
प्रशासनिक लापरवाही को लेकर छात्रों का आक्रोश सामने आया है। रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होने से परेशान एक छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यह मामला बुधवार को उस समय चर्चा में आ गया जब सत्र 2022-25 के छात्र सोनू कुमार विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए और अपनी मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने का ऐलान कर दिया।
छात्र का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण उसका भविष्य अधर में लटक गया है। रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होने की वजह से वह न तो अपने शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त कर पा रहा है और न ही आगे की पढ़ाई और नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर पा रहा है। छात्र ने कहा कि कई बार आवेदन देने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिससे मजबूर होकर उसे यह कदम उठाना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार सोनू कुमार सत्र 2022-25 का छात्र है। उसने बताया कि विश्वविद्यालय में नामांकन के बाद भी अब तक उसका रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किया गया है। रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिलने के कारण उसके कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य रुक गए हैं। छात्र का कहना है कि बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के वह परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में शामिल नहीं हो पा रहा है।
सोनू कुमार ने आरोप लगाया कि उसने इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को 21 अप्रैल और 28 अप्रैल 2026 को लिखित आवेदन दिया था। आवेदन में उसने अपनी समस्या का पूरा विवरण देते हुए जल्द समाधान की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छात्र का कहना है कि हर बार उसे केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।
इसी लापरवाही से नाराज होकर छात्र ने 6 मई 2026 को सुबह 11 बजे से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी। कई छात्रों ने भी सोनू कुमार के समर्थन में आवाज उठाई और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
अनशन पर बैठे छात्र ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उसका रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर संबंधित कॉलेज को नहीं भेजता, तब तक वह अपना आंदोलन जारी रखेगा। उसने कहा कि यह केवल उसकी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यशैली का उदाहरण है, जिससे कई छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में माहौल काफी गर्म हो गया। कई छात्र संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए। छात्रों का कहना है कि यदि समय पर रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन को संवेदनशीलता और तत्परता दिखानी चाहिए।
अनशन स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में इस तरह की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। कभी परीक्षा परिणाम में देरी, कभी प्रमाण पत्र वितरण में समस्या और अब रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होने जैसी घटनाएं छात्रों को मानसिक रूप से परेशान कर रही हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
इस पूरे मामले में छात्र अनुपम ऑफिस ने भी सोनू कुमार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर पहले से ही तनाव में रहते हैं, ऐसे में विश्वविद्यालय की लापरवाही उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासन की चुप्पी को लेकर छात्रों में और अधिक नाराजगी देखी जा रही है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। छात्रों के शैक्षणिक जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी प्रक्रियाओं में देरी भी उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में यदि बुनियादी प्रशासनिक कार्य समय पर पूरे नहीं होंगे तो छात्रों का भरोसा कमजोर होगा। ऐसे मामलों में प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि छात्रों को आंदोलन और अनशन जैसे कदम उठाने की नौबत न आए।
अनशन के दौरान कई स्थानीय लोग भी छात्र के समर्थन में पहुंचे। लोगों का कहना था कि शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्र की समस्या का जल्द समाधान करने की अपील की।
फिलहाल सोनू कुमार का आमरण अनशन जारी है और सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। छात्रों का कहना है कि वे अपने साथी छात्र के साथ खड़े हैं और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


