
जबलपुर (मध्य प्रदेश) के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के दौरान मानवता और साहस की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। सरकारी बचाव दल के पहुंचने से पहले ही बिहार के 10 मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचा ली।
जानकारी के अनुसार, इनमें से सात मजदूर पश्चिम चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल के अलग-अलग गांवों से हैं। हादसे के समय ये सभी मजदूर बरगी डैम के पास पुल निर्माण कार्य में लगे हुए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, क्रूज अनियंत्रित होकर अचानक डूबने लगा। मौके पर मौजूद मजदूरों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण के तुरंत पानी में छलांग लगा दी और बचाव कार्य शुरू कर दिया।
सुपरवाइजर बृंद कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने पहले ही क्रूज के पायलट को रुकने के लिए चेतावनी दी थी, लेकिन पायलट ने बात नहीं मानी और आगे बढ़ गया, जिसके कुछ ही देर बाद यह बड़ा हादसा हो गया।
इसके बाद मजदूरों ने रस्सियों की मदद से पानी में उतरकर एक-एक कर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। बताया जा रहा है कि सरकारी रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले ही इन मजदूरों ने 12 से अधिक लोगों की जान बचा ली।
हालांकि इस हादसे में चार लोगों की मौत भी हो गई, जिनके शव मजदूरों की मदद से बाहर निकालकर एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजे गए।
इस साहसिक अभियान में पिपरासी प्रखंड के मंझरिया खास गांव के प्रेम कुशवाहा, श्रीपतनगर के उपेंद्र राय, बगहा के सागर गुप्ता, राजेश साहनी, राजेश यादव, अरविंद यादव, संजय साहनी के अलावा दरभंगा के संतोष सदाय, भवन सदाय और रामबहादुर सदाय शामिल रहे।
इन मजदूरों के साहस और मानवीयता की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने उनके इस अदम्य साहस को सम्मानित करते हुए प्रत्येक को 51-51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इन सभी को सम्मानित करने की मांग की है।


