​पाटीपुल घाट पर बड़ी लापरवाही: पूजा सामग्री विसर्जित करने गए दंपती की आंखों के सामने गंगा में समा गई स्कॉर्पियो; हैंडब्रेक लगाना भूलना पड़ा भारी

पटना। राजधानी पटना के दीघा स्थित पाटीपुल घाट पर रविवार की शाम एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सुरक्षा और सतर्कता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। श्रद्धा और भक्ति के भाव से गंगा किनारे पहुँचे एक सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी के लिए रविवार का दिन किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ। शिवपुरी मोहल्ले के रहने वाले इस दंपती की आंखों के सामने उनकी अपनी ही स्कॉर्पियो गाड़ी धीरे-धीरे लुढ़कते हुए गंगा की लहरों में समा गई। यह हादसा केवल एक यांत्रिक चूक नहीं थी, बल्कि पल भर की मानवीय गफलत का नतीजा था। हैरानी की बात यह रही कि जहाँ एक बुजुर्ग दंपती अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदी गई गाड़ी को बचाने के लिए चीख-पुकार कर रहे थे, वहीं वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी रही। रविवार, 10 मई 2026 की इस घटना ने न केवल दीघा क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, बल्कि सोशल मीडिया के इस दौर में मानवीय संवेदनाओं के गिरते स्तर को भी उजागर कर दिया है। दीघा थाना पुलिस सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक पानी की गहराई ने गाड़ी को अपने आगोश में ले लिया था।

पुण्य के कार्य में घटी अनहोनी: क्या है पूरा मामला

​राजधानी के शिवपुरी इलाके में रहने वाले राम नरेश सिंह, जो शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, उनके घर में रविवार को एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। पूजा-पाठ संपन्न होने के बाद, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा की अवशिष्ट सामग्री और फूलों को पवित्र गंगा में विसर्जित करने के लिए वे अपनी पत्नी के साथ अपनी सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी से दीघा के पाटीपुल घाट पहुँचे थे। मूल रूप से बेगूसराय के रहने वाले राम नरेश सिंह ने घाट पर पहुँचकर गाड़ी को गंगा की ढलान वाली जगह पर खड़ा किया।

​दंपती गाड़ी से नीचे उतरे और पूजा सामग्री लेकर गंगा की ओर बढ़े। इसी दौरान वे एक छोटी सी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया को भूल गए—उन्होंने गाड़ी का हैंडब्रेक (Handbrake) नहीं लगाया था। ढलान वाली सतह होने के कारण गुरुत्वाकर्षण ने अपना काम शुरू किया और भारी-भरकम स्कॉर्पियो धीरे-धीरे आगे की ओर सरकने लगी। जब तक राम नरेश सिंह का ध्यान अपनी लुढ़कती गाड़ी की ओर गया, तब तक वह उनके नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी।

चीखते रहे बुजुर्ग, वीडियो बनाती रही ‘डिजिटल’ भीड़

​हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू वह रहा जो आज के समाज की कड़वी हकीकत को दर्शाता है। जैसे ही स्कॉर्पियो ने ढलान पर रफ्तार पकड़ी, राम नरेश सिंह और उनकी पत्नी उसे रोकने के लिए पागलों की तरह उसकी ओर दौड़े। वे गाड़ी को पीछे से पकड़ने और रोकने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ढलान और गाड़ी का वजन उनके प्रयासों पर भारी पड़ रहा था। उन्होंने वहां खड़े दर्जनों लोगों से मदद के लिए गुहार लगाई।

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घाट पर उस वक्त काफी लोग मौजूद थे, लेकिन दुखद यह है कि किसी ने भी आगे बढ़कर बुजुर्ग दंपती की मदद करने की जहमत नहीं उठाई। लोग अपने मोबाइल फोन निकालकर डूबती गाड़ी और तड़पते दंपती का वीडियो बनाने में व्यस्त थे। मदद के लिए उठने वाले हाथों से ज्यादा मोबाइल के कैमरे खुले हुए थे। राम नरेश सिंह बार-बार लोगों से विनती करते रहे कि कोई आकर धक्का लगाकर या ईंट लगाकर गाड़ी को रोक ले, लेकिन किसी ने उनकी पुकार नहीं सुनी। देखते ही देखते गाड़ी गहरे पानी में चली गई और कुछ ही पलों में पूरी तरह जलमग्न हो गई।

10 साल पुराना साथ और यादों का जलसमाधि

​बताया जा रहा है कि डूबी हुई स्कॉर्पियो करीब 10 वर्ष पुरानी थी। एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के लिए उसकी गाड़ी केवल एक वाहन नहीं, बल्कि उसके जीवन की मेहनत और यादों का हिस्सा होती है। राम नरेश सिंह के लिए यह दोहरा झटका था—एक तरफ उनकी संपत्ति का नुकसान और दूसरी तरफ समाज की संवेदनहीनता।

​घाट पर मौजूद लोगों का कहना था कि अगर केवल चार से पांच लोग भी समय रहते राम नरेश सिंह का साथ दे देते, तो गाड़ी को डूबने से बचाया जा सकता था। ढलान की शुरुआत में ही यदि कोई पहिये के नीचे पत्थर या कोई अवरोध लगा देता, तो स्कॉर्पियो वहीं रुक जाती। लेकिन वीडियो बनाने की होड़ ने एक बुजुर्ग के नुकसान को ‘कंटेंट’ में बदल दिया। जैसे ही गाड़ी पानी में पूरी तरह समाई, दंपती बेबस होकर गंगा के किनारे बैठ गए। उनके चेहरे पर छाई बेबसी वहां खड़े उन सभी लोगों के लिए एक सवाल थी जो मदद के बजाय तमाशा देख रहे थे।

प्रशासनिक मुस्तैदी और बचाव की चुनौतियां

​घटना की जानकारी मिलते ही दीघा थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुँची। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय गोताखोरों से संपर्क किया। हालांकि, रात का समय होने और गंगा के उस हिस्से में पानी की गहराई और मिट्टी की फिसलन अधिक होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी बाधा आई। पुलिस ने क्रेन बुलाने की भी कोशिश की, लेकिन गाड़ी अब पानी के भीतर किस स्थिति में है और कितनी दूर बह गई है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया।

​दीघा थाना प्रभारी ने बताया कि यह हादसा पूरी तरह से सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण हुआ है। ढलान वाली जगहों पर वाहन खड़ा करते समय हैंडब्रेक के साथ-साथ गियर में गाड़ी रखना अनिवार्य होता है, जिसे चालक भूल गए थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या गाड़ी के भीतर कोई कीमती सामान या दस्तावेज भी थे। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि हादसे के वक्त गाड़ी के भीतर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, वरना यह एक बड़ी जानलेवा त्रासदी बन सकती थी।

घाटों पर सुरक्षा और पार्किंग की समस्या

​पाटीपुल घाट और दीघा के अन्य घाटों पर पार्किंग की कोई व्यवस्थित जगह नहीं है। लोग अक्सर अपनी गाड़ियां सीधे ढलान पर ही खड़ी कर देते हैं। इस हादसे ने पटना नगर निगम और जिला प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी दी है कि घाटों पर ‘बैरीकेडिंग’ या सुरक्षा घेरा होना चाहिए ताकि कोई भी वाहन अनियंत्रित होकर सीधे नदी में न गिरे।

​विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों के किनारे की मिट्टी अक्सर भुरभुरी और फिसलन वाली होती है। ऐसे में वहां भारी वाहन ले जाना जोखिम भरा होता है। राम नरेश सिंह के साथ हुई यह घटना उन सभी लोगों के लिए सबक है जो घाटों पर अपनी गाड़ियां लेकर जाते हैं। थोड़ी सी गफलत न केवल आर्थिक नुकसान करा सकती है, बल्कि जान पर भी बन आती है। फिलहाल, स्कॉर्पियो को गंगा से बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव और गहराई ने इस काम को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया है। दीघा पुलिस ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से फिलहाल उस क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ा दी है।

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