
पटना, 3 मई 2026: बिहार में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने बिहार राजस्व सेवा के 47 अधिकारियों का निलंबन समाप्त कर दिया है। ये अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाने के कारण निलंबित किए गए थे, जिससे राजस्व कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई थी। अब सरकार ने इन अधिकारियों को राहत देते हुए उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है।
क्यों किया गया था निलंबन?
दरअसल, 9 मार्च 2026 को बिहार के कई अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। इससे जमीन, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में व्यापक असर पड़ा। प्रशासनिक कामकाज लगभग ठप हो गया था, जिसके चलते सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए इन 47 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।
निलंबन के दौरान सभी अधिकारियों का मुख्यालय पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया था, ताकि उन पर निगरानी रखी जा सके और विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ सके।
बिना शर्त वापसी के बाद मिला राहत
30 अप्रैल 2026 को इन अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश से बिना शर्त लौटने की घोषणा की। इसके बाद सरकार ने उनके रुख को सकारात्मक मानते हुए निलंबन समाप्त करने का निर्णय लिया।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि अब इन सभी अधिकारियों को निलंबन मुक्त कर दिया गया है और उन्हें अपने-अपने जिलों के समाहर्ता (डीएम) के समक्ष योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
अब कहां होगी पोस्टिंग?
सरकार ने फिलहाल इन अधिकारियों की नई पोस्टिंग को लेकर स्पष्ट किया है कि वे संबंधित जिलों में ही योगदान देंगे। यानी जहां वे पहले कार्यरत थे या जहां प्रशासन आवश्यक समझेगा, वहां उन्हें पुनः तैनात किया जाएगा।
हालांकि अंतिम पदस्थापन का निर्णय जिला प्रशासन और विभागीय आवश्यकताओं के आधार पर लिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि कुछ अधिकारियों को नई जगहों पर भी पोस्टिंग मिल सकती है, ताकि प्रशासनिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
किन-किन अधिकारियों को मिला लाभ?
निलंबन से मुक्त किए गए अधिकारियों में कई प्रमुख अंचलाधिकारी और राजस्व पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें खगड़िया, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुजफ्फरपुर, सिवान, भोजपुर, भागलपुर, पूर्णिया, पटना, नालंदा, अररिया, जमुई, गया और अन्य जिलों के अधिकारी शामिल हैं।
इनमें अमित कुमार (बेलदौर, खगड़िया), पुनीत कौशल (खगड़िया सदर), राहुल कुमार (बक्सर सदर), नंदन कुमार (बरियारपुर, बेगूसराय), मनीष कुमार (बरारी, कटिहार), सतीश कुमार गुप्ता (चांद, कैमूर), प्रशांत कुमार झा (झंझारपुर), अर्चना कुमारी (टेटिया बंबर, मुंगेर), विश्वजीत सिंह (बोचहां, मुजफ्फरपुर), डॉ. हर्षा कोमल (शाहकुंड, भागलपुर) सहित कई अधिकारी शामिल हैं।
इसके अलावा भी बड़ी संख्या में अन्य अधिकारी, जो अलग-अलग जिलों में पदस्थापित थे, उन्हें भी निलंबन से राहत दी गई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर असर
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के प्रशासनिक ढांचे पर गहरा असर डाला था। सामूहिक अवकाश के कारण आम लोगों को जमीन से जुड़े कार्यों में काफी परेशानी हुई थी। दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और अन्य प्रक्रियाएं प्रभावित हुई थीं।
सरकार के इस फैसले से अब उम्मीद जताई जा रही है कि राजस्व से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को राहत मिलेगी।
सरकार का संदेश
इस फैसले के जरिए सरकार ने दो स्पष्ट संदेश दिए हैं। पहला, अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूसरा, यदि अधिकारी अपनी गलती सुधारते हैं और काम पर लौटते हैं, तो सरकार उन्हें दूसरा मौका देने के लिए भी तैयार है।
यह संतुलित रुख प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, सरकार अब राजस्व विभाग में कामकाज को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने, निगरानी बढ़ाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
बिहार में 47 राजस्व अधिकारियों का निलंबन खत्म होना एक बड़ा प्रशासनिक फैसला है, जो अनुशासन और सहानुभूति—दोनों के संतुलन को दर्शाता है। जहां एक ओर सरकार ने सख्ती दिखाई, वहीं दूसरी ओर सुधार के अवसर भी दिए।
अब देखना होगा कि ये अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को किस तरह निभाते हैं और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को किस हद तक बेहतर बना पाते हैं।


