
पटना। बिहार में गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान होने वाले भारी-भरकम खर्च से बचाने के लिए राज्य सरकार अब मिशन मोड में कार्य कर रही है। बुधवार, 13 मई 2026 को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने ‘बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति’ (BSSS) के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) और ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना’ (MM-JAY) की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और इनके क्रियान्वयन में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करना था। समीक्षा के दौरान निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक होनी चाहिए। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि आगामी महीनों में कार्ड निर्माण और अस्पतालों के नेटवर्क विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि कोई भी पात्र परिवार इलाज के अभाव में परेशान न हो।
स्वास्थ्य मंत्री के कड़े निर्देश: विस्तार और पारदर्शिता पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान निशांत कुमार ने विभागीय अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि धरातल पर लोग इसका लाभ उठा पा रहे हैं।
- पंजीकरण में तेजी: मंत्री ने पात्र लाभार्थियों के बीच आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास अब तक कार्ड नहीं पहुँचा है, उनके लिए पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाएं।
- अस्पतालों का जाल: वर्तमान में सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है। निशांत कुमार ने निर्देश दिया कि राज्य के अधिक से अधिक निजी और सरकारी अस्पतालों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाए, जिससे मरीजों को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सके।
- जन-जागरूकता अभियान: बैठक में यह महसूस किया गया कि ग्रामीण इलाकों में अब भी कई लोग योजना के लाभों और आवेदन की प्रक्रिया से अनभिज्ञ हैं। इसके लिए मंत्री ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के साथ मिलकर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाने को कहा है।
- सख्त निगरानी और पारदर्शिता: योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों द्वारा मरीजों से अवैध वसूली या इलाज में आनाकानी की शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
योजना की विशेषताएं: 5 लाख तक का सुरक्षा कवच
बिहार सरकार ‘अंत्योदय’ की भावना के साथ दो प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से निर्धन परिवारों को सुरक्षा प्रदान कर रही है। ये दोनों योजनाएं तकनीकी रूप से एक समान लाभ प्रदान करती हैं, जिससे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिल रही है।
- वित्तीय सहायता: इन योजनाओं के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। इसमें गंभीर सर्जरी से लेकर कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का उपचार शामिल है।
- पात्रता का आधार: इन योजनाओं का लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के डेटाबेस के आधार पर दिया जाता है। इसका अर्थ है कि राशन कार्ड धारक परिवार स्वतः ही इस सुरक्षा कवच के दायरे में आते हैं।
- पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस: लाभार्थियों को अस्पताल में भर्ती होने के समय कोई नकद भुगतान नहीं करना पड़ता। पूरी प्रक्रिया डिजिटल और कागजरहित है, जिससे मरीजों के परिजनों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है।
- ट्रस्ट मोड मॉडल: बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति (BSSS) इन योजनाओं को ‘ट्रस्ट मोड’ में संचालित कर रही है। इसका तात्पर्य यह है कि सरकार किसी तीसरे पक्ष की बीमा कंपनी के बजाय सीधे अस्पतालों को भुगतान करती है, जिससे प्रशासनिक खर्च कम होता है और दावों का निपटारा तेजी से होता है।
मई 2026 तक की प्रगति: आंकड़ों में सफलता की कहानी
बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति ने बैठक में जो रिपोर्ट पेश की, वह राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते दायरे को दर्शाती है। मई 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि बिहार ने कार्ड निर्माण और उपचार के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है।
लाभार्थी पहुंच और कार्ड वितरण
राज्य में अब तक लगभग 1.69 करोड़ परिवारों को इन योजनाओं के अंतर्गत कवर किया जा चुका है। व्यक्तिगत स्तर पर बात करें तो करीब 4.11 करोड़ पात्र लाभार्थियों ने अपने आयुष्मान कार्ड प्राप्त कर लिए हैं। यह संख्या दर्शाती है कि बिहार की एक बड़ी आबादी अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में सुरक्षित है। विभाग का लक्ष्य अगले छह महीनों में शेष बचे पात्र लोगों को भी इस डिजिटल पहचान से जोड़ना है।
उपचार और आर्थिक राहत
योजना की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना वह राहत है जो मरीजों को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 34.45 लाख से अधिक लोगों ने इन योजनाओं के तहत मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज प्राप्त किया है। यदि इन सेवाओं के वित्तीय मूल्य की बात करें, तो सरकार ने अब तक लगभग 5,315.61 करोड़ रुपये की चिकित्सा सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध कराई हैं। यह राशि उन परिवारों के लिए संजीवनी साबित हुई है जो निजी अस्पतालों के भारी खर्च के कारण इलाज कराने में सक्षम नहीं थे।
अस्पतालों का सुदृढ़ नेटवर्क
मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए राज्य भर में सरकारी और निजी अस्पतालों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया गया है। वर्तमान में सूचीबद्ध अस्पतालों की स्थिति इस प्रकार है:
अस्पताल का प्रकार | संख्या |
|---|---|
सरकारी अस्पताल | 434 |
निजी अस्पताल | 864 |
कुल पैनलबद्ध अस्पताल | 1,298 |
निशांत कुमार ने निजी अस्पतालों की अधिक भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में भी सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि वे इन योजनाओं के तहत अधिक जटिल ऑपरेशन और उपचार करने में सक्षम हो सकें।
भविष्य की रणनीति और चुनौतियां
समीक्षा बैठक का निष्कर्ष यह रहा कि बिहार ने स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन अभी भी कई मील के पत्थर पार करने शेष हैं। निशांत कुमार ने अधिकारियों से कहा कि वे तकनीक का उपयोग बढ़ाएं ताकि ‘क्लेम सेटलमेंट’ यानी अस्पतालों के भुगतान की प्रक्रिया और अधिक तेज हो सके। इससे अधिक निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि कॉल सेंटर और हेल्पडेस्क को और अधिक सक्रिय किया जाए ताकि अस्पताल में भर्ती होने के समय किसी भी मरीज को पहचान या तकनीकी गड़बड़ी के कारण परेशानी न हो। बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सूचीबद्ध अस्पतालों में ‘आयुष्मान मित्र’ की उपस्थिति अनिवार्य हो, जो अनपढ़ या कम जागरूक मरीजों को प्रक्रिया समझने में मदद कर सकें।
निशांत कुमार के नेतृत्व में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक ने यह साफ कर दिया है कि बिहार सरकार का विजन राज्य को एक ऐसे मुकाम पर पहुँचाना है जहाँ बीमारी किसी परिवार की कंगाली का कारण न बने। 5,315 करोड़ रुपये से अधिक की सेवा प्रदान करना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन 13 करोड़ की आबादी वाले राज्य में अभी भी जागरूकता और पहुंच को लेकर चुनौतियां बरकरार हैं, जिन्हें दूर करने के लिए विभाग अब नए जोश के साथ काम करेगा।


