चंपारण के लिए बड़ी सौगात: रक्सौल हवाई अड्डे के नवनिर्माण का रास्ता साफ; रनवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए टेंडर जारी, ‘डबल इंजन’ सरकार ने भरी उड़ान

पटना/रक्सौल। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की जनता, विशेषकर चंपारण और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी साझा की है। लंबे समय से प्रतीक्षित रक्सौल हवाई अड्डे (Raxaul Airport) के नवनिर्माण की दिशा में केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार, 06 मई 2026 को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि रक्सौल हवाई अड्डे के पुनर्विकास के लिए आवश्यक तकनीकी और बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु टेंडर जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे ‘विकसित बिहार’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। इस हवाई अड्डे के शुरू होने से न केवल उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नए पंख लगेंगे।

क्या है टेंडर में? आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, रक्सौल हवाई अड्डे के एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर (Airside Infrastructure) के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी सेवाओं का टेंडर जारी कर दिया गया है। यह किसी भी हवाई अड्डे के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। परियोजना के तहत निम्नलिखित बुनियादी सुविधाओं का निर्माण और आधुनिकीकरण किया जाएगा:

  • रनवे (Runway): बड़े वाणिज्यिक विमानों के सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए अत्याधुनिक धावन पथ।
  • एप्रन (Apron): विमानों की पार्किंग, लोडिंग और अनलोडिंग के लिए विशेष कंक्रीट क्षेत्र।
  • टैक्सीवे (Taxiway): वह मार्ग जो रनवे को एप्रन और टर्मिनल बिल्डिंग से जोड़ता है।

​इन सुविधाओं के विकसित होने से रक्सौल हवाई अड्डा क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत नियमित उड़ानों के लिए पूरी तरह सक्षम हो जाएगा।

चंपारण और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए सामरिक महत्व

​रक्सौल हवाई अड्डे का नवनिर्माण न केवल चंपारण क्षेत्र बल्कि पूरे बिहार के लिए सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

  1. अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी: नेपाल सीमा के अत्यंत निकट होने के कारण, यह हवाई अड्डा भारत और पड़ोसी देश नेपाल के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
  2. व्यापार और पर्यटन: रक्सौल एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। हवाई सेवा शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों को बड़े बाजारों तक पहुँच मिलेगी। साथ ही, चंपारण के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए सैलानियों का आवागमन सुगम होगा।
  3. स्थानीय अर्थव्यवस्था: हवाई अड्डे के निर्माण और भविष्य में इसके परिचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

‘डबल इंजन’ सरकार का संकल्प: विकास की नई ऊँचाई

​सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र-राज्य के आपसी समन्वय का परिणाम है। उन्होंने लिखा, “डबल इंजन सरकार के संकल्प के साथ, बिहार अब विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है”

​यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब बिहार सरकार राज्य के विभिन्न हिस्सों में बंद पड़े हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। रक्सौल हवाई अड्डे का विकास ‘नए बिहार’ और ‘परिवर्तित बिहार’ की उस परिकल्पना का हिस्सा है, जहाँ दूर-दराज के क्षेत्रों को आधुनिक परिवहन तंत्र से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

चंपारण में उत्साह की लहर

​रक्सौल के स्थानीय निवासियों और व्यवसायियों ने इस घोषणा का गर्मजोशी से स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि हवाई अड्डे के निर्माण से रक्सौल की पहचान एक वैश्विक गेटवे के रूप में स्थापित होगी। टेंडर जारी होने की इस प्रक्रिया के साथ ही अब धरातल पर काम शुरू होने की उम्मीद जग गई है। आने वाले महीनों में कंसल्टेंसी रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कार्य में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस परियोजना को चंपारण के विकास की दिशा में एक ‘माइलस्टोन’ बताया है।

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