
पटना। बिहार के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े तकनीकी बदलाव की नींव रखी जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सरकारी योजनाओं की केवल फाइलों में समीक्षा नहीं होगी, बल्कि आधुनिकतम तकनीक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के जरिए उनकी जमीनी हकीकत का अनुश्रवण किया जाएगा। बुधवार को पटना के 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ सभागार में सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग (IPRD) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ का मंत्र दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दोटूक शब्दों में कहा कि सरकार जो काम कर रही है, उसकी जानकारी जनता तक न केवल सही ढंग से बल्कि बिजली की गति से पहुँचनी चाहिए। इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की सूचना प्रणाली और योजनाओं की मॉनिटरिंग में डेटा और तकनीक का बोलबाला होने वाला है।
एआई (AI) बनेगा योजनाओं का पहरेदार: हर जिले के लिए बनेगा अलग प्लान
बैठक का सबसे क्रांतिकारी पहलू मुख्यमंत्री द्वारा सभी विभागों को योजनाओं के अनुश्रवण (Monitoring) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने का निर्देश देना रहा। सम्राट चौधरी ने कहा कि आज के दौर में तकनीक की उपयोगिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और लीकेज रोकने के लिए एआई एक सशक्त माध्यम साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने केवल सचिवालय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बिहार के सभी 38 जिलों में एआई के प्रयोग के लिए जिलावार मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि दूर-दराज के गांवों में चल रही नल-जल योजना, सड़क निर्माण या स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का डेटा सीधे पटना स्थित मुख्यालय में उपलब्ध हो सके। एआई के उपयोग से न केवल डेटा का विश्लेषण आसान होगा, बल्कि यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी योजना किस क्षेत्र में पिछड़ रही है और उसे कैसे गति दी जा सकती है। यह कदम बिहार को डिजिटल गवर्नेंस के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
भ्रामक और तथ्यहीन खबरों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी
डिजिटल युग में सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत और उसके खतरों पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग को सख्त हिदायत दी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यदि कोई तथ्यहीन, भ्रामक या नकारात्मक खबर प्रसारित होती है, तो उसका तुरंत खंडन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केवल खंडन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभाग को पूरे तथ्यों और डेटा के साथ अपनी बात रखनी चाहिए ताकि जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो।
सरकार का मानना है कि कई बार विकास कार्यों को लेकर गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश की जाती है। इसे रोकने के लिए एक ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (QRT) की तरह सूचना तंत्र को काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों का फीडबैक, उनके सुझाव और उनकी शिकायतों पर सरकार की पैनी नजर होनी चाहिए। इसके लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के त्वरित निष्पादन की व्यवस्था करने को कहा गया है।
बिहार के गौरवशाली अतीत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ब्रांडिंग
समीक्षा के दौरान सम्राट चौधरी ने बिहार के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान की तरक्की का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है। बेहतर कानून व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ होने से राज्य में निवेश का माहौल बना है और छोटे-छोटे उद्योग भी लगने शुरू हुए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि बिहार की इन उपलब्धियों, नए बदलावों और यहाँ के समृद्ध हेरिटेज की जानकारी केवल राज्य तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के बाहर के लोगों को भी सुगमतापूर्वक मिले।
इसके लिए उन्होंने जिलावार रणनीति बनाने को कहा है। हर जिले की अपनी एक खासियत है, वहां के कुछ महत्वपूर्ण स्थल हैं और वहां विशिष्ट आधारभूत संरचनाएं मौजूद हैं। विभाग को निर्देश दिया गया है कि इन सभी खासियतों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार कर उसे विभिन्न संचार माध्यमों से प्रचारित किया जाए। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बिहार की एक सकारात्मक छवि देश-दुनिया में उभरेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार तेजी से तरक्की कर रहा है और इस तरक्की की कहानी को हर घर तक पहुँचाना सूचना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
विभागीय समीक्षा और भावी कार्ययोजना: सचिव ने दी विस्तृत जानकारी
समीक्षा बैठक की शुरुआत में सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (Presentation) के माध्यम से विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि विभाग वर्तमान में किन चुनौतियों का सामना कर रहा है और आने वाले समय में तकनीक को कैसे सूचना तंत्र का हिस्सा बनाया जाएगा। सचिव ने भावी कार्ययोजना का ब्योरा देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप विभाग अपनी प्रचार-प्रसार नीतियों में बदलाव कर रहा है और अब डिजिटल मीडिया पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ. गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह और सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के निदेशक अनिल कुमार सहित कई अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे। इन अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री ने योजनाओं की बारीकियों पर चर्चा की और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य दिया।
पारदर्शिता और जन-भागीदारी: विकास का नया मंत्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सरकार और जनता के बीच की दूरी कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों को यह पता नहीं चलेगा कि उनके लिए कौन सी योजना चल रही है और उसका लाभ कैसे लेना है, तब तक विकास का उद्देश्य अधूरा है। इसलिए सूचनाओं का प्रवाह ‘टू-वे’ होना चाहिए। एक तरफ सरकार अपनी बात पहुँचाए और दूसरी तरफ जनता अपनी बात सरकार तक रख सके।
एआई और आधुनिक सूचना तंत्र के माध्यम से सरकार अब एक ऐसे ‘फीडबैक लूप’ का निर्माण कर रही है जहाँ हर योजना की मॉनिटरिंग रियल-टाइम में हो सकेगी। इससे न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। मुख्यमंत्री की इस पहल से यह स्पष्ट है कि बिहार का सूचना तंत्र अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर अत्याधुनिक और उत्तरदायी बनने की ओर अग्रसर है। आने वाले दिनों में बिहार के सभी जिलों में एआई का प्रयोग और सोशल मीडिया पर सरकार की सक्रियता सुशासन की एक नई परिभाषा गढ़ेगी।
क्या बिहार का सूचना तंत्र मुख्यमंत्री की इन उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा? यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन बुधवार की इस बैठक ने बिहार के प्रशासनिक सुधारों में एक नया अध्याय जरूर जोड़ दिया है। अधिकारियों को अब केवल निर्देश नहीं मिले हैं, बल्कि उन्हें एक ऐसी तकनीक के साथ काम करने की चुनौती दी गई है जो भविष्य की है। सुशासन का यह नया मॉडल अब सीधे तकनीक की कसौटी पर होगा।


