अस्पतालों में दवा और जांच के लिए अब नहीं कटेगा चक्कर: स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का अधिकारियों को सख्त निर्देश; नर्सिंग अभ्यर्थियों की बहाली पर भी बड़ा आश्वासन

पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और मरीजों को सुलभ चिकित्सा सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने एक बड़ी पहल की है। सोमवार, 11 मई 2026 को पटना स्थित विभागीय सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में स्पष्ट कर दिया कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली में अब किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को मिलने वाली दवाओं और जांच की सुविधाओं को लेकर था। निशांत कुमार ने विभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े और उन्हें समय पर सटीक चिकित्सा परामर्श के साथ-साथ निःशुल्क दवाएं और डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध हों। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें स्वास्थ्य विभाग के निवर्तमान सचिव लोकेश कुमार सिंह और राज्य स्वास्थ्य समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार पांडेय सहित कई वरीय अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा बैठक: व्यवस्था सुधार का नया रोडमैप

​विभागीय सभागार में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में चल रही विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की अद्यतन स्थिति की बारीकी से समीक्षा की। बैठक के दौरान निवर्तमान सचिव लोकेश कुमार सिंह ने राज्य के वर्तमान स्वास्थ्य ढांचे, निर्माणाधीन अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात मेडिकल स्टाफ की रिपोर्ट पेश की। मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि केवल भवनों का निर्माण कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन भवनों के भीतर आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

​निशांत कुमार ने विशेष रूप से जोर दिया कि जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ‘जांच और दवा’ का संकट पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को डिजिटल माध्यम से ट्रैक किया जाए ताकि स्टॉक खत्म होने से पहले ही उसकी पुनः आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अमित कुमार पांडेय ने डिजिटल हेल्थ मिशन और टेली-मेडिसिन सेवाओं की प्रगति के बारे में जानकारी साझा की। मंत्री ने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ सुदूर देहात के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।

नर्सिंग अभ्यर्थियों की पीड़ा: सचिवालय की चौखट पर मिला न्याय

​बैठक समाप्त होने के बाद जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सचिवालय स्थित अपने विभागीय कार्यालय से बाहर निकल रहे थे, तब एक भावुक दृश्य देखने को मिला। तकनीकी सेवा आयोग द्वारा चयनित बड़ी संख्या में नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर वहां जमा थे। मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपना काफिला रुकवाया और बीच सड़क पर ही इन अभ्यर्थियों की समस्याओं को सुना।

​अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले साल जारी बहाली के विज्ञापन में विभाग ने बाद में आवेदन की तिथि विस्तारित की थी। इस विस्तारित अवधि में कई योग्य उम्मीदवारों ने आवेदन किया और वे चयन प्रक्रिया में सफल भी हुए। लेकिन अब नियुक्ति पत्र मिलने के समय विभाग केवल मूल कटऑफ तिथि तक के ही दस्तावेजों को मान्य कर रहा है, जिससे बाद में आवेदन करने वाले सफल अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

नर्सिंग बहाली विवाद के मुख्य बिंदु:

  • विज्ञापन और विस्तार: बहाली की प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी, जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि को तकनीकी कारणों से बढ़ाया गया था।
  • दस्तावेज की समस्या: सफल अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग अब उन दस्तावेजों को स्वीकार नहीं कर रहा जो विस्तारित तिथि के दौरान बने थे।
  • मंत्री का निर्देश: निशांत कुमार ने मौके पर ही मौजूद विभागीय सचिव को इस विसंगति को दूर करने और बाद में आवेदन कर चयनित हुए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को मान्य करते हुए उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में बदलाव और नई चुनौतियां

​सोमवार की यह बैठक एक तरह से प्रशासनिक फेरबदल की गवाह भी रही। निवर्तमान सचिव लोकेश कुमार सिंह ने राज्य की स्वास्थ्य उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए अपनी विदाई की औपचारिकताओं के साथ नए विजन पर चर्चा की। निशांत कुमार ने लोकेश कुमार सिंह के कार्यकाल की सराहना की और नए आने वाले नेतृत्व के लिए प्राथमिकताओं की सूची तैयार की।

​मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि हमें ‘प्रिवेंटिव हेल्थकेयर’ यानी बीमारी होने से पहले के बचाव पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों की उपस्थिति और उनके कार्य घंटों की निगरानी करने के भी निर्देश दिए ताकि मेडिकल इमरजेंसी के समय किसी भी वरिष्ठ डॉक्टर की कमी न खले।

तालिका: स्वास्थ्य विभाग की वर्तमान प्राथमिकताएं और लक्ष्य

कार्य का क्षेत्र

वर्तमान चुनौती

मंत्री का निर्देश / समाधान

दवा उपलब्धता

कुछ केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाओं का अभाव

रीयल-टाइम स्टॉक ट्रैकिंग और बफर स्टॉक सुनिश्चित करना

जांच की सुविधा

पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी रिपोर्ट में देरी

जिला स्तर पर अत्याधुनिक लैब का विस्तार और समयबद्ध रिपोर्टिंग

मानव संसाधन

नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती में पेच

तकनीकी बाधाओं को दूर कर तत्काल नियुक्ति पत्र वितरण

अस्पताल प्रबंधन

साफ-सफाई और मरीजों के साथ व्यवहार

फीडबैक सिस्टम लागू करना और दोषी कर्मियों पर कार्रवाई

मरीजों की संतुष्टि ही सफलता का पैमाना

​निशांत कुमार ने अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाला व्यक्ति सबसे अधिक लाचार होता है। उसकी संतुष्टि ही स्वास्थ्य विभाग की सफलता का असली पैमाना है। उन्होंने जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को औचक निरीक्षण करने की सलाह दी ताकि धरातल पर दवाओं की कालाबाजारी या जांच केंद्रों में होने वाली वसूली पर लगाम कसी जा सके।

​स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग जल्द ही एक केंद्रीकृत हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा, जिस पर मरीज सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। यदि किसी मरीज को यह कहा जाता है कि दवा बाहर से खरीदनी होगी या जांच के लिए बाहर जाना होगा, तो संबंधित अस्पताल अधीक्षक के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने साफ किया कि ‘निशुल्क जांच और निशुल्क दवा’ केवल कागजी नारा नहीं रहना चाहिए, इसे हकीकत में बदलना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

नर्सिंग अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण

​बक्सर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे जिलों से आए नर्सिंग अभ्यर्थियों ने मंत्री के आश्वासन के बाद राहत की सांस ली है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति के लिए भटक रहे थे। यदि विस्तारित तिथि के दस्तावेजों को मान्य कर लिया जाता है, तो राज्य को हजारों की संख्या में प्रशिक्षित नर्सें मिलेंगी, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार होगा। मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि विभाग में मैनपावर की कमी को हर हाल में दूर किया जाएगा और किसी भी योग्य अभ्यर्थी को तकनीकी कारणों से नौकरी से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।

आगामी सत्र और बड़े बदलावों के संकेत

​11 मई की यह बैठक बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। निशांत कुमार का कड़ा रुख और साथ ही अभ्यर्थियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता यह दर्शाती है कि आने वाले समय में विभाग न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करेगा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी लाएगा। लोकेश कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत स्वास्थ्य योजनाओं की अद्यतन रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बिहार अब डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

​सचिवालय में हुई इस चर्चा और निर्देशों के बाद अब निगाहें फील्ड पर तैनात अधिकारियों पर हैं कि वे कितनी जल्दी इन आदेशों को लागू करते हैं। निशांत कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे और अस्पतालों में जाकर मरीजों से सीधे संवाद करेंगे। यदि व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा, तो गाज गिरना तय है। भागलपुर जैसे बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों के लिए भी मंत्री ने विशेष फंड और जांच मशीनों के उन्नयन की बात कही है, जिससे अंग क्षेत्र के मरीजों को पटना आने की जरूरत कम पड़ेगी।

​कुल मिलाकर, सोमवार का दिन बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए नीतिगत निर्णयों और मानवीय संवेदनाओं का एक संतुलित संगम रहा। निशांत कुमार ने एक ओर जहाँ अधिकारियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों को न्याय का भरोसा दिलाकर अपनी छवि एक जनसुलभ मंत्री के रूप में स्थापित की है। अब देखना यह है कि इन निर्देशों का असर अस्पतालों की ओपीडी और वार्डों में कितनी जल्दी दिखाई देता है।

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