
पटना। बिहार के उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी और उम्मीदों भरी खबर है जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। राजधानी पटना का ज्ञान भवन आगामी 25 से 27 मई तक एक ऐसी ‘जॉब क्रांति’ का गवाह बनने जा रहा है, जहाँ केवल डिग्रियां नहीं जांची जाएंगी, बल्कि उन्हें सीधे नियुक्ति पत्र में बदलने का प्रयास किया जाएगा। बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने बिहार कौशल विकास मिशन के माध्यम से इस त्रि-दिवसीय भव्य ‘स्वास्थ्य एवं रोजगार मेले’ का खाका तैयार किया है। इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 20 हजार नियुक्तियों का लक्ष्य है, जो न केवल बिहार बल्कि देश की अग्रणी संस्थाओं में युवाओं को जगह दिलाएगा। बुधवार को इस योजना का खुलासा करते हुए विभागीय सचिव कौशल किशोर ने बताया कि यह आयोजन बिहार के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
ज्ञान भवन बनेगा उम्मीदों का केंद्र: 20 हजार नौकरियों का संकल्प
मई महीने की तपिश के बीच पटना के गांधी मैदान के बगल में स्थित ज्ञान भवन में खुशियों की ठंडी बयार बहने वाली है। 25, 26 और 27 मई को आयोजित होने वाले इस मेले में स्वास्थ्य जगत के दिग्गजों का जमावड़ा लगेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यहाँ केवल इंटरव्यू या फॉर्म भरने की औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि योग्य उम्मीदवारों को मौके पर ही रोजगार सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 20 हजार की यह संख्या बताती है कि सरकार का ध्यान अब उन क्षेत्रों पर है जहाँ कुशल मानव संसाधन की भारी कमी है। स्वास्थ्य क्षेत्र एक ऐसा ही विभाग है जहाँ तकनीक और मानवीय संवेदना का संगम होता है। सचिव कौशल किशोर ने बताया कि ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि सुदूर गांवों के योग्य युवा भी इस अवसर का लाभ उठाने से वंचित न रह जाएं।
10वीं पास से लेकर पीएचडी तक: सबके लिए खुला है आसमान
अक्सर रोजगार मेलों में केवल उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए ही अवसर देखे जाते हैं, लेकिन इस बार का यह महा-कुंभ हर शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति के लिए दरवाजे खोल रहा है। यदि आपने केवल 10वीं या 12वीं की है, तो आपके लिए जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (GDA) और होम अटेंडेंट जैसे पदों पर भर्ती के मौके हैं। वहीं, उच्च शिक्षित युवाओं के लिए भी यहाँ पर्याप्त अवसर हैं। इस मेले में शामिल होने के लिए निम्नलिखित शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवा पात्र होंगे:
- स्कूली शिक्षा: 10वीं और 12वीं पास।
- स्नातक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम: बीएससी, बीकॉम, बी.फार्मा, आईटीआई, और डिप्लोमा धारक।
- उच्च शिक्षा: मास्टर डिग्री, पीएचडी धारक, और नेट (NET) क्वालीफाई कर चुके युवा।
- नर्सिंग क्षेत्र: एएनएम (ANM) और जीएनएम (GNM) प्रशिक्षित अभ्यर्थी।
इस विविधता का उद्देश्य यह है कि कौशल विकास की किसी भी श्रेणी का युवा खुद को उपेक्षित महसूस न करे। सरकार का मानना है कि एक स्वास्थ्य संस्थान को चलाने के लिए डॉक्टर और नर्स के साथ-साथ एक कुशल सपोर्ट स्टाफ की भी उतनी ही जरूरत होती है।
देश के नामचीन संस्थानों की शिरकत: अपोलो से लेकर केयर फर्स्ट तक
इस रोजगार मेले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भाग लेने वाली संस्थाएं केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। अब तक सौ से भी अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। इनमें अपोलो हॉस्पिटल, फोर्ड हॉस्पिटल, एमजीएम कॉलेज, मेडीमिक्स हेल्थकेयर और केयर फर्स्ट जैसे नामचीन ब्रांड शामिल हैं। इन बड़े संस्थानों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि युवाओं को न केवल अच्छी सैलरी मिलेगी, बल्कि उन्हें एक पेशेवर कार्य-संस्कृति (Work Culture) में काम करने का अनुभव भी प्राप्त होगा।
विभागीय सचिव ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि बिहार के युवाओं की प्रतिभा अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी। कई ऐसी संस्थाएं भी इस मेले में आ रही हैं जो युवाओं को विदेशों में—जैसे खाड़ी देशों या यूरोपीय देशों में—नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नियुक्त करेंगी। यह बिहार के कौशल विकास मिशन की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है कि वैश्विक स्तर की कंपनियां यहाँ के प्रशिक्षित युवाओं पर भरोसा जता रही हैं।
भर्तियों का विविध दायरा: सेवा से लेकर उत्पादन तक
मेले में होने वाली नियुक्तियों को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वास्थ्य सेवा के इकोसिस्टम में कई अन्य कड़ियां भी शामिल हैं। मेले के दौरान मुख्य रूप से इन पदों पर भर्तियां की जाएंगी:
- नर्सिंग सेवा: एएनएम, जीएनएम और सीनियर नर्सिंग स्टाफ।
- पैरामेडिकल: जनरल ड्यूटी असिस्टेंट और लैब टेक्नीशियन।
- निर्माण एवं उत्पादन: दवा निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और प्रोडक्शन यूनिट्स के लिए तकनीकी कर्मियों की भर्ती।
- घरेलू देखभाल: होम अटेंडेंट, जो वृद्धों और मरीजों की घर पर देखभाल कर सकें।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कोरोना काल के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब केवल क्लीनिकल काम ही नहीं, बल्कि डेटा मैनेजमेंट और पेशेंट केयर मैनेजमेंट में भी बड़ी संख्या में युवाओं की जरूरत है, जिसे यह मेला पूरा करेगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया: डिजिटल गेटवे से मिलेगी एंट्री
युवाओं की सुविधा के लिए विभाग ने पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। मेले में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थी कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से अपना नामांकन कर सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल https://detjob.bihar.gov.in/registration पर जाकर बुनियादी जानकारी भरनी होगी। इसके अतिरिक्त, विभाग ने जगह-जगह क्यूआर कोड भी जारी किए हैं, जिन्हें स्कैन करते ही सीधे रजिस्ट्रेशन पेज खुल जाएगा।
तकनीकी रूप से कम दक्ष युवाओं के लिए विभाग ने एक टॉल फ्री नंबर 18002965656 भी जारी किया है, जहाँ कॉल करके मेले से जुड़ी किसी भी जानकारी या पंजीकरण में आ रही समस्या का समाधान पाया जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मेले के दिनों में भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी, लेकिन भीड़भाड़ से बचने के लिए पहले से ऑनलाइन आवेदन करना समझदारी होगी।
कौशल विकास मिशन का नया अध्याय
यह रोजगार मेला केवल नौकरी देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बिहार कौशल विकास मिशन के उन प्रयासों का नतीजा है जो पिछले कुछ वर्षों से जमीनी स्तर पर चल रहे हैं। युवाओं को ट्रेंड करना और फिर उन्हें बाजार की जरूरतों के अनुसार नियोजित करना एक बड़ी चुनौती रही है। कौशल किशोर ने बताया कि विभाग का लक्ष्य ‘लर्न टू अर्न’ (Learn to Earn) के सिद्धांत को चरितार्थ करना है। इस आयोजन की सफलता न केवल 20 हजार परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देगी, बल्कि राज्य की बेरोजगारी दर में भी सकारात्मक गिरावट लाएगी। प्रशासन ने गांधी मैदान और ज्ञान भवन के आसपास सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि हजारों की संख्या में पहुँचने वाले अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। युवाओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है जहाँ वे सीधे उद्योग जगत के दिग्गजों से संवाद कर सकते हैं और अपनी योग्यता का लोहा मनवा सकते हैं।


