पांडव हत्याकांड के खिलाफ जंतर-मंतर पर जन सुराज का प्रदर्शन, न्याय की मांग तेज

दिल्ली में कथित रूप से बिहार के युवक पांडव की हत्या के मामले ने राजधानी सहित देशभर में रहने वाले बिहारियों के बीच गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। इसी के विरोध में रविवार, 3 मई 2026 को जन सुराज पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर एक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में दिल्ली के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में बिहार मूल के लोग शामिल हुए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया गया।

यह प्रदर्शन केवल एक घटना के विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बिहारियों के साथ हो रहे कथित भेदभाव, अपमान और हिंसा के खिलाफ एक व्यापक जनभावना का प्रतीक बनकर सामने आया। जंतर-मंतर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वसमाज के लोग पार्टी लाइन से ऊपर उठकर शामिल हुए, जिससे यह साफ हो गया कि यह मुद्दा सामाजिक न्याय और सम्मान से जुड़ा हुआ है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता विवेक कुमार ने कहा कि दिल्ली में बिहारियों की आबादी काफी बड़ी है, इसके बावजूद उन्हें रोजाना अपमान, शोषण और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पांडव की हत्या ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया है कि राजधानी में भी बिहारियों की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी द्वारा बिहारी पहचान बताने पर की गई हिंसा बेहद गंभीर मामला है और यह सामाजिक भेदभाव की गहरी समस्या को दर्शाता है।

विवेक कुमार ने कहा कि बिहार के लोग देश के हर हिस्से में मेहनत कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। निर्माण कार्य, सेवा क्षेत्र, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में उनकी भूमिका अहम है। इसके बावजूद अगर उन्हें अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ता है, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पांडव को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को कड़ी सजा नहीं दी जाती।

सभा में अनूप मैथिल और आदित्य मोहन ने इस मामले को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच दिल्ली पुलिस के बजाय एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। दूसरी मांग के रूप में उन्होंने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की बात कही। तीसरी मांग के तहत उन्होंने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद संबंधित नेतृत्व द्वारा अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। पीड़ित परिवार के घर जाकर संवेदना व्यक्त करने के बजाय उन्हें कार्यालय बुलाना एक दुर्भाग्यपूर्ण कदम है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार के साथ न्याय किया जाए।

जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता अक्षत सोनक ने अपने संबोधन में कहा कि बिहारियों के साथ हो रहा भेदभाव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में यह समस्या देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग मेहनत और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कई जगहों पर सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने इस स्थिति को बदलने के लिए सामाजिक जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और न्याय की मांग को मजबूती दी। ‘न्याय दो’ और ‘भेदभाव बंद करो’ जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। कई लोगों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें विभिन्न स्थानों पर भेदभाव का सामना करना पड़ा है।

इस कार्यक्रम में विवेक कुमार, अनूप मैथिल, आदित्य मोहन, शांतनु, धीरू मिश्रा, चंद्रजीत, अक्षत सोनक, धनराज, रिचा, प्रभात, रितेश और हरेंद्र सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए है।

प्रदर्शन के बाद जन सुराज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि इस मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह प्रदर्शन एक बड़े सामाजिक संदेश के रूप में सामने आया है, जिसमें समानता, सम्मान और न्याय की मांग प्रमुख रही। पांडव हत्याकांड के विरोध में उठी यह आवाज न केवल एक मामले तक सीमित है, बल्कि यह देशभर में बिहारियों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है।

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