तमिलनाडु में सरकार बनाने की तैयारी तेज, बहुमत जुटाने के बाद राज्यपाल से मिले विजय

तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और लगातार बदलते समीकरणों के बाद आखिरकार टीवीके प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के बाद अब विजय सरकार बनाने का दावा पेश करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हैं। शनिवार को पूरे दिन चेन्नई में राजनीतिक हलचल तेज रही और टीवीके कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। बहुमत का आंकड़ा पूरा होने के बाद विजय राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश करने पहुंचे।

हालांकि दिनभर घटनाक्रम कई बार बदला और मुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर इंतजार भी बढ़ता गया। पहले विधायकों के समर्थन को लेकर अनिश्चितता बनी रही और बाद में राज्यपाल से मुलाकात के समय को लेकर स्थिति उलझती नजर आई। लेकिन शाम होते-होते राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई और विजय को राज्यपाल से मिलने का अवसर मिल गया।

सूत्रों के अनुसार विजय ने सरकार बनाने के लिए कुल 120 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी संख्या तक पहुंचने के बाद टीवीके ने सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी। जैसे ही समर्थन का आंकड़ा पूरा हुआ, चेन्नई स्थित पार्टी कार्यालय और विजय के आवास के बाहर समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने इसे “नए राजनीतिक युग” की शुरुआत बताया।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना गया। हालांकि विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की। इसके बाद एक सीट छोड़ने के कारण उनकी पार्टी की प्रभावी संख्या 107 विधायकों तक रह गई।

सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा जुटाना टीवीके के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन धीरे-धीरे कई दलों ने विजय को समर्थन देना शुरू किया। कांग्रेस ने सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने का एलान किया। कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने से विजय की स्थिति मजबूत हुई।

इसके बाद शनिवार को राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले। विदुथलाई चिरुथिगल काची यानी वीसीके ने भी विजय को समर्थन देने का फैसला किया। वीसीके के दो विधायकों के समर्थन से टीवीके को और मजबूती मिली। वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी बिना शर्त समर्थन का एलान कर दिया। पार्टी के दो विधायक विजय के पक्ष में आ गए।

वामपंथी दलों ने भी इस राजनीतिक घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाई। सीपीआई और सीपीआई(एम) ने सरकार गठन के मुद्दे पर विजय का समर्थन करने का फैसला किया। दोनों दलों के दो-दो विधायक टीवीके के समर्थन में आए। इस तरह अलग-अलग दलों के समर्थन के बाद विजय के पास कुल 120 विधायकों का समर्थन हो गया, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु में यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राज्य की राजनीति में नई पीढ़ी के उदय का संकेत भी माना जा रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय ने बेहद कम समय में अपनी पार्टी को मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित किया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शिक्षा और युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

दिनभर राज्यपाल से मुलाकात को लेकर भी काफी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। पहले खबर आई कि विजय राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात करने लोकभवन पहुंचे थे, लेकिन समय नहीं मिलने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। बताया गया कि शाम छह बजे की निर्धारित मुलाकात नहीं हो सकी, जिससे समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई।

इसके बाद कुछ समय के लिए राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं कि क्या सरकार गठन में कोई नई अड़चन आ गई है। लेकिन थोड़ी देर बाद लोकभवन की ओर से संदेश मिलने के बाद विजय दोबारा राज्यपाल से मिलने पहुंचे। इसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रतिक्रिया भी चर्चा में रही। उन्होंने विजय को नई सरकार गठन के लिए शुभकामनाएं दीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान तमिलनाडु की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

टीवीके समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक जीत नहीं बल्कि जनता की उम्मीदों की जीत है। कार्यकर्ताओं के अनुसार राज्य के लोगों ने पारंपरिक राजनीति से अलग नया नेतृत्व चुना है। यही कारण है कि पार्टी कार्यालयों में जश्न का माहौल लगातार बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती स्थिर सरकार चलाने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी। गठबंधन सहयोगियों के समर्थन से बनने वाली सरकार में राजनीतिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं माना जा रहा। ऐसे में आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे पर भी सबकी नजर रहेगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विजय की लोकप्रियता ने उन्हें चुनावी सफलता जरूर दिलाई, लेकिन प्रशासनिक अनुभव और शासन क्षमता की असली परीक्षा अब शुरू होगी। जनता ने उन्हें बड़े भरोसे के साथ समर्थन दिया है और अब रोजगार, विकास, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर ठोस काम की उम्मीद की जा रही है।

फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह विजय और टीवीके के इर्द-गिर्द घूम रही है। राज्य में पहली बार इतनी तेजी से उभरी किसी नई राजनीतिक पार्टी ने सत्ता के करीब पहुंचकर सबको चौंका दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यपाल सरकार गठन को लेकर आगे क्या फैसला लेते हैं और विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ कब लेते हैं।

यदि सब कुछ तय राजनीतिक गणित के अनुसार चलता है, तो तमिलनाडु जल्द ही एक नए मुख्यमंत्री और नए राजनीतिक अध्याय का गवाह बन सकता है। टीवीके के लिए यह केवल शुरुआत मानी जा रही है, जबकि राज्य की राजनीति के लिए यह बदलाव लंबे समय तक असर छोड़ सकता है।

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