्त की। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता माना जाता है।

भारत और नीदरलैंड दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेताओं ने किसी भी तरह के प्रतिबंधात्मक कदम का विरोध करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए समुद्री स्थिरता बेहद जरूरी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी दोनों देशों के नेताओं ने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटन ने कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता और बातचीत तथा कूटनीति के जरिए ही स्थायी शांति का रास्ता निकाला जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि व्यापार और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हुए समझौते माने जा रहे हैं। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

ग्रीन एनर्जी सेक्टर को लेकर भी कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। भारत और नीदरलैंड ने ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपमेंट रोडमैप लॉन्च किया। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा क्षेत्र का बड़ा विकल्प बन सकता है और इसमें भारत-नीदरलैंड साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर मॉडल पर काम करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी फायदा होगा।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में सहयोग को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया। दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और चिप निर्माण सप्लाई चेन को मजबूत करने पर सहमति जताई। डच Semicon Competence Centre को भारतीय Semiconductor Mission से जोड़ने की पहल का स्वागत किया गया। माना जा रहा है कि इससे भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी आएगी।

व्यापारिक आंकड़ों की बात करें तो नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक प्रमुख आर्थिक साझेदार बन चुका है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि रॉटरडैम पोर्ट भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। भारत से यूरोप जाने वाले बड़े हिस्से का व्यापार इसी बंदरगाह के जरिए संचालित होता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी का सीधा असर यूरोपीय बाजारों तक भारत की पहुंच पर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौता भी महत्वपूर्ण माना गया। इस समझौते से भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और प्रोफेशनल्स को नीदरलैंड में पढ़ाई और रोजगार के अधिक अवसर मिलने की संभावना है। दोनों देशों ने स्किल डेवलपमेंट और टैलेंट एक्सचेंज को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई।

आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशों ने सख्त रुख अपनाया। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ भारत को पूरा समर्थन देने की बात कही। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने और दोहरे मापदंडों का विरोध करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि पिछले एक दशक में भारत और नीदरलैंड के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्य, नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था और वैश्विक जिम्मेदारी जैसी कई समानताएं हैं।

मोदी ने कहा कि नीदरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की युवा शक्ति तथा तेज विकास क्षमता मिलकर भविष्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर नई मिसाल पेश करेगी।

राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और नई आर्थिक साझेदारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत और नीदरलैंड के बीच हुई यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और वैश्विक कूटनीति के कई नए रास्ते खोल सकती है। दुनिया में बदलते हालात के बीच दोनों देशों का यह सहयोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ताकत के रूप में देखा जा रहा है।

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