​इश्क का खूनी अंत: साली की हत्या कर जीजा ने खुद को भी उड़ाया, यूपी-बिहार सीमा पर मची सनसनी

कुशीनगर/गोपालगंज। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थाना क्षेत्र में बुधवार की सुबह एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात हुई, जिसने दो परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए मातम में बदल दिया। गोपालगंज के उचकागांव का रहने वाला एक युवक अपने ससुराल पहुँचता है और वहां अपनी ही 18 वर्षीया साली की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को भी मौत के घाट उतार लेता है। बंद कमरे से निकली गोलियों की गूँज ने न केवल बसडीला बुजुर्ग गांव को दहला दिया, बल्कि सरहद पार बिहार के गोपालगंज में भी सन्नाटा पसर गया है। इस दोहरे हत्याकांड के पीछे प्रेम प्रसंग की पेचीदा कहानी और जुनून की इंतहा बताई जा रही है। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर तफ्तीश शुरू कर दी है, लेकिन इस खूनी मंजर ने पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।

रिश्तों की मर्यादा पर भारी पड़ा सिरफिरा जुनून

​वारदात की जड़ें दो साल पहले शुरू हुए एक रिश्ते से जुड़ी हैं। जानकारी के अनुसार, बिहार के गोपालगंज जिला अंतर्गत उचकागांव थाना क्षेत्र के धरमपुर गांव निवासी रघुनाथ प्रजापति का 25 वर्षीय पुत्र जीतेंद्र प्रजापति अक्सर अपनी ससुराल आता-जाता रहता था। जीतेंद्र की शादी करीब दो साल पहले कुशीनगर के बसडीला बुजुर्ग गांव निवासी शंभू प्रजापति की बड़ी बेटी बेबी के साथ हुई थी। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन वक्त के साथ रिश्तों की डोर उलझने लगी।

​ग्रामीणों और परिजनों के बीच दबी जुबान में चर्चा है कि जीतेंद्र अपनी साली नैना प्रजापति (18 वर्ष) के प्रति आकर्षित था। शादीशुदा होने के बावजूद साली के प्रति उसका यह झुकाव धीरे-धीरे एक सनक में तब्दील हो गया। बेबी और जीतेंद्र के वैवाहिक जीवन में शायद इसी वजह से खटास आने लगी थी। जीतेंद्र का अपनी ससुराल में बार-बार आना और घंटों रुकना, कहीं न कहीं इसी प्रेम प्रसंग की ओर इशारा कर रहा था, जिसे परिवार के लोग भांप नहीं पाए या मर्यादा के चलते चुप रहे।

मंगलवार की शाम और कयामत की सुबह

​वारदात से ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार की शाम जीतेंद्र अपनी ससुराल बसडीला बुजुर्ग पहुँचा था। घर के लोगों के लिए वह दामाद था, इसलिए उसका स्वागत हमेशा की तरह सामान्य रूप से किया गया। रात में सभी ने साथ बैठकर भोजन किया और जीतेंद्र सोने के लिए घर की छत पर बने कमरे में चला गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह रात उस घर के लिए आखिरी सुकून भरी रात होने वाली है।

​बुधवार की सुबह करीब 9 बजे, जब घर के बाकी लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, 18 वर्षीया नैना अपने जीजा जीतेंद्र को नाश्ता या खाना देने के लिए छत वाले कमरे में गई। चश्मदीदों और परिजनों के अनुसार, जैसे ही नैना कमरे के पास पहुँची, जीतेंद्र ने उसे खींचकर कमरे के अंदर कर लिया और फौरन दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। नैना को शायद संभलने का मौका भी नहीं मिला होगा। कुछ ही पलों के बाद कमरे के भीतर से चीखने और फिर अचानक दो गोलियां चलने की आवाजें आईं।

बंद दरवाजा और फर्श पर पसरा खून

​गोलियों की आवाज सुनते ही घर में कोहराम मच गया। शंभू प्रजापति और अन्य परिजन भागकर छत पर पहुँचे और कमरे का दरवाजा पीटने लगे। अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही थी। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी इकट्ठा हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत तमकुहीराज पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुँची पुलिस ने जब काफी मशक्कत के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नजारा देख सबकी रूह कांप गई।

​कमरे के फर्श पर नैना और जीतेंद्र दोनों के शव खून से लथपथ पड़े थे। जीतेंद्र ने पहले अपनी साली नैना को बेहद करीब से गोली मारी और फिर उसी हथियार से अपनी जीवनलीला भी समाप्त कर ली। कमरे में चारों तरफ खून फैला हुआ था और पास में ही वह पिस्तौल पड़ी थी, जिससे इस वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस के अनुसार, दोनों की मौत मौके पर ही हो चुकी थी। घटनास्थल की स्थिति को देखकर यह साफ था कि जीतेंद्र पूरी तैयारी के साथ आया था और उसने योजनाबद्ध तरीके से इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

इलाके में दहशत और पुलिस की तफ्तीश

​इस दोहरे हत्याकांड के बाद कुशीनगर और गोपालगंज के सीमावर्ती इलाकों में भारी तनाव और दहशत का माहौल है। शंभू प्रजापति के घर में चीख-पुकार मची है। एक तरफ उनकी छोटी बेटी की लाश थी, जिसे उन्होंने बड़े लाड़-प्यार से पाला था और दूसरी तरफ वह दामाद था जिसे उन्होंने अपने घर का हिस्सा माना था। बेबी, जिसकी शादी जीतेंद्र से हुई थी, वह इस सदमे से बेसुध है।

​पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस इस बिंदु पर गहराई से जांच कर रही है कि जीतेंद्र के पास हथियार कहाँ से आया और क्या उसने पहले नैना पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों में कोई विवाद हुआ था या जीतेंद्र ने पहले भी नैना को कोई धमकी दी थी।

प्रेम प्रसंग या एकतरफा सनक?

​प्रारंभिक जांच में इसे प्रेम प्रसंग का मामला माना जा रहा है, लेकिन गांव के कुछ लोगों का मानना है कि यह एकतरफा सनक भी हो सकती है। संभव है कि नैना ने अपने जीजा के गलत इरादों का विरोध किया हो, जिसके बाद जीतेंद्र ने उसे रास्ते से हटाने और खुद को खत्म करने का फैसला कर लिया। समाज में रिश्तों की पवित्रता पर इस घटना ने एक गहरा दाग लगा दिया है। गोपालगंज के धरमपुर गांव में भी लोग इस खबर से स्तब्ध हैं, जहाँ जीतेंद्र का परिवार रहता है। वहां के लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि उनके गांव का एक युवक पड़ोसी राज्य में जाकर ऐसी वारदात कर सकता है।

​फिलहाल, पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि गोलियां कितनी दूरी से और किस समय चलाई गईं। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जीतेंद्र ने इसे बिहार से खरीदा था या यूपी में किसी से हासिल किया था। सरहद के दोनों तरफ की पुलिस अब इस मामले के हर पहलू को जोड़ने में लगी है ताकि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके और इस खूनी साजिश के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

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