​सड़क और पुल निर्माण में लापरवाही पर विभाग का कड़ा प्रहार: 8 संवेदक ब्लैकलिस्ट, जीरो टॉलरेंस की नीति से हिले भ्रष्ट ठेकेदार

पटना। बिहार के ग्रामीण अंचलों में आवागमन की सुगमता और मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। ग्रामीण कार्य विभाग ने भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को लेकर अब ‘हंटर’ चलाना शुरू कर दिया है। विभाग ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को धरातल पर उतारते हुए राज्य के आठ संवेदकों (ठेकेदारों) को ब्लैकलिस्ट करने का कड़ा फैसला लिया है। इन संवेदकों पर निर्माण कार्यों और सड़कों के पंचवर्षीय अनुरक्षण (Maintenance) में घोर लापरवाही बरतने का आरोप सिद्ध हुआ है। विभाग की इस सख्त कार्रवाई ने उन ठेकेदारों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो अब तक सरकारी परियोजनाओं को केवल मुनाफे का जरिया मानकर गुणवत्ता से समझौता करते आए थे। यह निर्णय बुधवार को विभागीय समीक्षा के उपरांत लिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में किसी भी प्रकार की शिथिलता अब भारी पड़ेगी।

गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर चार वर्षों का प्रतिबंध

​ग्रामीण कार्य विभाग ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति के तहत बनाए गए पथों की स्थिति का गहन निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई महत्वपूर्ण सड़कों की स्थिति निर्माण के कुछ समय बाद ही जर्जर हो गई है। सबसे अधिक लापरवाही ‘पंचवर्षीय अनुरक्षण’ यानी पांच सालों तक सड़कों के रखरखाव की शर्त में पाई गई। नियमों के अनुसार, सड़क निर्माण के बाद अगले पांच वर्षों तक उसकी मरम्मत और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी संवेदक की होती है, लेकिन कई ठेकेदार निर्माण कार्य पूरा करने के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

​विभागीय जांच में दोषी पाए गए कुल आठ संवेदकों में से चार को अगले चार वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया और बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विभाग ने माना कि अनुरक्षण कार्य में इस प्रकार की ढिलाई न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। चार वर्षों का प्रतिबंध लगने का अर्थ है कि ये संवेदक अब आगामी चार सालों तक राज्य की किसी भी निविदा (Tender) प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।

अधूरे कार्य और भ्रामक जानकारी पर तीन साल का बैन

​कार्रवाई की दूसरी श्रेणी में उन चार संवेदकों को रखा गया है जिन्हें अगले तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है। ये संवेदक मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना, बिहार ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति और ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहे थे। विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इन संवेदकों ने न केवल आवंटित कार्यों को अधूरा छोड़ा, बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने में अनावश्यक विलंब भी किया।

​सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ संवेदकों ने विभाग को गुमराह करने के लिए गलत और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई। कागजों पर काम की प्रगति कुछ और दिखाई गई, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी। विभागीय अधिकारियों ने जब भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो दावों की पोल खुल गई। विभाग ने इसे ‘जवाबदेही का घोर अभाव’ करार दिया है। तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद इन ठेकेदारों का व्यावसायिक साख पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भविष्य में इनकी बाजार में पकड़ कमजोर होना तय है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सड़कों का महत्व

​बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में ग्रामीण सड़कें केवल कोलतार का ढांचा नहीं होतीं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धमनी की तरह काम करती हैं। अगर सड़कें गुणवत्तापूर्ण नहीं होंगी, तो किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुँचाने में दिक्कत होगी, बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में समय लगेगा। विभाग की इस कार्रवाई के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो सड़कें बनाई जा रही हैं, वे कम से कम पांच से दस साल तक सुरक्षित रहें।

​समीक्षा बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि कुछ संवेदक कम दर पर निविदाएं तो ले लेते हैं, लेकिन काम शुरू करने के बाद वे सामग्री की गुणवत्ता घटा देते हैं ताकि अपना लाभ बढ़ा सकें। विभाग ने अब ऐसी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और रैंडम चेकिंग की व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है। ब्लैकलिस्ट करने की इस प्रक्रिया से अन्य सक्रिय संवेदकों को भी यह कड़ा संदेश दिया गया है कि वे अनुबंध की शर्तों का अक्षरशः पालन करें।

शिथिलता के विरुद्ध विभाग का संकल्प

​ग्रामीण कार्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बारहमासी संपर्कता’ (All-weather Connectivity) सुनिश्चित करने के लिए कृतसंकल्पित है। विभाग के पास अब उन सभी लंबित परियोजनाओं की सूची है जहाँ संवेदक काम रोककर बैठे हैं या तकनीकी गड़बड़ियों का बहाना बना रहे हैं। विभाग की नई नीति के अनुसार, अब केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थायी रूप से व्यवस्था को साफ करने के लिए काली सूची में डालना अनिवार्य हो गया है।

​विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी जो इन लापरवाह संवेदकों के बिलों का भुगतान बिना उचित जांच के करते हैं। ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री—जैसे गिट्टी, बालू, सीमेंट और छड़—की गुणवत्ता की जांच के लिए अब थर्ड पार्टी ऑडिट की सहायता ली जा रही है। अगर किसी पुल के निर्माण में स्ट्रक्चरल गड़बड़ी पाई जाती है, तो संवेदक के साथ-साथ संबंधित कनीय अभियंता और सहायक अभियंता पर भी गाज गिर सकती है।

पुल निर्माण में भी कोई ढिलाई नहीं

​सड़कों के साथ-साथ पुलों के निर्माण में भी विभाग ने गुणवत्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मानसून के मौसम में अक्सर ग्रामीण पुलों के बहने या धंसने की खबरें आती हैं, जो कहीं न कहीं निर्माण के समय बरती गई लापरवाही का परिणाम होती हैं। ब्लैकलिस्ट किए गए कुछ संवेदक पुल निर्माण की परियोजनाओं से भी जुड़े थे। विभाग अब उन सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) करा रहा है जिनका निर्माण पिछले तीन वर्षों के दौरान हुआ है।

​ग्रामीण कार्य विभाग का यह कदम बिहार में विकास कार्यों की ‘शुचिता’ बनाए रखने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की यह प्रक्रिया दर्शाती है कि शासन अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह धरातल पर बदलाव के लिए कड़े निर्णय लेने से भी नहीं हिचकिचाएगा। विभाग ने सभी जिलों के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के ब्लैकलिस्टेड संवेदकों की सूची सार्वजनिक करें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का नया कार्य न मिल सके।

संवेदकों के लिए चेतावनी और सुधार का अवसर

​विभाग की इस कार्रवाई ने एक ओर जहाँ दोषियों को सजा दी है, वहीं दूसरी ओर अन्य संवेदकों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी भी है। विभाग ने साफ कर दिया है कि जो ठेकेदार समय पर और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करेंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जा सकता है और उनके भुगतान में कोई देरी नहीं होगी। लेकिन जो व्यवस्था को ठगने की कोशिश करेंगे, उनका स्थान ‘ब्लैकलिस्ट’ की सूची में ही होगा।

​ग्रामीण इलाकों में आज भी कई ऐसी टोलियां हैं जहाँ बारहमासी सड़क नहीं पहुँच पाई है। इन टोलियों को मुख्य सड़कों से जोड़ना सरकार की ‘निश्चय’ योजनाओं का हिस्सा है। ऐसे में ठेकेदारों की शिथिलता राज्य के विकास की गति को बाधित करती है। विभाग के इस फैसले से आने वाले महीनों में लंबित परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि अब संवेदकों को पता है कि उनकी एक छोटी सी लापरवाही उनके पूरे व्यावसायिक करियर को खत्म कर सकती है। विभाग ने भविष्य में भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।

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