
पटना। वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई ‘संयम’ की अपील अब देश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने, ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) अपनाने और एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने के आग्रह पर विपक्षी खेमे, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने सियासी पारे को गरमा दिया है। सोमवार, 11 मई 2026 को बिहार भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री मंगल पांडेय ने पटना में एक कड़ा बयान जारी कर राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। मंगल पांडेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी की “विरोधी मानसिकता” उन्हें देश के व्यापक हितों को समझने से रोक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री देश को एक संभावित बड़ी आर्थिक विपत्ति से बचाने के लिए नागरिकों से छोटे-छोटे त्याग की अपेक्षा कर रहे हैं, तब विपक्ष इसे मजाक और तंज का जरिया बना रहा है। पांडेय का यह बयान न केवल राहुल गांधी पर हमला है, बल्कि यह भाजपा की उस राष्ट्रभक्ति वाली छवि को भी पुख्ता करने की कोशिश है, जिसमें नागरिक कर्तव्यों को सर्वोपरि रखा गया है।
प्रधानमंत्री की अपील: देशभक्ति का नया पैमाना
मंगल पांडेय ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन तीन प्रमुख सुझावों का पुरजोर समर्थन किया जो उन्होंने वडोदरा और वेरावल की सभाओं में दिए थे। पांडेय के अनुसार, घर से काम करना (Work From Home) केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि इस संकट काल में ईंधन की खपत को कम करने का एक प्रभावी हथियार है। जब पूरी दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से त्रस्त है, तब देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की बचत करना सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करना है।
भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री की ‘सोना न खरीदने’ की सलाह को विशुद्ध रूप से “देशभक्ति” करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत अपनी सोने की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है। यदि नागरिक एक वर्ष के लिए सोने की खरीद टाल देते हैं, तो इससे रुपये की साख मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। मंगल पांडेय ने पूछा कि क्या अपने देश की मुद्रा को बचाने के लिए नागरिक इतना छोटा सा त्याग नहीं कर सकते? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह आह्वान किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि भारत को “आत्मनिर्भर” और “मजबूत” बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
राहुल गांधी पर ‘विरोधी मानसिकता’ का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की इन अपीलों पर किए गए तंज को लेकर मंगल पांडेय ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। पांडेय ने कहा कि राहुल गांधी को देश के हित से ज्यादा अपनी राजनीति प्यारी है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने देश को केवल एक परिवार की जागीर समझा हो, उसे सामूहिक राष्ट्रहित की भाषा समझ नहीं आएगी। पांडेय के अनुसार, राहुल गांधी की मानसिकता केवल विरोध करने की है, चाहे वह मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा हो या आर्थिक स्थिरता से।
मंगल पांडेय ने अपने बयान में कहा, “राहुल गांधी के लिए देश नहीं, परिवार पहले है। उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि किसी संभावित वैश्विक संकट के समय अपनी सरकार और प्रधानमंत्री के साथ खड़ा होना हर नागरिक का फर्ज होता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष का काम केवल आलोचना करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे समय में जनता को जागरूक करना चाहिए। मगर राहुल गांधी जनता को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
‘मुफ्तखोरी’ बनाम ‘आत्मनिर्भरता’: 60 साल का हिसाब
भाजपा नेता ने कांग्रेस के शासनकाल पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश पर करीब 60 साल राज किया, उन्होंने जनता को केवल “मुफ्तखोरी” सिखाई और उन्हें दूसरों पर निर्भर बनाया। मंगल पांडेय ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी नागरिकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं किया, बल्कि उन्हें चुनावी प्रलोभनों में उलझाए रखा। इसके उलट, प्रधानमंत्री मोदी देश को स्वावलंबी बनाने की बात कर रहे हैं।
पांडेय के अनुसार, आज जब प्रधानमंत्री देश के लोगों से त्याग और समर्पण की बात कर रहे हैं, तो कांग्रेस को दर्द इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्हें अपना वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के सहयोग से होता है। मंगल पांडेय ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लाल बहादुर शास्त्री ने देश में अन्न संकट के समय ‘एक वक्त का उपवास’ रखने की अपील की थी और जनता उनके साथ खड़ी हुई थी, आज वही भावना मोदी जी की अपील के साथ दिख रही है। मगर कांग्रेस उस महान परंपरा को भूलकर केवल नकारात्मकता फैला रही है।
वैश्विक युद्ध और रुपये पर दबाव का हवाला
मंगल पांडेय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में पश्चिम एशिया का युद्ध केवल दो क्षेत्रों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह एक “वैश्विक आर्थिक युद्ध” में तब्दील हो चुका है। तेल के कुओं पर बढ़ते खतरे और परिवहन मार्गों की नाकेबंदी से कच्चे तेल की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री ने दूरदर्शिता दिखाते हुए नागरिकों को पहले ही सचेत कर दिया है।
उन्होंने कहा कि रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सोने के आयात पर अंकुश लगाना सबसे प्रभावी तरीका है। मंगल पांडेय ने जनता से अपील की कि वे राहुल गांधी जैसे “भ्रम फैलाने वाले” नेताओं की बातों में न आएं और देशहित में प्रधानमंत्री के सुझावों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि आज की गई छोटी सी बचत भविष्य में भारत को एक बड़ी मंदी से बचा सकती है। पांडेय ने जोर देकर कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर लड़ना नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाना भी सच्ची राष्ट्रसेवा है।
विपत्ति के समय राष्ट्र की एकता का आह्वान
पूर्व मंत्री ने अपने वक्तव्य के अंत में यह स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार किसी भी प्रकार के संकट से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन इसमें जनभागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने नागरिकों की जिम्मेदारी को उसी तरह याद दिलाया है जैसे उन्होंने कोरोना काल में ‘ताली और थाली’ के माध्यम से किया था। मंगल पांडेय ने कहा कि राहुल गांधी को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की जनता अब जागरूक है और वह जानती है कि कौन सा नेता देश के लिए खड़ा है और कौन केवल परिवार के लिए।
पटना से जारी इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री की इन अपीलों को एक ‘राष्ट्रीय अभियान’ के रूप में पेश करेगी और इसे देशभक्ति के साथ जोड़ेगी। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह मुद्दा ‘तानाशाही’ और ‘जनता की निजी स्वतंत्रता’ पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। मंगल पांडेय के इस प्रहार के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि बिहार में भी भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रधानमंत्री की इन अपीलों का प्रचार करेंगे और विपक्ष के तंज का जवाब देंगे। फिलहाल, बिहार की राजनीति में ‘सोना’ और ‘पेट्रोल’ केवल उपभोग की वस्तुएं नहीं, बल्कि ‘देशभक्ति’ की कसौटी बन गए हैं।


