बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मियों की झोली में गिरा डीए का ‘बोनस’, एआई मिशन और नई पुलिसिंग से बदलेगी राज्य की तस्वीर

पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक ने राज्य के विकास और सरकारी कार्यबल की संतुष्टि के लिए कई ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगा दी है। नवविस्तारित कैबिनेट की इस पहली औपचारिक बैठक में कुल 19 महत्वपूर्ण एजेंडों को स्वीकृति दी गई, जो सीधे तौर पर राज्य की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक के भविष्य से जुड़े हैं। इस बैठक का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित आकर्षण सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में की गई बढ़ोतरी रही, जिससे करीब 10 लाख परिवारों के बजट में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि ये सभी बदलाव प्रशासनिक कार्यकुशलता और जनहित को केंद्र में रखकर किए गए हैं।

पेंशन और वेतन की नई चमक: महंगाई भत्ते का विस्तृत विवरण

​कैबिनेट ने राज्य कर्मियों के लिए महंगाई भत्ते की दरों में श्रेणीवार वृद्धि की है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होगी, जिससे कर्मचारियों को एरियर का लाभ भी प्राप्त होगा। सरकार ने अलग-अलग वेतनमान प्राप्त कर रहे कर्मियों के लिए अलग-अलग वृद्धि दरें निर्धारित की हैं, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:

वेतनमान की श्रेणी

वर्तमान दर (%)

नई दर (%)

कुल बढ़ोतरी

5वां वेतनमान

474%

483%

9%

6वां वेतनमान

257%

262%

5%

7वां वेतनमान

58%

60%

2%

इस निर्णय से न केवल सेवारत कर्मचारियों बल्कि पेंशनभोगियों को भी लाभ मिलेगा। सरकार के इस कदम को बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने की एक मजबूत कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

तकनीकी क्रांति: सिंगापुर के सहयोग से ‘बिहार एआई मिशन’ का आगाज

​बिहार को डिजिटल युग के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए कैबिनेट ने ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दी है। यह मिशन राज्य में तकनीक के आधुनिकतम प्रयोग और नवाचार को बढ़ावा देगा।

  • वैश्विक भागीदारी: इस मिशन के लिए सिंगापुर की विख्यात कंपनी ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (जीएफटीएन) का चयन नामांकन के आधार पर किया गया है।
  • उद्देश्य: राज्य में एक ऐसा एआई इकोसिस्टम तैयार करना, जहाँ अग्रणी संस्थान और उद्योग आपस में सहयोग कर सकें। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसेवाओं की डिलीवरी में अभूतपूर्व सुधार होने की संभावना है।

औद्योगिक गलियारा: वैशाली में एनआईएफटीईएम और बिहटा में डेयरी प्लांट

​राज्य में खाद्य प्रसंस्करण और औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए भूमि आवंटन और नए प्लांटों की स्थापना पर कैबिनेट ने उदारता दिखाई है।

  1. वैशाली में एनआईएफटीईएम: राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना के लिए वैशाली जिले के औद्योगिक क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन मुफ्त देने का निर्णय लिया गया है। यह संस्थान खाद्य तकनीक के क्षेत्र में बिहार को अग्रणी राज्य बनाएगा।
  2. बिहटा में डेयरी हब: पटना के बिहटा स्थित सिकंदरपुर औद्योगिक क्लस्टर में मेसर्स नीफ प्राइवेट लिमिटेड के डेयरी प्लांट की स्थापना को हरी झंडी मिली है। 97.17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट से 170 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
  3. नीति विस्तार: बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 की समय सीमा को बढ़ाकर अब 30 जून 2026 कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इस योजना का लाभ उठा सकें।

सुरक्षा का नया ढांचा: 5 जिलों में ‘ग्रामीण एसपी’ और सीआईएसएफ केंद्र

​कानून-व्यवस्था को और अधिक सूक्ष्म और प्रभावी बनाने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने पुलिसिंग के ढांचे में बदलाव किया है।

  • नए पद: पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पांच नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। इससे ग्रामीण इलाकों में अपराध नियंत्रण और पुलिस की पहुंच में तेजी आएगी।
  • सीआईएसएफ केंद्र: किशनगंज जिले के पोठिया अंचल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के प्रशिक्षण केंद्र के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को निःशुल्क भूमि हस्तांतरित की जाएगी।

शिक्षा और ग्रामीण विकास: महाविद्यालय विहीन प्रखंडों को सौगात

​’सात निश्चय-3′ के अंतर्गत सरकार ने शिक्षा की पहुंच हर घर तक करने का संकल्प लिया है।

  • डिग्री कॉलेज: राज्य के उन 3 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे जहाँ अब तक एक भी महाविद्यालय नहीं था। इनमें पश्चिम चंपारण का पिपरासी और भितहा तथा मुंगेर का टेटिया बम्बर प्रखंड शामिल है। इन कॉलेजों के संचालन के लिए कुल 132 शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों का सृजन किया गया है।
  • पशुपालन विकास: लखीसराय के चानन अंचल स्थित गोपालपुर में लगभग 80 एकड़ जमीन पशुपालन विभाग को ‘सिमेन स्टेशन’ की स्थापना के लिए मुफ्त दी गई है, जो राज्य में उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देगा।

आर्थिक प्रबंधन: 72 हजार करोड़ के ऋण की योजना

​राज्य की विकास योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्त विभाग के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 72,901 करोड़ रुपये के ऋण उगाहने की योजना बनाई है। इसमें से 64,141 करोड़ रुपये बाजार से कर्ज के रूप में लिए जाएंगे। यह राशि राज्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के वित्तपोषण में खर्च की जाएगी।

​कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्लस्टर विकास योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसे अब मध्यम उद्योगों (MSME) तक विस्तारित कर दिया है। इसके माध्यम से सामान्य सुविधा केंद्रों की स्थापना में तेजी आएगी। बुधवार की यह बैठक दर्शाती है कि सरकार अब केवल पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों और सूक्ष्म पुलिसिंग के माध्यम से बिहार के नवनिर्माण की दिशा में अग्रसर है।

​प्रेस वार्ता के अंत में अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इन सभी योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से किया जाएगा और मुख्यमंत्री स्वयं इसकी प्रगति की निगरानी करेंगे। सरकारी कर्मियों के लिए यह बुधवार खुशियों भरा रहा, तो वहीं बेरोजगार युवाओं के लिए डेयरी और शिक्षा क्षेत्र में पदों के सृजन ने नई उम्मीदें जगाई हैं।

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