
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के प्रशासनिक गलियारों में बुधवार को एक ऐसी वैचारिक और रणनीतिक हलचल देखने को मिली, जो आने वाले समय में जिले के हजारों युवाओं की तकदीर और तस्वीर बदल सकती है। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना और राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) जैसे बड़े फलक वाली योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन और बिहार कौशल विकास मिशन ने साझा मंच तैयार किया है। भागलपुर के समीक्षा भवन में आयोजित इस विशेष जागरूकता कार्यशाला का मुख्य स्वर ‘हुनर से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता’ रहा। जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत के दिग्गजों, कॉलेज प्राचार्यों और औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच एक ऐसा सेतु बनाने की कोशिश की गई, जिससे पढ़ा-लिखा युवा केवल डिग्रियां लेकर न घूमे, बल्कि उसके पास वह तकनीकी हाथ भी हो जो उसे बाजार की वर्तमान जरूरतों के अनुसार तत्काल रोजगार दिला सके।
नामांकन नहीं, गुणवत्तापूर्ण हुनर है असली लक्ष्य
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में शासन की मंशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि अक्सर सरकारी योजनाओं में आंकड़ों के पीछे भागने की होड़ लगी रहती है, लेकिन बिहार कौशल विकास मिशन के तहत हमारा उद्देश्य केवल बच्चों का नामांकन करना या रिकॉर्ड बुक में संख्या बढ़ाना नहीं है। असली चुनौती युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर उन्हें वास्तव में ‘रोजगार योग्य’ बनाना है। उन्होंने वहां मौजूद विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यों और इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों को उनका दायित्व याद दिलाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना होगा। उन्हें इंडस्ट्री की मांग को समझना होगा और उसी के अनुरूप छात्रों को तैयार करना होगा। बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उन्हें पूरी संवेदनशीलता के साथ पूरा करना होगा ताकि कोई भी प्रतिभावान युवा मार्गदर्शन के अभाव में पीछे न रह जाए।
‘सुई से विमान तक’ का फलसफा: हर काम की अपनी गरिमा
इस कार्यशाला का सबसे प्रभावी और प्रेरणादायी हिस्सा वह था जब जिलाधिकारी ने कौशल की महत्ता को एक अनोखे उदाहरण से समझाया। उन्होंने युवाओं और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में किसी भी कार्य को छोटा या बड़ा समझना सबसे बड़ी भूल है। डॉक्टर नवल किशोर चौधरी के अनुसार, “चाहे कोई सुई बनाने का कार्य हो या फिर एक विशाल विमान बनाने का तकनीकी काम, हर हुनर का अपना एक विशिष्ट महत्व है। सुई के काम को विमान बनाने का हुनर प्रतिस्थापित नहीं कर सकता और न ही विमान बनाने वाला सुई का काम कर सकता है।” यह दार्शनिक लेकिन व्यावहारिक बात इस संदेश के साथ कही गई कि युवाओं को हर क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बल दिया कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब हमारे पास हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल मौजूद हो। इसी सोच के साथ युवाओं को अलग-अलग प्रकार के कौशल प्रशिक्षणों से जोड़ने का आह्वान किया गया।
50 दिनों की ट्रेनिंग और आर्थिक संबल का वादा
योजनाओं के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर चर्चा करते हुए यह जानकारी साझा की गई कि सरकार केवल प्रशिक्षण ही नहीं दे रही, बल्कि प्रशिक्षण की अवधि के दौरान युवाओं के हाथ भी मजबूत कर रही है। भारत सरकार और बिहार सरकार के समन्वय से लगभग 50 दिनों की प्रशिक्षण अवधि के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, जो युवा विभिन्न संस्थानों में इंटर्नशिप करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यह आर्थिक मदद न केवल युवाओं को कौशल सीखने के लिए प्रेरित करेगी, बल्कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के छात्रों के लिए प्रशिक्षण के दौरान होने वाले खर्चों में भी सहायक सिद्ध होगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी युवा आर्थिक तंगी के कारण अपना कौशल निखारने से पीछे न हटे। व्यवहारिक अनुभव और तकनीकी दक्षता ही वह कुंजी है जो उन्हें वैश्विक बाजार में एक सफल पेशेवर के रूप में स्थापित करेगी।
इंडस्ट्री और एकेडेमिया का संगम: आत्मनिर्भर भागलपुर की नींव
समीक्षा भवन में आयोजित इस कार्यशाला में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि जिले के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि और विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य भी एक ही टेबल पर मौजूद रहे। इस संगम का उद्देश्य एक ऐसा ‘इकोसिस्टम’ तैयार करना है जहाँ कॉलेज से निकलने वाला छात्र सीधे इंडस्ट्री की जरूरतों से जुड़ सके। जिलाधिकारी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना और राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) के जरिए भागलपुर के उद्योगों को स्थानीय स्तर पर ही कुशल कामगार मिल सकेंगे, जिससे बाहर से मैनपावर मंगाने की जरूरत कम होगी। यह कदम जिले में रोजगार सृजन की नई दिशा तय करेगा और भागलपुर को कौशल विकास के क्षेत्र में एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित करेगा।
अधिकारियों और संस्थानों की सामूहिक सहभागिता
इस वृहद कार्यशाला की सफलता के लिए प्रशासनिक अमले ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) के एसीईओ हेमंत कुमार और मिशन प्रबंधक किशोर कुमार प्रसाद ने योजनाओं के क्रियान्वयन के रोडमैप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उप निदेशक (नियोजन) शंभु नाथ सुधाकर सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों ने छात्रों के मन में उठने वाली जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान किया। औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों ने भी प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट की संभावनाओं पर अपनी राय रखी। कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जिन्होंने मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि जिले के हर प्रखंड और हर पंचायत तक इन योजनाओं की जानकारी पहुँचाई जाएगी ताकि आत्मनिर्भर बिहार का सपना भागलपुर की धरती से साकार हो सके।
जिला प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की निगरानी और बढ़ाई जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों और भौतिक सत्यापन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण केंद्रों पर मिलने वाली सुविधाएं मानकों के अनुरूप हों। भागलपुर की यह कार्यशाला केवल एक दिन का आयोजन नहीं थी, बल्कि यह युवाओं के लिए एक ऐसे सफर की शुरुआत है जहाँ उनका हाथ और हुनर दोनों ही स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ेंगे। अब जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्री की है कि वे जिलाधिकारी के इस विजन को धरातल पर कितनी मजबूती से उतारते हैं।


