
पटना। बिहार के गांवों में शासन और प्रशासन की तस्वीर बदलने के लिए पंचायती राज विभाग ने अब ‘जवाबदेही’ को अपना मूल मंत्र बना लिया है। राज्य के सुदूर इलाकों से आने वाली जन-शिकायतों को लेकर विभाग का रुख अब पहले से कहीं अधिक कड़ा और परिणामोन्मुखी नजर आ रहा है। मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में विभाग के सचिव मनोज कुमार ने स्पष्ट कर दिया कि जनता की समस्याओं के निष्पादन में किसी भी स्तर पर होने वाली देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी शिकायत के निपटारे में अनावश्यक विलंब पाया गया, तो संबंधित पदाधिकारी को न केवल स्पष्टीकरण देना होगा, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें राज्य के सभी जिलों के उप-विकास आयुक्त (DDC) और जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO) सीधे तौर पर जुड़े रहे। इस दौरान ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाओं और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कई दूरगामी निर्णय लिए गए।
गंभीर शिकायतों पर तत्काल एक्शन: जवाबदेही की नई लकीर
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु जन-शिकायतों का निपटारा रहा। सचिव ने निर्देश दिया कि विभाग को प्राप्त होने वाली गंभीर प्रकृति की शिकायतों पर अब तुरंत जांच शुरू करनी होगी। केवल जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी भी मुख्यालय को उपलब्ध करानी होगी। अक्सर देखा जाता है कि पंचायतों में चल रही योजनाओं या प्रशासनिक कार्यों को लेकर आम लोग शिकायतें तो करते हैं, लेकिन वे जिला स्तर की फाइलों में दबकर रह जाती हैं।
अब इस ढर्रे को बदलते हुए ‘स्पष्टीकरण मॉडल’ लागू किया गया है। यदि किसी जिले में शिकायतों का अंबार लगा रहता है और उनका निष्पादन समय पर नहीं होता, तो जिला पंचायत राज पदाधिकारी और अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को इसका लिखित कारण बताना होगा। यह कदम सुशासन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे आम ग्रामीण को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी आवाज राजधानी तक सुनी जा रही है।
सोलर स्ट्रीट लाइट: उजाले की ओर बढ़ते पांच जिले
मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना की समीक्षा करते हुए बैठक में उत्साहजनक आंकड़े सामने आए। राज्य के पांच जिलों—किशनगंज, शिवहर, सीतामढ़ी, लखीसराय और बक्सर ने इस योजना में बाजी मार ली है। इन जिलों की हर पंचायत में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं। राज्य भर की बात करें तो अब तक कुल 11,02,706 सोलर लाइटें ग्रामीण सड़कों और चौराहों को रोशन कर रही हैं।
सचिव ने इन जिलों की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी इसी तर्ज पर काम पूरा करने का लक्ष्य दिया। हालांकि, केवल लाइट लगाना ही अंत नहीं है; सचिव ने इनके नियमित रख-रखाव (Maintenance) पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर शिकायतें आती हैं कि लाइट लगने के कुछ समय बाद तकनीकी खराबी के कारण बंद हो जाती हैं। इसके लिए एक मजबूत मेंटेनेंस नेटवर्क बनाने और पंचायतों को इसके प्रति सक्रिय करने का निर्देश दिया गया है ताकि सरकारी निवेश का लाभ जनता को लंबे समय तक मिलता रहे।
आधार सेवा केंद्र: कार्यपालक सहायकों के लिए ‘पास या फेल’ की चुनौती
डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए विभाग ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। पहले चरण में राज्य की 2000 ग्राम पंचायतों में ‘आधार सेवा केंद्र’ शुरू किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को अपने आधार कार्ड अपडेट कराने या नया बनवाने के लिए अब शहरों की दौड़ नहीं लगानी होगी।
हालांकि, इन केंद्रों के संचालन की कमान संभालने वाले कार्यपालक सहायकों के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं:
- अनिवार्य परीक्षा: सभी कार्यपालक सहायकों को यूआईडीएआई (UIDAI) द्वारा आयोजित आधिकारिक परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा।
- पंजीकरण का निर्देश: जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी सहायकों का इस परीक्षा के लिए पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।
- तीन मौके की नीति: यदि कोई कार्यपालक सहायक इस परीक्षा में तीन बार से अधिक अनुत्तीर्ण (Fail) होता है, तो विभाग उसे कार्य के अयोग्य मानेगा। ऐसे सहायकों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर बेल्ट्रॉन (Beltron) को वापस कर दी जाएगी।
यह निर्णय तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है ताकि आधार जैसी संवेदनशील सेवाओं में कोई मानवीय त्रुटि न हो।
स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर: ऑनलाइन यूसी मॉड्यूल से आएगी पारदर्शिता
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य उप-केंद्रों के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव ने उप-विकास आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से इन परियोजनाओं की निगरानी करें ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा हो सके। इसके साथ ही, सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया गया है।
अब किसी भी योजना का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate – UC) कागजों पर नहीं, बल्कि ई-पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन यूसी मॉड्यूल के माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित यह मॉड्यूल सुनिश्चित करेगा कि खर्च किए गए धन का हिसाब वास्तविक समय में मुख्यालय तक पहुँचे। इसके अतिरिक्त, 15वीं वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली निधियों के सदुपयोग, लंबित अदालती मामलों और ऑडिट (अंकेक्षण) कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। पंचायत सरकार भवनों के निर्माण की धीमी गति पर कुछ जिलों को फटकार भी लगाई गई और काम में तेजी लाने का अल्टीमेटम दिया गया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में नीतिगत निर्णयों को धरातल पर उतारने के लिए विभाग की पूरी कोर टीम मौजूद रही। निदेशक नवीन कुमार सिंह, अपर सचिव डॉक्टर आदित्य प्रकाश, नजर हुसैन और संयुक्त सचिव शम्स जावेद अंसारी ने विभिन्न प्रभागों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। विभाग के अन्य पदाधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे जिलों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें ताकि फाइलों का आवागमन डिजिटल माध्यम से तेज हो सके।
यह समीक्षा बैठक स्पष्ट करती है कि बिहार का पंचायती राज विभाग अब केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने की दिशा में अग्रसर है। आने वाले महीनों में 2000 आधार केंद्रों का संचालन और सोलर लाइटों का उचित रखरखाव विभाग की सफलता का असली पैमाना बनेगा।


