सीटेट में अब गूँजेगी ‘मिथिला की मधुर वाणी’: पहली बार मैथिली भाषा को मिली जगह, आवेदन की प्रक्रिया शुरू, जानें परीक्षा की पूरी रूपरेखा

दरभंगा/पटना। मिथिलांचल के मेधावी अभ्यर्थियों और मातृभाषा प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित होने वाली केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के 22वें संस्करण में पहली बार ‘मैथिली’ भाषा को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। यह न केवल एक भाषाई मान्यता है, बल्कि उन हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अपनी मातृभाषा में परीक्षा देकर बेहतर प्रदर्शन करने का सपना देख रहे थे। सोमवार, 11 मई 2026 से इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लंबे समय से मिथिला क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और छात्र संगठन यह मांग कर रहे थे कि देश की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली को भी सीटेट जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षा में स्थान मिलना चाहिए। केंद्र सरकार और सीबीएसई के इस फैसले से बिहार के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा और पूर्णिया जैसे जिलों के छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मैथिली के लिए ‘कोड 25’ बना पहचान: छात्र चुन सकेंगे मातृभाषा

​सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इस बार की सीटेट परीक्षा में मैथिली भाषा को वैकल्पिक भाषा के रूप में चुनने का प्रावधान किया गया है। आवेदन पत्र के रिक्तियों वाले कॉलम में मैथिली भाषा के लिए कोड संख्या 25 निर्धारित की गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब अभ्यर्थी भाषा-1 या भाषा-2 के रूप में मैथिली का चयन कर सकेंगे। अब तक मैथिली भाषी छात्रों को मजबूरी में हिंदी, अंग्रेजी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का चुनाव करना पड़ता था, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ता था। लेकिन अब अपनी मातृभाषा में व्याकरण और साहित्य के प्रश्नों को हल करना उनके लिए अपेक्षाकृत सहज होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बिहार और विशेष रूप से मिथिलांचल के अभ्यर्थियों के सफलता प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।

आवेदन से लेकर परिणाम तक: महत्वपूर्ण तिथियों का लेखा-जोखा

​सीटेट के 22वें संस्करण के लिए समय-सारणी बहुत स्पष्ट रखी गई है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना पंजीकरण पूरा कर लें।

  • आवेदन की शुरुआत: 11 मई 2026 (सोमवार)
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 10 जून 2026
  • त्रुटि सुधार (Correction Window): 15 जून से 18 जून 2026 तक (ऑनलाइन मोड में)
  • परीक्षा की तिथि: 06 सितंबर 2026
  • प्रवेश पत्र: परीक्षा से ठीक 2 दिन पहले आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड किए जा सकेंगे।
  • परिणाम की घोषणा: अक्टूबर 2026 के अंत तक परिणाम जारी होने की पूरी संभावना है।

​यह परीक्षा देशभर के 132 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इसमें पेपर-1 (कक्षा 1 से 5 के लिए) और पेपर-2 (कक्षा 6 से 8 के लिए) की परीक्षाएं दो अलग-अलग पालियों में संपन्न होंगी।

केंद्र आवंटन का नया नियम: सीबीएसई का रहेगा एकाधिकार

​इस बार के आवेदन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले वर्षों के विपरीत, इस बार पोर्टल पर अभ्यर्थियों को अपनी पसंद का परीक्षा शहर (Exam City) चुनने का कोई प्रावधान नहीं दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्र केवल अपना पता और प्राथमिकताएं दर्ज करेंगे, लेकिन परीक्षा केंद्र का अंतिम आवंटन पूरी तरह से सीबीएसई द्वारा किया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक सुविधा और सुरक्षा मानकों को देखते हुए ही केंद्रों का आवंटन किया जाएगा। बिहार के प्रमुख शहरों जैसे पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा में परीक्षा केंद्र बनाए जाने की संभावना है, ताकि मैथिली भाषी छात्रों को लंबी यात्रा न करनी पड़े।

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की प्रतिक्रिया: ‘मिथिला का मान बढ़ा’

​सीटेट में मैथिली को शामिल किए जाने पर दरभंगा के सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस उपलब्धि को मिथिला की संस्कृति और अस्मिता की जीत बताया। सांसद ने कहा कि वे लंबे समय से संसद के भीतर और बाहर इस मांग को उठा रहे थे। उन्होंने कहा, “मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक समृद्ध परंपरा है। सीटेट में इसे शामिल करने से न केवल मैथिली भाषी छात्र-छात्राओं को केंद्र और राज्य की शिक्षक भर्तियों में अधिक अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि स्कूलों में मैथिली पढ़ाने वाले शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। यह ‘नई शिक्षा नीति’ के उस उद्देश्य को भी पूरा करता है जहाँ मातृभाषा में शिक्षा और मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।”

मैथिली को शामिल करने के दूरगामी परिणाम

​शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि सीटेट में मैथिली के आने से बिहार की शिक्षक बहाली प्रक्रिया (जैसे बीपीएससी टीआरई) में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे। अब जो अभ्यर्थी मैथिली को मुख्य भाषा के रूप में सीटेट पास करेंगे, वे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर मैथिली शिक्षक बनने के लिए अधिक पात्र और सक्षम माने जाएंगे। साथ ही, केंद्रीय विद्यालयों (KVS) और नवोदय विद्यालयों (NVS) में भी मैथिली भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इस भाषा का प्रसार होगा।

अभ्यर्थियों के लिए रणनीतिक सलाह

​जो अभ्यर्थी पहली बार मैथिली भाषा का चयन कर रहे हैं, उन्हें अपने पाठ्यक्रम को ध्यान से समझने की जरूरत है। मैथिली भाषा के प्रश्न पत्र में भाषाई समझ, व्याकरण, और शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) पर आधारित 30 प्रश्न होंगे। चूंकि मैथिली का व्याकरण संस्कृत और हिंदी से काफी हद तक मेल खाता है, इसलिए छात्रों के लिए यह स्कोरिंग विषय साबित हो सकता है। जानकारों का कहना है कि अभ्यर्थियों को मैथिली साहित्य के साथ-साथ भाषाई शिक्षण विधियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

​11 मई से शुरू हुई यह आवेदन प्रक्रिया बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य में एक नया मोड़ लेकर आई है। मैथिली को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सम्मान मिलना इस भाषा की वैज्ञानिकता और लोकप्रियता पर मुहर लगाता है। 10 जून तक आवेदन करने वाले लाखों युवाओं की नजरें अब 6 सितंबर की उस परीक्षा पर होंगी, जहाँ वे पहली बार अपनी ‘मैया’ (मातृभाषा) के माध्यम से शिक्षक बनने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।

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