
डेहरी (रोहतास)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड के शांत परिवेश में बुधवार की शाम मौत की एक ऐसी चीख गूंजी, जिसने आसपास के पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। डेहरी के पाली पुल के समीप एक मालगाड़ी के नीचे आकर एक युवक और एक अज्ञात युवती ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। लोहे की पटरियों पर लहूलुहान पड़े शवों ने न केवल पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी, बल्कि यह गुत्थी भी उलझा दी कि आखिर एक खुशहाल परिवार का सदस्य और एक रहस्यमयी युवती एक साथ मौत के इस भयावह मोड़ पर कैसे पहुँचे? मृतक युवक की पहचान करवंदिया थाना क्षेत्र के घटमापुर निवासी सुभाष के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का इकलौता सहारा था। वहीं, उसके साथ जान देने वाली युवती की पहचान अभी भी एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। इस हृदयविदारक घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार की नींव हिला दी है और पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जो इस आत्मघाती कदम के पीछे की असली वजह हो सकती हैं।
पाली पुल के पास खूनी मंजर: चश्मदीदों की रूह कांप गई
बुधवार की शाम जब सूरज ढल रहा था और रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही सामान्य थी, तभी जो नजारा दिखा उसने चश्मदीदों के होश उड़ा दिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड के पाली पुल के पास एक तेज रफ्तार मालगाड़ी गुजर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक युवक और एक युवती अचानक पटरियों के बीच आ गए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या ट्रेन का ड्राइवर आपातकालीन ब्रेक लगाता, भारी-भरकम पहियों ने दोनों की सांसों की डोर काट दी।
मालगाड़ी के गुजरने के बाद वहां केवल सन्नाटा और बिखरे हुए अवशेष बचे थे। घटना की भयावहता देख आसपास के ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुँचे और तुरंत डालमियानगर पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जब जांच शुरू की, तो युवक की जेब से मिले दस्तावेजों के आधार पर उसकी पहचान 29 वर्षीय सुभाष के रूप में हुई। सुभाष करवंदिया थाना क्षेत्र के घटमापुर गांव के रहने वाले लालमोहन सिंह का पुत्र था। वह पेशे से कोल्ड ड्रिंक्स का व्यवसाय करता था और इलाके में एक मेहनती युवक के रूप में जाना जाता था।
परिवार का इकलौता चिराग बुझा, पीछे छूट गया मासूमों का रोना
सुभाष की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव घटमापुर पहुँची, वहां कोहराम मच गया। घर के इकलौते बेटे की ऐसी मौत पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था। सुभाष के पिता लालमोहन सिंह और अन्य परिजन बदहवास हालत में डेहरी पहुँचे। परिजनों ने पुलिस को बताया कि सुभाष मानसिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ था और उसके व्यवसाय में भी ऐसी कोई बड़ी अड़चन नहीं थी कि वह इतना बड़ा कदम उठा ले।
सुभाष अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गया है। वह अपने माता-पिता का अकेला बेटा था, जिस पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। उसकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि उसके दो मासूम बच्चे—एक पुत्र और एक पुत्री—इस बात से अनजान हैं कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। परिजनों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुभाष उस अज्ञात युवती के साथ पाली पुल तक कैसे पहुँचा और दोनों ने साथ मिलकर आत्महत्या जैसा कठोर निर्णय क्यों लिया? परिजनों का कहना है कि उन्होंने उस युवती को पहले कभी नहीं देखा था और न ही सुभाष ने कभी उसके बारे में कोई चर्चा की थी।
रहस्यमयी युवती: जिसकी पहचान के लिए भटक रही पुलिस
इस पूरी घटना में सबसे बड़ी गुत्थी वह युवती है जिसने सुभाष के साथ जान दी। पुलिस ने युवती के शव की तलाशी ली, लेकिन उसके पास से कोई भी ऐसा पहचान पत्र, मोबाइल फोन या दस्तावेज नहीं मिला जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। युवती की उम्र करीब 20 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डालमियानगर पुलिस ने आसपास के थानों को युवती की तस्वीर साझा की है और हाल के दिनों में हुई युवतियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली जा रही है।
स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। कुछ लोग इसे प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि इसके पीछे कोई और गहरा राज हो सकता है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या दोनों ने एक साथ घर से भागने की योजना बनाई थी या फिर यह किसी तात्कालिक विवाद का परिणाम है। अज्ञात युवती की पहचान न होना पुलिस के लिए जांच को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है। जब तक युवती की पहचान नहीं होती, तब तक सुभाष और उसके संबंधों की सच्चाई सामने आना मुश्किल है।
पुलिसिया कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया
घटनास्थल पर मौजूद डालमियानगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। शवों की स्थिति काफी क्षत-विक्षत थी, जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद पटरियों से हटाया गया। पुलिस ने कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेज दिया है।
थानाध्यक्ष के अनुसार, पुलिस ने सुभाष के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स (CDR) निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि मोबाइल की लोकेशन और आखिरी बार हुई बातचीत से कुछ सुराग मिल सकेंगे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सुभाष बुधवार की दोपहर घर से किस बहाने निकला था और वह युवती उसे कहाँ मिली। क्या वे किसी वाहन से पाली पुल तक पहुँचे थे या पैदल ही वहां तक आए थे, इन सभी तकनीकी बिंदुओं पर जांच जारी है। आरपीएफ की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह पूरी तरह से आत्महत्या का ही मामला है या इसमें किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता तो नहीं।
गांव में पसरा सन्नाटा: रिश्तों और व्यापार के बीच उलझी कहानी
घटमापुर गांव में सुभाष की मौत के बाद हर आंख नम है। कोल्ड ड्रिंक के व्यवसाय के कारण सुभाष का संपर्क कई लोगों से था। उसके साथ काम करने वाले लोगों का कहना है कि वह काफी मिलनसार व्यक्ति था। बुधवार की सुबह तक वह सामान्य दिख रहा था, ऐसे में शाम को उसका शव पटरियों पर मिलना हर किसी के लिए अविश्वसनीय है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुभाष के पिता लालमोहन सिंह ने बड़ी उम्मीदों से अपने इकलौते बेटे का घर बसाया था। सुभाष का व्यापार भी धीरे-धीरे गति पकड़ रहा था। ऐसे में एक अज्ञात युवती के साथ उसका नाम जुड़ना और फिर मौत की आगोश में चले जाना, गांव के लोगों के लिए एक बड़ा रहस्य बन गया है। फिलहाल, सदर अस्पताल सासाराम में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुभाष का शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। वहीं, अज्ञात महिला के शव को पहचान के लिए 72 घंटों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई इस युवती के बारे में जानकारी रखता हो, तो तुरंत डालमियानगर थाने को सूचित करे। रेलखंड पर पटरियों के बीच बिखरे उन दो शवों ने पीछे कई सवाल छोड़ दिए हैं, जिनके जवाब अब पुलिस की फाइल और मोबाइल फोन की मेमोरी में छिपे हुए हैं।


