विक्रमशिला सेतु संकट के बीच भागलपुर को मिलेगी ‘एमवी राजेंद्र प्रसाद’ की ताकत: कोलकाता से लौट रहा आधुनिक टूरिस्ट जहाज, रात में भी सफर मुमकिन

भागलपुर। अंग जनपद की जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के एक महत्वपूर्ण हिस्से के धराशायी होने के बाद से भागलपुर और नवगछिया के बीच का जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। बीते आठ दिनों से इस इलाके की रफ़्तार पर जो बेड़ियाँ जकड़ी हैं, उसने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा की लहरों को पार करने के लिए लोग वर्तमान में केवल छोटी नावों और गिने-चुने जहाजों के भरोसे हैं, जो नाकाफी साबित हो रहे हैं। लेकिन इस संकट के बीच अब राहत की एक बड़ी किरण दिखाई दे रही है। पर्यटन विभाग का अत्याधुनिक टूरिस्ट जहाज ‘एमवी राजेंद्र प्रसाद’ जल्द ही भागलपुर के पानी में अपनी धमक दिखाने वाला है। कोलकाता के रामकृष्ण फेरी घाट पर पिछले कई महीनों से चल रहा इसका मरम्मत और रखरखाव (मेंटनेंस) का कार्य अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह जहाज न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि इसमें वह क्षमता भी है जो वर्तमान में भागलपुर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है—यानी रात के अंधेरे में भी सुरक्षित परिचालन।

कोलकाता में ‘मेकओवर’ पूरा, एक हफ्ते में भागलपुर में दस्तक

​एमवी राजेंद्र प्रसाद जहाज पिछले कुछ समय से भागलपुर के परिदृश्य से ओझल था क्योंकि इसे चार साल में एक बार होने वाले अनिवार्य मेंटनेंस के लिए कोलकाता भेजा गया था। किसी भी बड़े जलयान के लिए सुरक्षा मानकों के अनुसार समय-समय पर उसकी तकनीकी जांच और ओवरहॉलिंग अनिवार्य होती है। जहाज के प्रबंधक सिकंदर ने पुष्टि की है कि कोलकाता के रामकृष्ण फेरी घाट के पास इसका सारा तकनीकी कार्य संपन्न हो गया है। अब यह जहाज गंगा की लहरों पर एक बार फिर रफ़्तार भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

​बिहार सरकार के लिए भी यह जहाज इस वक्त प्राथमिकता की सूची में शीर्ष पर है। जैसे ही विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की खबर आई, प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई और राज्य सरकार की ओर से तत्काल जहाज के प्रबंधन को इसे वापस लाने के लिए संपर्क किया गया। सिकंदर के अनुसार, सरकार की ओर से परिचालन शुरू करने का स्पष्ट संकेत मिल चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि एक सप्ताह के भीतर यह जहाज भागलपुर के बरारी घाट पर लंगर डाल देगा।

रात का सन्नाटा नहीं रोकेगा रास्ता: आधुनिक नेविगेशन से लैस है जहाज

​भागलपुर में वर्तमान में चल रहे नावों और जहाजों के साथ सबसे बड़ी समस्या समय की पाबंदी है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शाम 5 बजे के बाद नौका परिचालन पर प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि सामान्य नावों और जहाजों में रात में नेविगेशन (रास्ता ढूंढने) की उचित व्यवस्था नहीं होती। इससे सबसे अधिक परेशानी मरीजों, बारात और इमरजेंसी काम से निकलने वाले लोगों को हो रही है। एमवी राजेंद्र प्रसाद इस समस्या का सबसे सटीक समाधान है।

​यह जहाज आधुनिक रडार, नाइट विजन और जीपीएस सिस्टम से लैस है। इसकी बनावट और इसमें लगी शक्तिशाली लाइटें इसे रात के घने अंधेरे में भी सुरक्षित रूप से नदी पार कराने में सक्षम बनाती हैं। अगर भागलपुर जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी अनुमति प्रदान करते हैं, तो यह जहाज बरारी घाट और नवगछिया के हाई लेवल घाट के बीच रात में भी अपनी सेवाएं दे सकेगा। इससे भागलपुर के उन हजारों लोगों को राहत मिलेगी जो शाम ढलने के बाद गंगा के इस पार या उस पार फंस जाते हैं।

नावों का जोखिम और जहाज की जरूरत: एक तुलनात्मक अध्ययन

​विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद गंगा में नावों की संख्या अचानक बढ़ गई है, लेकिन यह सुविधा सुरक्षा के पैमाने पर खरी नहीं उतरती। इस समय गंगा में तेज हवाओं का दौर चल रहा है और अक्सर देखा जा रहा है कि नावें क्षमता से अधिक भार (ओवरलोड) लेकर चल रही हैं। ऐसे में एमवी राजेंद्र प्रसाद का आना एक सुरक्षा कवच की तरह होगा। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि वर्तमान की व्यवस्था और एमवी राजेंद्र प्रसाद के बीच कितना बड़ा अंतर है:

विशेषता

सामान्य देशी नाव / छोटे जहाज

एमवी राजेंद्र प्रसाद (टूरिस्ट शिप)

सुरक्षा मानक

कम, ओवरलोडिंग का खतरा अधिक

उच्च, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर आधारित

परिचालन समय

केवल सुबह 5 से शाम 5 बजे तक

जिला प्रशासन की अनुमति से 24 घंटे संभव

सुविधाएं

बैठने की सीमित व्यवस्था, धूप-बारिश से बचाव नहीं

एयरकंडीशंड (AC) केबिन, आधुनिक कुर्सियाँ और शौचालय

क्षमता

बहुत कम, असंतुलन का डर

एक बार में बड़ी संख्या में यात्रियों को ले जाने में सक्षम

नेविगेशन

मानवीय नजरों पर निर्भर

रडार और डिजिटल मैप से लैस

स्थानीय पर्यटन से आपातकालीन परिवहन तक का सफर

​भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने करीब तीन वर्ष पूर्व यह भव्य जहाज बिहार सरकार के पर्यटन विभाग को सौंपा था। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य भागलपुर में जलीय पर्यटन को बढ़ावा देना था। यह जहाज भागलपुर के बरारी घाट से कहलगांव के बटेश्वर स्थान और सुलतानगंज के अजगैबीनाथ धाम के बीच पर्यटकों को घुमाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। डॉल्फिन दर्शन और गंगा की लहरों के बीच सूर्यास्त का आनंद लेने के लिए यह पर्यटकों की पहली पसंद बन गया था।

​हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों ने इसके उपयोग के मायने बदल दिए हैं। अब यह जहाज केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि भागलपुर की रफ़्तार को बचाने वाला एक ‘रेस्क्यू शिप’ साबित होगा। प्रशासन की योजना है कि जब तक विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हो जाता और यातायात बहाल नहीं होता, तब तक एमवी राजेंद्र प्रसाद को पूरी तरह से यात्री परिवहन के लिए तैनात रखा जाए।

प्रशासनिक तालमेल और भविष्य की उम्मीदें

​जहाज के भागलपुर वापस आने की खबर ने उन लोगों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है जो प्रतिदिन कामकाज के सिलसिले में नवगछिया से भागलपुर आते हैं। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि इस बड़े जहाज के आने से कम से कम मानव श्रम की आवाजाही सुगम होगी। प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार, मरम्मत के बाद जहाज का ट्रायल रन सफल रहा है और अब यह कोलकाता से भागलपुर के बीच की दूरी तय करने के लिए प्रस्थान करने वाला है।

​प्रबंधक सिकंदर का कहना है कि उनकी टीम पूरी तरह तैयार है। जैसे ही जहाज भागलपुर पहुँचेगा, इसे तुरंत सेवा में लगा दिया जाएगा। भागलपुर जिलाधिकारी भी इस जहाज की उपयोगिता को समझते हुए इसकी तैनाती के लिए हरी झंडी दिखा चुके हैं। अब बस इंतजार है उस पल का जब एमवी राजेंद्र प्रसाद एक बार फिर गंगा की लहरों को चीरते हुए बरारी घाट पर दिखाई दे और उन हजारों लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाए जो पिछले आठ दिनों से पुल के टूटने का दंश झेल रहे हैं।

​भागलपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जलमार्ग हमेशा से एक सशक्त विकल्प रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी से यह उपेक्षित था। विक्रमशिला सेतु के संकट ने यह सिखा दिया है कि एमवी राजेंद्र प्रसाद जैसे आधुनिक जहाजों की संख्या गंगा में बढ़ानी होगी, ताकि भविष्य में कभी सड़क मार्ग बाधित हो, तो शहर की धड़कनें न रुकें। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस जहाज के आने के बाद रात के परिचालन को लेकर क्या नीति अपनाता है, क्योंकि यही वह फैसला होगा जो इस संकट काल में भागलपुर की जनता के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित होगा।

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