
बक्सर/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच की आंच अब बिहार की सीमाओं को लांघते हुए बक्सर जिले तक पहुँच गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या के मामले में बंगाल एसटीएफ ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। सोमवार, 11 मई 2026 की सुबह बंगाल से आई एसटीएफ की टीम ने बक्सर पुलिस के सहयोग से जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक बड़ी छापेमारी को अंजाम दिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विशाल श्रीवास्तव को उसके घर से दबोच लिया है। विशाल श्रीवास्तव बक्सर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत पांडेयपट्टी गांव का रहने वाला है और उसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। बंगाल पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे बक्सर जिले में हड़कंप मच गया है। पकड़े गए युवक को बंगाल एसटीएफ की टीम अपने साथ कोलकाता ले गई है, जहाँ इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। बक्सर के मुफस्सिल थाने के अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की है।
पांडेयपट्टी में बंगाल एसटीएफ की दबिश: तड़के दी गई दस्तक
पश्चिम बंगाल से आई विशेष कार्य बल (STF) की टीम रविवार देर रात ही बक्सर पहुँच गई थी। स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने के बाद सोमवार की तड़के पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पांडेयपट्टी गांव की घेराबंदी की। पुलिस का मुख्य निशाना विशाल श्रीवास्तव था, जिसके बारे में तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर बंगाल पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी। जैसे ही टीम ने विशाल के घर पर दस्तक दी, वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने घेराबंदी इतनी सख्त कर रखी थी कि विशाल को भागने का कोई मौका नहीं मिला।
गिरफ्तारी के बाद विशाल श्रीवास्तव को तुरंत मुफस्सिल थाने लाया गया, जहाँ बंगाल पुलिस और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे बंद कमरे में घंटों पूछताछ की। अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि बंगाल पुलिस के पास विशाल के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य थे, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। विशाल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि वह पहले भी कई गंभीर वारदातों में संलिप्त रहा है और उसके तार अंतरराज्यीय अपराधी गिरोहों से जुड़े होने की आशंका है।
6 मई की वह खौफनाक रात: घर के पास ही चली थीं गोलियां
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में 6 मई 2026, बुधवार की रात जो हुआ, उसने पूरे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ उस रात करीब 10:15 बजे अपने कार्यालय से काम निपटाकर घर लौट रहे थे। वे अपने घर से महज 200 मीटर की दूरी पर थे, तभी अंधेरे का फायदा उठाकर दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें घेर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। उन्हें पता था कि चंद्रनाथ कब और किस रास्ते से घर लौटते हैं। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल गया और जब तक लोग मदद के लिए दौड़ते, अपराधी अपनी बाइक पर सवार होकर फरार हो चुके थे। चंद्रनाथ रथ को लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हत्या के बाद बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया और पुलिस पर मुख्य आरोपियों को पकड़ने का भारी दबाव था।
रेकी और प्लानिंग: अपराधियों ने बुना था मौत का जाल
बंगाल एसटीएफ की जांच में यह बात सामने आई है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई तात्कालिक विवाद नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। अपराधियों ने हत्या से पहले कई दिनों तक इलाके की रेकी की थी। उन्हें चंद्रनाथ के आने-जाने के समय और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। बंगाल पुलिस को जांच के दौरान कुछ ऐसे डिजिटल सुराग मिले, जो सीधे तौर पर बिहार के बक्सर से जुड़े हुए थे।
जांच एजेंसियों को पता चला कि हत्या में शामिल शूटरों के संपर्क बक्सर के विशाल श्रीवास्तव से थे। पुलिस को अंदेशा है कि विशाल ने या तो शूटरों को हथियार उपलब्ध कराए थे या फिर इस पूरी साजिश में ‘लॉजिस्टिक सपोर्ट’ प्रदान किया था। विशाल का बक्सर से बंगाल तक का संपर्क तंत्र पुलिस के लिए जांच का मुख्य विषय बना हुआ है। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि क्या विशाल खुद उस रात मध्यमग्राम में मौजूद था या उसने बिहार में बैठकर ही इस वारदात की पटकथा लिखी थी।
विशाल श्रीवास्तव का आपराधिक इतिहास और बक्सर पुलिस की भूमिका
पकड़ा गया आरोपी विशाल श्रीवास्तव बक्सर पुलिस की फाइलों में पहले से ही एक ‘हिस्ट्रीशीटर’ के रूप में दर्ज है। पांडेयपट्टी के रहने वाले विशाल पर लूट, रंगदारी और हथियार तस्करी जैसे कई संगीन मामले पहले से दर्ज हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, विशाल की गतिविधियां पिछले कुछ समय से काफी संदिग्ध थीं और वह अक्सर बिहार से बाहर रहता था। बक्सर पुलिस को भी उसकी तलाश कई स्थानीय मामलों में थी, लेकिन बंगाल एसटीएफ की इस कार्रवाई ने उसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के हाई-प्रोफाइल केस का हिस्सा बना दिया है।
मुफस्सिल थाने में पूछताछ के दौरान विशाल ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब एसटीएफ ने उसके सामने तकनीकी सबूत रखे, तो वह टूट गया। अपर थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने पुष्टि की है कि विशाल को कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद बंगाल पुलिस के हवाले कर दिया गया है। उसे ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है, जहाँ बंगाल पुलिस की विशेष टीम उससे अन्य फरार शूटरों और इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी हासिल करेगी।
हाई-प्रोफाइल केस का ‘बिहार कनेक्शन’ और राजनीतिक हलचल
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या का मामला बेहद संवेदनशील है। मुख्यमंत्री के इतने करीबी व्यक्ति की हत्या होना शासन और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब इस केस में बिहार का नाम जुड़ने से दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय बढ़ गया है। बंगाल पुलिस का मानना है कि इस हत्या के पीछे कोई बड़ा राजनैतिक या आपराधिक सिंडिकेट हो सकता है, जिसने बिहार के अपराधियों का उपयोग कर इस कांड को अंजाम दिया।
बक्सर से हुई इस गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार अब अपराधियों के लिए ‘सेफ हेवन’ बनता जा रहा है, जहाँ दूसरे राज्यों के अपराधी शरण ले रहे हैं या यहाँ के अपराधी दूसरे राज्यों में जाकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि, बक्सर पुलिस का कहना है कि वे बाहरी राज्यों की पुलिस को हर संभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
कोलकाता में पूछताछ और आगे की कार्रवाई
विशाल श्रीवास्तव को कोलकाता ले जाए जाने के बाद बंगाल एसटीएफ अब इस हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि विशाल से पूछताछ के बाद उन शूटरों की पहचान हो जाएगी जिन्होंने 6 मई की रात चंद्रनाथ रथ पर गोलियां चलाई थीं। इसके अलावा, पुलिस उन ‘सफेदपोश’ चेहरों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इस हत्या की सुपारी दी थी।
बंगाल पुलिस ने बक्सर के पांडेयपट्टी इलाके में कुछ अन्य संदिग्धों के बारे में भी जानकारी जुटाई है। पुलिस को शक है कि विशाल के कुछ अन्य सहयोगी भी इस मामले में शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में बक्सर और उसके आसपास के इलाकों में बंगाल पुलिस की कुछ और छापेमारी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, विशाल श्रीवास्तव बंगाल पुलिस की हिरासत में है और मध्यमग्राम पुलिस स्टेशन में उसके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है। 2026 के इस सबसे चर्चित हत्याकांड की जांच अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है, जहाँ बक्सर से हुई यह गिरफ्तारी एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।


