
भागलपुर। जिले के प्रशासनिक गलियारों में बुधवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने विकास और व्यवस्था से जुड़ी दो महत्वपूर्ण कड़ियों—जनगणना और किसान पंजीकरण—की समीक्षा के लिए कमान संभाली। भागलपुर के समीक्षा भवन में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल प्रगति की रिपोर्ट नहीं ली गई, बल्कि काम की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को जवाबदेही की लक्ष्मण रेखा भी खींच दी गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने में डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन की भूमिका सर्वोपरि है और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु जमीन की जमाबंदी को आधार से जोड़कर किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करना और आगामी जनगणना के लिए मकानों की सूची तैयार करने के कार्य को गति देना रहा।
जनगणना कार्य में तेजी: मकान सूचीकरण पर विशेष नजर
जनगणना किसी भी राष्ट्र के नियोजन और विकास की बुनियादी सीढ़ी होती है। इसी महत्व को समझते हुए जिलाधिकारी ने मकान सूचीकरण (House Listing) के कार्य की प्रखंडवार गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ क्षेत्रों में कार्य की गति संतोषजनक नहीं है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया कि वे इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर लें।
उन्होंने निर्देश दिया कि जनगणना कार्य केवल निचले स्तर के कर्मियों के भरोसे न छोड़ा जाए, बल्कि प्रखंडों के वरीय पदाधिकारी स्वयं इसकी निगरानी करें। मकान सूचीकरण के दौरान डेटा की सटीकता पर विशेष जोर दिया गया है, क्योंकि यही आंकड़े भविष्य में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की योजनाओं का आधार बनेंगे। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा के भीतर लक्ष्य प्राप्त नहीं किया गया, तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
किसान पंजीकरण: जमाबंदी और आधार के समन्वय पर जोर
किसानों को दी जाने वाली प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और अन्य सरकारी सहायता योजनाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने बैठक में कहा कि जिन किसानों की जमीन की जमाबंदी हो चुकी है, उनका पंजीकरण शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले 6-7 वर्षों के भीतर की गई सभी जमाबंदी पहले से ही आधार नंबर के साथ डेटाबेस में उपलब्ध हैं।
इस उपलब्धता का लाभ उठाते हुए प्रशासन अब इन रिकॉर्ड्स को सत्यापित कर पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया को तेज करेगा। राजस्व कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन सभी जमाबंदी रिकॉर्ड्स को अलग करें जिनमें आधार पहले से लिंक है, ताकि उनके सत्यापन और अपलोडिंग का काम बिना किसी अतिरिक्त विलंब के पूरा किया जा सके। जिलाधिकारी ने तर्क दिया कि जब तकनीकी डेटा मौजूद है, तो उसे व्यवस्था में शामिल करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है।
शाम 6 बजे की ‘डेडलाइन’ और जवाबदेही का नया तंत्र
इस बैठक का सबसे प्रभावी हिस्सा वह ‘अल्टीमेटम’ रहा जो जिलाधिकारी ने राजस्व अमले को दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी (CO) के लॉगिन में जितने भी जमाबंदी सत्यापन के मामले लंबित हैं, उन्हें आज यानी 13 मई की शाम 6:00 बजे तक हर हाल में निष्पादित कर दिया जाए। यह समय-सीमा केवल मौखिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे जवाबदेही का एक त्रि-स्तरीय तंत्र खड़ा किया गया है।
- पहला स्तर: राजस्व कर्मचारी अपने अंचलाधिकारी को यह प्रमाण पत्र देंगे कि उनके लॉगिन में अब एक भी सत्यापन लंबित नहीं है।
- दूसरा स्तर: अंचलाधिकारी इस रिपोर्ट की पुष्टि करेंगे और अपनी ओर से अपर समाहर्ता (ADM) को प्रमाण पत्र सौंपेंगे।
- तीसरा स्तर: अपर समाहर्ता इन सभी प्रखंडों से प्राप्त रिपोर्ट का समेकन करेंगे और अंतिम प्रतिवेदन जिलाधिकारी की गोपनीय शाखा को उपलब्ध कराएंगे।
जवाबदेही सुनिश्चित करने का यह सख्त तरीका इसलिए अपनाया गया है ताकि फाइलों के निपटारे में होने वाली लेत-लतीफी को जड़ से खत्म किया जा सके। जिलाधिकारी ने दोटूक शब्दों में कहा कि शाम 6 बजे के बाद यदि किसी भी अधिकारी के लॉगिन में कोई भी लंबित मामला पाया गया, तो उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा।
प्रशासनिक तालमेल और डिजिटल कनेक्टिविटी
समीक्षा भवन में आयोजित इस बैठक में भौतिक रूप से उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और अन्य संबंधित विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन की आधुनिक कार्यशैली का परिचय देते हुए जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी इस बैठक में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। डिजिटल माध्यम से जुड़ने का उद्देश्य यह था कि निर्देशों का प्रवाह त्वरित हो और किसी भी भ्रम की स्थिति में तुरंत समाधान निकाला जा सके।
जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को भी निर्देश दिया कि वे पंचायत स्तर पर चल रहे इन कार्यों की रैंडम चेकिंग करें। किसान पंजीकरण अभियान को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर न रहकर किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने की बात भी कही गई। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जमीन के विवादों के कारण कई बार पंजीकरण रुक जाता है, ऐसे मामलों में अंचलाधिकारियों को त्वरित निर्णय लेकर जमाबंदी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए।
भविष्य की योजना और किसानों को लाभ
पंजीकरण की इस प्रक्रिया के पूर्ण होने से भागलपुर के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उर्वरक सब्सिडी, बीज वितरण, और फसल बीमा जैसे लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुँच सकेंगे। जिलाधिकारी का मानना है कि यदि जमाबंदी और आधार का एकीकरण पूर्ण हो जाता है, तो बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और वास्तविक किसानों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
जनगणना और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जिलाधिकारी की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि भागलपुर जिला प्रशासन अब ‘डाटा ड्रिवन गवर्नेंस’ की ओर बढ़ रहा है। शाम 6 बजे की समय-सीमा की समाप्ति के बाद प्राप्त होने वाले प्रमाण पत्रों की समीक्षा स्वयं जिलाधिकारी करेंगे। जिले के अन्य विभागों को भी इस कार्यसंस्कृति से सीख लेने की सलाह दी गई है, जहाँ समयबद्धता और जवाबदेही को सर्वोपरि रखा गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रशासनिक सख्ती का जमीनी स्तर पर कितना और कैसा प्रभाव पड़ता है, विशेषकर उन सुदूर प्रखंडों में जहाँ इंटरनेट और कनेक्टिविटी की चुनौतियां अक्सर काम में बाधक बनती हैं।


