​नाथनगर के चम्पापुल पर ‘त्रिकोणीय’ संग्राम: आठ माह की गर्भवती ने बीच सड़क पर पति को नाबालिग प्रेमिका संग दबोचा, जमकर हुई धुनाई

भागलपुर/नाथनगर। सिल्क सिटी भागलपुर के नाथनगर थाना क्षेत्र स्थित चम्पापुल के समीप सोमवार की दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रिश्तों की उलझन और धोखे की एक ऐसी दास्तान बीच सड़क पर उजागर हुई जिसे देखकर राहगीर दंग रह गए। आमतौर पर पुलों पर गाड़ियों की रफ़्तार देखी जाती है, लेकिन सोमवार को यहाँ भावनाओं का गुबार और हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मामला एक पति, उसकी आठ माह की गर्भवती पत्नी और एक नाबालिग लड़की के बीच छिड़े ‘युद्ध’ का था। आठ माह की गर्भवती एक महिला ने जब अपने पति को एक नाबालिग युवती के साथ ऑटो में रंगरेलियां मनाते हुए पकड़ा, तो उसके सब्र का बांध टूट गया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। बीच सड़क पर पत्नी और कथित प्रेमिका के बीच जमकर खींचतान हुई, गालियां चलीं और देखते ही देखते तमाशबीनों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस हंगामे ने न केवल यातायात बाधित किया, बल्कि समाज के भीतर पनप रहे अवैध रिश्तों और पारिवारिक विखंडन की एक कड़वी हकीकत को भी सार्वजनिक कर दिया।

ऑटो में पकड़ा गया ‘धोखा’, बीच सड़क पर संग्राम

​घटना की शुरुआत तब हुई जब आठ महीने की गर्भवती महिला नाथनगर की ओर से गुजर रही थी। इसी दौरान उसकी नजर एक ऑटो पर पड़ी, जिसमें उसका पति एक कम उम्र की लड़की के साथ काफी करीब बैठा हुआ था। अपनी आंखों पर यकीन न कर पाने वाली पत्नी ने तुरंत ऑटो को रुकवाया। जैसे ही उसने पति को टोका, विवाद शुरू हो गया। गर्भवती महिला ने आव देखा न ताव और नाबालिग लड़की का हाथ पकड़कर उसे ऑटो से नीचे खींच लिया। इसके बाद दोनों महिलाओं के बीच सड़क पर ही हाथापाई शुरू हो गई।

​गर्भवती महिला चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को बता रही थी कि यह उसका पति है और इस नाबालिग लड़की के चक्कर में पड़कर उसका घर बर्बाद कर रहा है। वह बार-बार अपनी शारीरिक स्थिति का हवाला दे रही थी कि आठ माह के गर्भ के बावजूद उसे अपने पति की इस करतूत के कारण सड़क पर उतरना पड़ा है। दूसरी ओर, नाबालिग लड़की भी पीछे हटने को तैयार नहीं थी। बीच बचाव करने आए स्थानीय लोगों को जब पता चला कि मामला पति-पत्नी और ‘वो’ का है, तो भीड़ और अधिक उग्र हो गई।

अकबरनगर से पहुँचे परिजन और फिर शुरू हुआ ‘इंसाफ’

​हंगामे के बीच एक नया मोड़ तब आया जब अकबरनगर थाना क्षेत्र से कुछ लोग वहां पहुँचे। दरअसल, उस नाबालिग लड़की के पिता और चाचा पिछले एक सप्ताह से उसकी तलाश कर रहे थे। लड़की घर से लापता थी और परिजनों ने अकबरनगर थाने में उसके अपहरण का मामला दर्ज करा रखा था। जैसे ही परिजनों ने अपनी बेटी को उस युवक के साथ देखा, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

​परिजनों ने बिना देर किए उस युवक को पकड़ लिया और उसकी जमकर धुनाई शुरू कर दी। बीच सड़क पर युवक पर लात-घूसे बरसने लगे। लड़की के घरवालों का आरोप था कि इस व्यक्ति ने उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया और उसे छिपाकर रखा था। एक तरफ गर्भवती पत्नी अपने पति को कोस रही थी, तो दूसरी तरफ नाबालिग के परिजन उस पर अपहरण का आरोप लगाकर पीट रहे थे। युवक की स्थिति ‘इधर कुआं उधर खाई’ वाली हो गई थी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह मामला शांत कराया और कानून को हाथ में न लेने की नसीहत देते हुए सभी को नाथनगर थाने ले जाने का निर्णय लिया।

नाथनगर थाने में घंटों चला ‘पंचायत’ का दौर

​दर्जन भर से अधिक लोगों के साथ जब यह पूरा मामला नाथनगर थाने पहुँचा, तो वहां भी काफी देर तक शोर-शराबा होता रहा। पुलिस अधिकारियों के सामने तीन पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे थे। पहली, वह गर्भवती महिला जो अपने पति को बचाने और उसे नाबालिग के चंगुल से निकालने की गुहार लगा रही थी। दूसरा पक्ष नाबालिग लड़की के पिता और चाचा का था, जो युवक को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने पर अड़े थे। और तीसरा पक्ष वह आरोपी युवक था जो दोनों तरफ से घिरा हुआ था।

​गर्भवती महिला ने पुलिस के सामने फूट-फूटकर अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि उसका पति उसे छोड़कर इस लड़की के साथ भाग गया था। वह आठ महीने की गर्भवती है और उसे इस हाल में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया गया। महिला का कहना था कि उसके पति की इस गलती ने उसकी पूरी दुनिया उजाड़ दी है। वहीं, नाबालिग के पिता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही अकबरनगर थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करा रखी है, इसलिए यह मामला कानूनी रूप से काफी गंभीर है।

अकबरनगर और नाथनगर पुलिस के बीच समन्वय

​नाथनगर थाना पुलिस ने जब मामले की गहराई को समझा, तो उन्हें पता चला कि मूल मामला अकबरनगर थाने का है। नाथनगर इंस्पेक्टर ने तुरंत अकबरनगर थानाध्यक्ष राहुल कुमार से संपर्क साधा और केस डायरी के बारे में जानकारी ली। अकबरनगर पुलिस ने पुष्टि की कि नाबालिग की बरामदगी के लिए वे लगातार छापेमारी कर रहे थे और उनके यहाँ अपहरण का केस संख्या पहले से दर्ज है।

​कुछ ही देर में अकबरनगर थाने से पुलिस बल नाथनगर पहुँचा। कानूनी प्रक्रिया के तहत, चूंकि मामला अपहरण का था और लड़की नाबालिग थी, इसलिए प्राथमिकता नाबालिग की सुरक्षा और आरोपी की गिरफ्तारी को दी गई। नाथनगर पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद अपहृत लड़की और आरोपी युवक को अकबरनगर पुलिस के हवाले कर दिया। गर्भवती महिला भी रोते-बिलखते पुलिस की जीप के पीछे भागती रही, लेकिन कानून की बंदिशों के कारण पुलिस को आरोपियों को साथ ले जाना पड़ा।

अकबरनगर थानाध्यक्ष का बयान और वर्तमान स्थिति

​अकबरनगर थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद नाबालिग लड़की को बरामद कर लिया है। आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पिछले एक सप्ताह से दोनों कहाँ छिपे थे और क्या इसमें किसी और व्यक्ति ने उनकी मदद की थी। नाबालिग लड़की का मेडिकल परीक्षण और न्यायालय में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

​थानाध्यक्ष ने यह भी बताया कि युवक की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को भी संज्ञान में लिया गया है, हालांकि प्राथमिक रूप से यह मामला पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और अपहरण की धाराओं के तहत दर्ज है क्योंकि लड़की नाबालिग है। कानून के अनुसार, नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं होता, इसलिए युवक पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

सामाजिक ताने-बाने पर उठते सवाल

​चम्पापुल पर हुए इस ड्रामे ने स्थानीय लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भीड़ में मौजूद कई बुजुर्गों ने चर्चा की कि किस तरह आज की युवा पीढ़ी और विवाहित लोग नैतिक मूल्यों को ताक पर रख रहे हैं। आठ माह की गर्भवती महिला की लाचारी ने वहां मौजूद हर शख्स को मर्माहत किया। लोगों का कहना था कि एक तरफ जहाँ सरकार और समाज महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं समाज के वास्तविक चेहरे को उजागर करती हैं।

​नाबालिग लड़की के अपहरण और फिर उसे प्रेमिका के रूप में साथ रखने की इस घटना ने अकबरनगर और नाथनगर के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और सामाजिक निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, आरोपी युवक पुलिस की गिरफ्त में है और नाबालिग लड़की को उसके परिजनों को सौंपने या शेल्टर होम भेजने पर विचार किया जा रहा है। सोमवार की वह दोपहर चम्पापुल के इतिहास में एक ‘हाई-वोल्टेज’ राजनीतिक और सामाजिक ड्रामे के रूप में दर्ज हो गई है, जिसकी गूँज अभी कई दिनों तक नाथनगर की गलियों में सुनाई देगी। पुलिस अब इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है ताकि पीड़ित पक्ष को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

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